Lagatar Desk : दिल्ली हाईकोर्ट में आज NEET परीक्षा को लेकर मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थाई बैन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को दलील दी गई कि टेलीग्राम एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन गया है, जिसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों और गैरकानूनी कामों के लिए आसानी से किया जा सकता है.
Delhi HC reserves verdict on plea of Telegram app against ban. pic.twitter.com/iQMKG4Xv61
— Press Trust of India (@PTI_News) June 18, 2026
सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि इस मामले में विस्तृत जवाब अदालत में जमा कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि टेलीग्राम को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया था और उनकी दलीलों के साथ जांच रिपोर्ट भी रिकॉर्ड में शामिल की गई है. सरकार के अनुसार, इस मामले की समीक्षा कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति ने की थी.
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सवाल उठाया कि कुछ अभ्यर्थी दोबारा NEET-UG एग्जाम दे रहे हैं, क्या सिर्फ इसलिए 15 करोड़ टेलीग्राम यूजर्स के अधिकारों को सीमित किया जा सकता है. इस पर सरकार ने कहा कि जरूरी परिस्थितियों में कार्रवाई की गई और नियमों के तहत कंपनी को सुनवाई का अवसर भी दिया गया. सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि टेलीग्राम का कुछ फीचर सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन रहा है. खासकर ऐसा फीचर, जिसमें मैसेज भेजने के बाद डेट और समय बदला जा सकता है.
News Alert ! How can right of 150 million Telegram users can be curtailed just because set of citizens are taking up NEET-UG retest: Delhi HC. pic.twitter.com/ALIOgflfqJ
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सरकार का कहना है कि इससे जांच प्रभावित हो सकती है. टेलीग्राम पर बैन लगाने की वजह उसके कुछ ऐसे फीचर बताए जा रहे हैं, जिनसे यूजर्स की पहचान और गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. सरकार का दावा है कि इसी कारण साइबर अपराधी और ठग इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं. फिलहाल हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब देखना यह होगा कि अदालत सरकार के पक्ष में फैसला सुनाता है या फिर टेलीग्राम कंपनी के पक्ष में.
बताया जा रहा है कि NEET परीक्षा से जुड़े पेपर लीक विवाद के बाद सरकार ने एहतियात के तौर पर टेलीग्राम पर एक हफ्ते का प्रतिबंध लगाया है. फिलहाल भारत में ऐप की सेवाएं प्रभावित हैं. दूसरी ओर, टेलीग्राम के सीईओ ने बैन का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि किसी एक ऐप को बंद करने से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी. उनका तर्क है कि गलत काम करने वाले लोग दूसरे प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल कर सकते हैंय
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