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पढ़ाई के नाम पर गोरखधंधा : मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की मनमानी, कमाई के लिए एफ-10 का कर रहे इस्तेमाल

संस्था के नाम पर चल रहा स्कूल, राइट टू एजुकेशन के अनुपालन का बुरा हाल Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग में मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की मनमानी से इन दिनों अभिभावक परेशान हैं. इन दिनों शहर में इन दिनों संस्था के नाम पर स्कूल खोलकर बिजनेस चलाया जा रहा है. ऐसे स्कूल अपनी कमाई के लिए 10 फैक्टर (एफ-10) का इस्तेमाल कर रहे हैं. इनमें नामांकन, डोनेशन, नई पुस्तक, रजिस्ट्रेशन, यूनिफॉर्म, सरस्वती पूजा, परीक्षा फीस, एनुअल फंक्शन, प्रैक्टिकल और राष्ट्रीय त्योहारों में झंडोत्तोलन के नाम पर विद्यार्थियों से एक साथ जोड़कर पैसे लिए जा रहे हैं. दो माह के एडवांस के साथ पहली ही कक्षा में नामांकन के लिए 38,360 रुपए लिए जा रहे हैं. यह सिलसिला हर वर्ष का होता है. यहां तक कि प्रत्येक वर्ष किताब बदल दिए जाते हैं, ताकि स्कूल प्रबंधन को मोटी कमीशन हाथ लग सके. उन्हें बुकसेलर से 60% तक कमीशन मिलते हैं. यूनिफॉर्म में भी करीब 30% कमीशन आते हैं. यही वजह है कि पुस्तकों और यूनिफॉर्म के लिए निश्चित दुकान को निर्धारित रखा गया है. नामांकन के वक्त ही स्कूल की ओर से लंबी सूची देते हुए दुकानों के नाम भी बता दिए जाते हैं. ऐसे में प्रत्येक वर्ष सिर्फ किताब से करोड़ों रुपए के वारे-न्यारे किए जाते हैं. स्कूल प्रबंधन संस्था के नाम पर बच्चों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

स्कूल प्रबंधन पर होनी चाहिए कार्रवाई : सरस्वती देवी

हजारीबाग उत्तरी शिवपुरी की सरस्वती देवी कहती हैं कि ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई होनी चाहिए. जो स्कूल सरकार का टैक्स चोरी कर रही है, वह शिक्षा कितनी अच्छी देगी, यह बड़ा सवाल है. सरकार ने 2009 में शिक्षा अधिकार अधिनियम का कानून बनाया. लेकिन आज सरेआम आरटीई की धज्जियां उड़ाई जा रही है. ऐसे स्कूल में 25% गरीब बच्चे भी नि:शुल्क नहीं पढ़ते हैं. सिर्फ कागजी कवायद पूरी की जाती है, वास्तव में माजरा कुछ और होता है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/book-rashid_613-225x300.jpg"

alt="" width="225" height="300" /> इसे भी पढ़ें : छवि">https://lagatar.in/why-did-the-government-not-take-action-on-the-report-of-the-commissioner-against-chhavi-ranjan-ed-should-investigate-babulal/">छवि

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बच्चों की पढ़ाई नहीं, पैसे कमाना मुख्य उद्देश्य : रजिया खातून

पेलावल की रजिया खातून कहती हैं कि ऐसे प्राइवेट स्कूलों ने तो पढ़ाई को धंधा बना लिया है. बच्चों की पढ़ाई नहीं, उसका मुख्य मकसद पैसे कमाना है. भवन दिखाकर मान्यता तो ले लेता है, लेकिन सीबीएसई का कोई भी नॉर्म्स का अनुपालन नहीं करता है. नौवीं कक्षा का रजिस्ट्रेशन भी फर्जी तरीके से करता है. मोटी रकम भी अभिभावकों से वसूलता है. फिर दूसरे स्कूलों से उसका परीक्षा फॉर्म भरवाता है. पहले अभिभावकों से बच्चों के नामांकन के वक्त यह सब बातें छिपा ली जाती है. बाद में न तो बच्चों और न अभिभावकों के पास कोई विकल्प रहता है, सिवाय इसके कि स्कूल प्रबंधन जो कहता है, उसे सुनें.

सरकार को दिखाते हैं नो प्रॉफिट नो लॉस और टीचर को वेतन भी कम देते हैं : पासवा 

[caption id="attachment_616429" align="alignleft" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/vipin-kr-sinha_771-150x150.jpg"

alt="विपिन सिन्हा" width="150" height="150" /> विपिन सिन्हा[/caption] इस संबंध में पासवा (प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन) के प्रदेश उपाध्यक्ष विपिन सिन्हा ने बताया कि संस्था के नाम पर ऐसे स्कूल बिजनेस कर रहे हैं. इसमें बड़ी-बड़ी संस्था और बड़े-बड़े एजुकेशन माफिया हैं. यह सरकार को नो प्रॉफिट नो लॉस दिखाते हैं और टीचर को वेतन भी कम देते हैं. हजारीबाग में कई ऐसे स्कूल हैं जो संस्था की आड़ में वह एजुकेशन माफिया बने हुए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि एडमिशन के नाम पर नामांकन के अलावा डोनेशन भी लेते हैं. ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को अपने बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है. इसे भी पढ़ें : बड़गाईं">https://lagatar.in/bargain-cos-report-pradeep-bagchi-the-first-claimant-of-the-land-occupied-by-the-army-played-on-this-report/">बड़गाईं

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