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सबसे खराब प्रधानमंत्री पाया : राजीव रंजन

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हमने नव आर्थिक साम्राज्यवाद की नीतियां पायी है :केडी सिंह Medininagar: इप्टा द्वारा संचालित संस्कृतिक पाठशाला की 29वीं कड़ी में "2023 में हमने क्या खोया क्या पाया" विषय पर चर्चा का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार गोकुल बसंत एवं अखिल भारतीय किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष केडी सिंह ने संयुक्त रूप से किया. चर्चा का विषय प्रवेश कराते हुए प्रेम प्रकाश ने कहा कि साल के अंतिम दिन हम लोग संस्कृतिक पाठशाला में एकत्रित हुए हैं. हम सभी आज के विषय को अपने अपने अनुभव के आधार पर 2023 में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक स्तर पर हमने क्या खोया क्या पाया इसका मूल्यांकन करेंगे. इस विषय पर कोई भी एक व्यक्ति शत प्रतिशत मूल्यांकन नहीं कर सकता. राजनीतिक स्तर पर देखें तो हमने देश और संविधान में लिखित मौलिक अधिकारों को खोया है. अनुभव मिश्रा ने कहा कि हमने जीवन का लय खोया है और सांस्कृतिक यात्रा के दौरान हमने ज्ञान पाया है. निषाद खान ने कहा कि आंदोलन और आंदोलन के तौर तरीकों को हमने खोया है और धार्मिक उन्माद पाया है. इसे भी पढ़ें-रांचीः">https://lagatar.in/ranchi-case-of-threatening-editor-ed-will-interrogate-hotwar-jailer-on-tuesday/">रांचीः

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“शांति खोकर अशांति पाया, भाईचारा खोकर भेदभाव पाया”

राजीव रंजन ने कहा कि आंदोलन करने का स्पेस और शिक्षा के स्तर को खोया है और सबसे खराब प्रधानमंत्री पाया है. पत्रकार संजय सिंह उमेश ने कहा कि पत्रकारिता के स्तर और पत्रकारिता के व्यापक स्पेस खत्म हुए हैं. शिव शंकर प्रसाद ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री पद की गरिमा, सांस्कृतिक रूप से श्रद्धा के भाव, सांगठनिक रूप से स्वयं की जिम्मेवारी और राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक रूप से संप्रभुता खोई है. उपेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि हम दुनिया को रहे हैं और पा रहे हैं जंजीर. संवेदना खोया है और पाया है क्रूरता. गोविंद प्रसाद ने कहा कि बच्चों की बचपन खोई है और आंदोलन के तेवर खोए हैं. पाने को हमने व्यक्तिगत स्तर पर हमने इप्टा का राष्ट्रीय सम्मेलन और संस्कृतिक पाठशाला पाया है. जहां संवाद करने का स्पेस मिला है.अध्यक्षता कर रहे गोकुल वसंत ने कहा कि चारों तरफ अंधेरा है. इस अंधेरे में हम क्या पा सकते हैं, विकास की धीमी रफ्तार के अलावे. वर्तमान सिस्टम हमें मूर्ख बना रहा है, हम बन रहे हैं. विज्ञान के युग में वैज्ञानिक चेतना कुंद की जा रही है. मौके पर समरेश सिंह, विजेता नंद तिवारी, तनु नागरे, अजीत ठाकुर, राकेश पाठक, उत्कर्ष गौतम, संजीत दुबे, सच्चिदानंद सहित अन्य लोग उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें-बोकारो">https://lagatar.in/bokaro-tribal-society-paid-tribute-to-the-martyrs-of-kharsawan-firing/">बोकारो

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