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गोधरा : साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने के दोषी उम्रकैद की सजा काट रहे 8 लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी

NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट द्वारा आज शुक्रवार को गुजरात के गोधरा में 2002 में ट्रेन के कोच में आग लगाकर 59 लोगों की हत्या करने के दोषी 8 लोगों को जमानत दिये जाने की खबर है. CJI डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने 8 दोषियों को जमानत दी. इन सभी दोषियों को निचली अदालत सहित हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा दी है. नेशनल">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">नेशनल

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फांसी की सजा पाने वाले 4 दोषियों को जमानत नहीं दी

जानकारी के अनुसार 17-18 साल जेल में बिताने के आधार पर दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत से फांसी की सजा पाने वाले 4 दोषियों को जमानत नहीं दी. जैसी कि खबर है, अदालत ने इसी साल 20 फरवरी को दोषी करार दिये गये लोगों की आयु और कारागार में बिताये गये समय सहित अन्य डिटेल मांगा था. कोर्ट में गुजरात सरकार का पक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रखा. मेहता ने अपनी दलील में 2017 के गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई जिसमें 11 दोषियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था. तुषार मेहता कोर्ट ने को बताया था कि यह केवल पथराव का मामला नहीं था. दोषियों ने साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी को बंद कर दिया था, जिससे ट्रेन में सवार 59 यात्रियों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे.

अब्दुल रहमान धंतिया को छह माह के लिए अंतरिम जमानत मिली थी

इससे पहले 13 मई, 2022 को कोर्ट ने दोषियों में से एक अब्दुल रहमान धंतिया उर्फ कांकट्टो को छह माह के लिए इस आधार पर अंतरिम जमानत दी थी कि उसकी पत्नी टर्मिनल कैंसर से पीड़ित थी. 11 नवंबर 2022 को कोर्ट ने उसकी जमानत 31 मार्च 2023 तक बढ़ाई थी. इसी क्रम में पिछले वर्ष दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे फारूक नाम के दोषी को इस आधार पर जमानत दे दी थी कि वह 17 साल की सजा काट चुका है. इस केस में उसकी भूमिका ट्रेन में पथराव की थी.

 साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में उपद्रवियों द्वारा आग लगाई गयी थी

27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में उपद्रवियों द्वारा आग लगाई गयी थी. कोच में सवार कारसेवक अयोध्या से आ रहे थे. आग लगने से 58 लोगों की जलकर मौत हो गयी थी. ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2011 में 31 लोगों को दोषी करार देते हुए 11 को मौत की सजा सुनाई थी. अन्य 20 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी थी. इस क्रम में 2017 में गुजरात हाई कोर्ट ने 11 दोषियों की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था. [wpse_comments_template]

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