alt="" width="225" height="300" /> महलाल सोरेन[/caption] आदिवासी नेता महलाल सोरेन का कहना है कि पारसनाथ पहाड़ प्राचीन समय से आदिवासी समाज का धर्म स्थल रहा है. संथाल आदिवासी इस पहाड़ की पूजा करते रहे हैं. जैन समाज इसे अपना धर्म स्थल बताकर आदिवासियों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं. इसे लेकर बहुत जल्द आंदोलन छेड़ा जाएगा. [caption id="attachment_518861" align="aligncenter" width="300"]
alt="" width="300" height="142" /> सिकंदर हेंब्रम[/caption] पीरटांड़ के पूर्व प्रखंड प्रमुख सिकंदर हेंब्रम का कहना है कि पारसनाथ पहाड़ संथाल आदिवासियों की परंपरा और संस्कृति से जुड़ा है. पारसनाथ पहाड़ को ब्रिटिश काल में आदिवासी धार्मिक स्थल के रूप में गजट में शामिल किया गया था. जैन समाज का दावा गलत है. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=518122&action=edit">यह
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