Giridih : कोरोना काल में लगातार दो साल तक लगातार स्कूलें बंद रहने के बाद खुली है. लॉकडाउन पीरियड में बच्चे घर पर ही ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे. स्कूलों के लगातार दो साल तक बंद रहने का असर बच्चों की उपस्थिति पर पड़ा है. डहर ऐप के सर्वे में यह बात सामने आई है कि मात्र पचास प्रतिशत बच्चे ही स्कूलों में उपस्थित हो रहे हैं. 40 हजार से ज्यादा बच्चे ड्राप आउट हैं. इन ड्राप आउट बच्चों को स्कूल लाने का लक्ष्य निर्धारिय शिक्षा विभाग निर्धारित किया है. शिक्षा विभाग अधिकारियों का कहना है की जिले के सरकारी स्कूलों में चार लाख पच्चीस हजार से अधिक बच्चों का नामांकन है. ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूलों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इन बच्चों को रूआर 2022 बैक टू स्कूल अभियान के तहत जोड़ा जा रहा है. अभियान सफल रहने पर स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़कर 4 लाख 65 हजार हो जाएगी. स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए जिले के सभी बीईइओ, बीपीओ समेत शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों को जिम्मेवारी सौंपी गई है. अधिकारियों को गांव-गांव जाकर ड्रॉप आउट बच्चों को नजदीकी स्कूलों से जोड़ना है. जिले के कई प्रखंडों में इसकी शुरूआत भी हो चुकी है. कोरोना पॉजिटिव परिवारों के बच्चे नहीं आ रहे स्कूल जिले में जिन परिवारों के कोई सदस्य कोरोना पॉजिटिव हुए थे, उन परिवारों के बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं. उन बच्चों को भी स्कूल लाने का अभियान चलाया जा रहा है. नए सत्र में भी उन बच्चों का नामांकन किया जा रहा है. शिक्षा विभाग के सहायक परियोजना पदाधिकारी रोहित कमल और अविनव कुमार सिन्हा को अभियान की जिम्मेवारी सौंपी गई है. डीईओ पुष्पा कुजूर ने बताया कि रूआर 2022 बैक टू स्कूल अभियान को सफल बनाने में अधिकारियों के अलावा विद्यालय प्रबंधन समिति को भी भूमिका निभानी है. कोरोना काल के बाद स्कूलें खुली है. स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पूर्व की तरह हो, इसे लेकर शिक्षा विभाग गंभीर है. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=291518&action=edit">यह
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गिरिडीह : कोरोना काल के बाद खुले स्कूल, बच्चों की उपस्थिति हुई कम

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