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देश के मंदिरों में मौजूद लाखों टन सोना, आभूषण पर कब्जा करने की बात से सरकार का इनकार, Fake न्यूज करार दिया

NewDelhi : सोशल मीडिया पर भारत के विभिन्न हिंदू मंदिरों में मौजूद अकूत सोने  के भंडार को  लेकर पिछले कुछ दिनों से  जारी अफवाहों के कारण हिंदू समुदाय में भारी हलचल थी. लेकिन अब केंद्र सरकार ने इन अफवाहों को  फेक न्यूज करार देते हुए पूरी तरह से धवस्त कर दिया है. 

 

 
दरअसल  सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किये जा रहे दावों में बतलाया  जा रहा था कि सरकार देश के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं के सोने का अनिवार्य मुद्रीकरण यानी Monetization) करने जा रही है.

 

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्रालय और पीआईबी  ने आधिकारिक बयान जारी कर इस खबर को पूरी तरह से  Fake और भ्रामक करार दिया है. 


 
सोने और चांदी की लगातार रिकॉर्ड तोड़ती कीमतों  से इतर सोशल मीडिया पर  तैर रही इसभ्रामक खबर ने देश भर के श्रद्धालुओं और मंदिर ट्रस्टों के माथे पर  चिंता की लकीरें बढ़ा दी थी.

 

दावे किये जा रहे थे कि  सरकार केरल के प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर सहित  आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर आदि ऐतिहासिक स्थलों में रखे सोने का मुद्रीकरण करने की योजना बना रही है.

 

वायरल की जा रही खबरों में बताया जा रहा था कि सरकार केवल सोने का मुद्रीकरण  ही नहीं करेगी.  बल्कि सरकार मंदिरों की प्राचीन संरचनाओं पर लगे सोने को अपने नियंत्रण में लेगी. 

 

 प्रेस इंफॉरमेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेक रिपोर्ट ने  रकार की स्थिति साफ करते हुए लिखा, कुछ वायरल खबरों में कहा जा रहा है कि मंदिरों के शिखरों, गर्भगृह के दरवाजों या अन्य संरचनाओं पर मढ़ी गई सोने की प्लेटों को भारत का रणनीतिक स्वर्ण भंडार  (Strategic Gold Reserve) घोषित कर दिया जायेगा. 

 

PIB ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह काल्पनिक और बेबुनियाद  करार दिया. कहा कि सरकार धार्मिक आस्थाओं और मंदिर की संपत्तियों का पूर्ण सम्मान करती है.

 

सरकार ने इस मामले में देश की जनता से अपील की है कि वे आर्थिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील विषयों पर बिना पुष्टि वाले संदेशों को आगे फॉरवर्ड न करें. 

 

सरकार ने यह बात साफ कर दी कि देश के मंदिरों में भक्तों द्वारा चढ़ाये गये लाखों टन सोने और आभूषणों को सरकार न तो बेचेगी और न ही मुद्रीकरण करेगी. कहा कि  मंदिरों के खजाने और उनकी संरचनाएं संबंधित मंदिर ट्रस्टों के विधिक नियंत्रण में ही रहेंगी.

 

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