कैसे ठंडा रहता है मटके का पानी
मिट्टी से तैयार मटके की सतह पर अतिसूक्ष्म छिद्र होते हैं. इन छिद्रों से पानी का वाष्पोत्सर्जन होता है. सतह पर वाष्पोत्सर्जन के कारण सतह ठंड रहती है. वाष्पोत्सर्जन क्रिया में पानी का वाष्प बनना हर तापमान में जारी रहता है. इस क्रिया में बुलबुले नहीं बनते. वायु की गति वाष्पोत्सर्जन क्रिया को तेज कर देती है, जिससे मटके की दीवार ठंड रहती है. यही वजह है कि मटके या सुराही का पानी हमेशा ठंड रहता है.स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
मटका या सुराही पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है. इसमें रखा पानी पीने से गला खराब होने का डर इस वजह से कम होता है कि पानी का तापमान इंसानी शरीर के तापमान के बराबर होता है. यही वजह है कि शहर कि तुलना में ग्रामीण इलाके में आज भी लोग मटके या सुराही का पानी पीना ज्यादा पसंद करते हैं. वैसे अब शहर में भी मटके का पानी पीने का प्रचलन बढ़ा है. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=571691&action=edit">यहभी पढ़ें : गावां : होली और शब-ए-बारात को लेकर शांति समिति की हुई बैठक [wpse_comments_template]

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