Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने देवघर की पुनासी डैम परियोजना से जुड़े एक मामले में याचिकाकर्ता सचिदानंद चौधरी को राहत दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता के मकान एवं अन्य निर्मित संरचनाओं का मुआवजा 16 सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया है. हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति आनंद सेन की कोर्ट ने यह आदेश दिया है.
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याचिकाकर्ता का कहना था कि वर्ष 1986 में पुनासी डैम परियोजना के लिए उनकी भूमि और उसपर बना मकान अधिग्रहित कर लिया गया था, लेकिन आज तक उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया. उनका दावा था कि भूमि उन्हें वैध प्रधानी पट्टा के तहत मिली थी, उनका नाम रजिस्टर-2 में दर्ज था और वे नियमित रूप से लगान भी जमा करते थे. इसके बावजूद उपायुक्त ने 12 जनवरी 2021 के आदेश से यह कहते हुए मुआवजे का दावा खारिज कर दिया कि भूमि सरकारी (गैरमजरूआ) है और उसका बंदोबस्त विधिसम्मत नहीं था.
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संबंधित भूमि सरकारी गैरमजरूआ भूमि है तथा याचिकाकर्ता के पक्ष में कोई वैध बंदोबस्त सिद्ध नहीं हुआ है. इसलिए उन्हें मुआवजा देने का कोई अधिकार नहीं बनता.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि सरकारी अभिलेखों और जांच रिपोर्टों से यह निर्विवाद है कि संबंधित भूमि पर याचिकाकर्ता का मकान वर्षों से मौजूद था.
कोर्ट ने कहा कि यदि भूमि के स्वामित्व या बंदोबस्त की वैधता को लेकर विवाद है, तो उस आधार पर भूमि का मुआवजा अलग विषय हो सकता है, लेकिन लंबे समय से मौजूद मकान और अन्य संरचनाओं के मुआवजे से याचिकाकर्ता को वंचित नहीं किया जा सकता.
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के मकान एवं अन्य संरचनाओं का आवश्यक मूल्यांकन कर उनकी क्षतिपूर्ति 16 सप्ताह के भीतर अदा की जाए. इसके साथ ही इस रिट याचिका को निष्पादित कर दिया.
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