Giridih : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से संबंधित प्रस्तावित नए नियम (भेदभाव निषेध निनियमन) का सवर्ण एकता मंच की गिरिडीह इकाई ने विरोध किया है. मंच के प्रतिनिधिमंडल ने इम मामले में राष्ट्रपति के नाम गिरिडीह डीसी को ज्ञापन सौंपा है. ज्ञापन में नए नियम के संभावित दुष्प्रभावों पर पुनर्विचार कर संतुलित सुरक्षा प्रावधान जोड़े जाने की मांग की गई है.
ज्ञापन में कहा गया है कि भारत का संविधान समानता, गरिमा व न्याय का समर्थन करता. भेदभाव के विरुद्ध कठोर कदम आवश्यक है, लेकिन ऐसे कानून भी नहीं होने चाहिए जो स्वयं किसी नए प्रकार के संस्थागत अन्याय, असंतुलन या भय का वातावरण पैदा करें. मंच का कहना है कि वर्तमान स्वरूप में भेदभाव निषेध विनियमन संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 की भावना के अनुरूप है या नहीं, इस पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं.
मंच के सदस्यों ने आरोप लगाया कि नए नियम में भेदभाव की परिभाषा अस्पष्ट है. इससे अकादमिक निर्णयों जैसे परीक्षा में कम अंक, शोध प्रस्ताव की अस्वीकृति या चयन न होने जैसे मामलों को भी जातिगत भेदभाव के रूप में प्रस्तुत किए जाने की संभावना बनती है. इससे शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता, निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली व मेरिट आधारित प्रक्रिया पर दबाव पड़ सकता है.
मंच ने यह भी आशंका जताई है कि शिकायत निवारण प्रक्रिया में पूर्व दोषारोपण की प्रवृत्ति विकसित हो सकती है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है. इससे शिक्षकों और छात्रों पर मनोवैज्ञानिक, सामाजिक व व्यावसायिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि भेदभाव की स्पष्ट, वस्तुनिष्ठ व साक्ष्य आधारित परिभाषा तय की जाए, हर शिकायत पर औपचारिक कार्रवाई से पहले निष्पक्ष प्रारंभिक जांच अनिवार्य हो, शिकायत निवारण समितियों में सभी वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व व स्वतंत्र कानूनी विशेषज्ञ को शामिल किया जाए.
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