कोडरमा लोकसभा सीट पर उम्मीदवारों के हार जीत में कुशवाहा वोटरों की भूमिका निर्णायक
अभय वर्मा Giridih : कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में उम्मीदवारों के हार जीत में कुशवाहा वोटरों की भूमिका निर्णायक है. प्रोफ़ेसर जयप्रकाश वर्मा के भाजपा छोड़ने के बाद पार्टी को कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में मजबूत कुशवाहा नेता की तलाश थी. जिला परिषद् अध्यक्ष (जिप) मुनिया देवी 22 जून को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की जनसभा में भाजपा का दामन थाम ली. इनके पार्टी में शामिल होने से सवाल उठने लगा है कि क्या भाजपा जयप्रकाश वर्मा के समानान्तर कुशवाहा नेता की तलाश कर ली है? हालांकि भाजपा के लिए जिप अध्यक्ष कितनी कारगर साबित होगी यह भविष्य बताएगा. वैसे मुनिया देवी के बारे में राजनीति के जानकारों की राय है कि क्षेत्र में उनकी वैसी राजनीतिक पहचान नहीं है, जिससे वह आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में कुशवाहा वोटर को एकजुट कर सके. कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में वर्मा परिवार का खास दबदबा रहा है. पूर्व से ही प्रणव वर्मा भाजपा खेमे में रहे हैं. अब मुनिया देवी भी भाजपा में शामिल हो चुकी है. यह बताना भी लाजिमी है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी के संभावित उम्मीदवारों की धड़कनें अभी से तेज हो गई है. ऐसा इसीलिए कि जिप अध्यक्ष विधानसभा चुनाव में टिकट का दावा कर सकती है. भाजपा के पूर्व विधायक लक्ष्मण स्वर्णकार का पार्टी में कद घटने के बाद जयप्रकाश वर्मा गांडेय विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के खेवनहार बने थे. वर्ष 1977 में स्वर्णकार पहली बार गांडेय से विधायक बने थे. जीवन के 70 बसंत पार कर चुके स्वर्णकार के पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरने की कम संभावना है.कोडरमा में कुशवाहा वोटरों की जीत और हार में निर्णायक भूमिका
कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में कुशवाहा वोटरों की अच्छी खासी तादाद है. संख्या बल पर कुशवाह वोटर जीत और हार में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. पूर्व सांसद स्वर्गीय रीतलाल प्रसाद वर्मा को 5 बार सांसद बनाने में कुशवाहा वोटरों की निर्णायक भूमिका रही. रीतलाल की जीत में जयप्रकाश वर्मा के पिता स्वर्गीय जगदीश कुशवाहा अहम भूमिका निभाते थे. रीतलाल के पुत्र प्रणव वर्मा दो बार कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से चुनावी भाग्य आजमा चुके हैं, लेकिन दोनों बार उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा. भाजपा सूत्रों की मानें तो फिलहाल पार्टी को उम्मीदवार की तलाश नहीं है. कोडरमा से सांसद अन्नपूर्णा देवी की जीत में सहभागी बनने वाले नेता की तलाश है. यही कारण है कि कुशवाहा समाज से ताल्लुक रखने वाली मुनिया देवी को भाजपा में शामिल कराया गया. आगमी लोकसभा चुनाव में मुनिया देवी की भूमिका का सबको बेसब्री से इंतजार रहेगा. दूसरी तरफ ये चर्चा भी है कि भाजपा में फिलहाल कोडरमा के लिए कोई वैकेंसी नहीं है. सच्चाई यह भी है कि राष्ट्रीय दलों में कब क्या हो जाए कहना मुश्किल है? रविंद्र राय और रविंद्र पांडे इसके दो अच्छे उदाहरण है. लोकसभा चुनाव में कोडरमा से जीत दर्ज करने के बावजूद रविंद्र राय का टिकट काटा गया तो 5 बार के सांसद रहे रविंद्र पांडेय को गिरिडीह से उम्मीदवार नहीं बनाया गया. नेताओं की बड़ी जमात में मुनिया देवी भाजपा में पहचान बना पाएगी या नहीं यह अपने आप में सवाल है. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=676936&action=edit">यहभी पढ़ें : गिरिडीह : जेपी नड्डा के वार पर विपक्ष का पलटवार, कहा झूठ पर टिकी है मोदी सरकार [wpse_comments_template]
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