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निरसा :
शीघ्र होगा पोद्दारडीह रानी तालाब का सौंदर्यीकरण
कनीय अभियंता ने विधायक अपर्णा सेन के साथ ड्रोन कैमरे से लिया जायजा निरसा प्रखंड अंतर्गत पोद्दारडीह रानी तालाब का जीर्णोद्धार शीघ्र ही होनेवाला है. लघु सिचाई विभाग के कनीय अभियंता हाफ़िज़ अंसारी ने सोमवार 12 जून को ड्रोन कैमरे से तालाब का जायजा लिया. इस मौके पर निरसा की विधायक अपर्णा सेनगुप्ता भी मौजूद थी. कनीय अभियंता अंसारी ने बताया कि डीएमएफटी से रानी तालाब का सौंदर्यीकरण एवं जीर्णोद्धार कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होने वाला है. आज ड्रोन कैमरे से तालाब का निरीक्षण किया गया.विधायक ने विधानसभा में उठाई थी आवाज
विधायक अपर्णा सेनगुप्ता ने कहा कि तालाब के जीर्णोद्धार के लिए 17 मार्च 2021 को विधानसभा में शून्यकाल के दौरान और हाल ही विगत 23 मार्च को तारांकित प्रश्न के जरिये आवाज उठाई थी. उन्होंने कहा कि दशकों से इस तालाब के जल का इस्तेमाल आसपास के दर्जनों गांव के लोग अपने दैनिक कार्य एवं पीने के लिए करते आ रहे हैं. तालाब में मिट्टी, गाद, कीचड़ एवं खर पतवार भर जाने से लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. आस-पास के कई गांवों के लोग महापर्व छठ पूजा के लिए भी इस तालाब तक आते हैं. अब उम्मीद है कि जल्द ही तालाब का जीर्णोद्धार शुरू हो जाएगा.लातेहार :
शहर के बीच से गुजरी जायत्री नदी अतिक्रमण का शिकार
शहर के बीच से गुजरने वाली जायत्री नदी इन दिनों भूमि माफिया के लिए कमाई का सबसे बेहतर जरिया बनी हुई है. नदी के दोनों ओर वैसी भूमि है जो सिर्फ कृषि कार्य के उपयोग में लायी जाती थी. कोई रास्ता नहीं रहने से उस भूमि की कीमत अपेक्षाकृत काफी कम थी, लेकिन जमीन दलालों ने नदी का अतिक्रमण कर अपने निजी कोष से भराई कर भूमि की प्लॉटिंग कर काफी महंगे दामों में भूमि की बिक्री कर रहे हैं. भूमि माफिया ने जायत्री नदी का सबसे अधिक उपयोग बाजार टांड़ एवं जुबली रोड के पास किया है. कई जमीन दलालों ने नदी को भरकर रकबा बढ़ाकर बिक्री शुरू कर दी है. जिससे नदी का अस्तित्व ही समाप्त होते जा रहा है. बताया जाता है कि नदी की चौड़ाई 30 से 40 फीट तक थी. लेकिन आज शहर के कई क्षेत्रों में यह 5 से 7 फीट तक रह गई है. नदी के किनारे की जमीन को भरकर जमीन का रकबा बढ़ा दिया जा रहा है और दोनों तरफ से भराई कर नदी की चौड़ाई घटा दी जा रही है. ह्यूम पाइप डालकर सस्ता पुल बना दिया गया है. ऐसे अवैध कंस्ट्रक्शन को नगर पंचायत के द्वारा मुहर लगायी जा रही है. सरकारी जमीन एवं नदी को भरकर बनाए गए मकानों की भी होल्डिंग रसीद काटी जा रही है. जिससे भूमि माफिया का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है. हालांकि अंचल कार्यालय से नामांतरण नहीं हो रहा है. लेकिन होल्डिंग रसीद नगर पंचायत विभाग के द्वारा दी जा रही है और प्रत्येक वर्ष की होल्डिंग टैक्स की वसूली जा रही है. जिससे भूमि- माफिया इस अवैध भूमि को वैध ठहराने में बाज नहीं आ रहे हैं.धनबाद :
नियमों की अनदेखी कर निर्माण, निगम ने की कार्रवाई
[caption id="attachment_667148" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> समय होम्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर को दो करोड़ रु. जुर्माना[/caption] नियमों को ताख पर रख डायरेक्टर द्वारा कराया जा रहा था डीएनडी हाइट्स भवन का निर्माण कराया जा रहा था, जिस पर. नगर आयुक्त ने रोक लगा दी. दो करोड़ आठ लाख अठारह हजार नौ सौ पांच रुपये का जुर्माना भी लगा दिया. निगम की इस कार्रवाई से फ्लैट बुक कराने वालों में हड़कंप मचा है. धनबाद के जयप्रकास नगर स्थित गली नम्बर 7 के रहने वाले अजय सिंह ने जमशेदपुर निवासी राजेश कुमार सिंह ( समय होम्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर) को बहुमंजिला भवन निर्माण के लिए जयप्रकास नगर स्थित गली नम्बर 7 में अपनी जमीन दी थी. डायरेक्टर द्वारा कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद उक्त जमीन पर डीएनडी हाइट्स के नाम पर 2016 में भवन निर्माण का कार्य शुरू किया गया. 2022 में जमीन मालिक अजय सिंह ने नगर निगम धनबाद में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें डायरेक्टर पर स्वीकृत नक्शा के अनुसार काम नहीं करने का आरोप था. जमीन मालिक की शिकायत पर जब निगम के अधिकारियों ने डीएनडी हाइट्स भवन की जांच तो उसमें कई त्रुटियां पाई. इसके बाद नगर आयुक्त ने समय होम्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर पर कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य पर रोक लगा दी व पेनाल्टी भी लगाया. निगम की इस कार्रवाई से लाखों रुपये लोन लेकर फ्लैट बुक करानेवालों के होश उड़ गए हैं. उन्हें अब एक ही चिंता सता रही है कि उनका पैसा वापस कैसे मिलेगा.
लाखों रुपए फंस गए हैं
इस संबंध में जयप्रकाश नगर स्थित गली नम्बर 6 की बबीता कुमारी ने बताया कि निगम और समय होम्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर के बीच की लड़ाई में हमारे लाखों रुपये फंस गए हैं. लाखों रुपये लोन लेकर फ्लैट बुक कराया था. अब पैसे रिफंड के लिए रेरा में मामला दर्ज कराया है. लवलीन पांडेय ने बताया कि काफी सोच समझ कर फ्लैट बुक कराया था. जल्द से जल्द पैसा रिफंड हो जाये इसके लिए रेरा के शरण में गया हूं. डायरेक्ट राजेश सिंह ने दूरभाष पर कहा कि कंस्ट्रक्शन का काम जमीन मालिक और हमारे कारण बंद है. निगम की पेनाल्टी वाली बात झूठ है. उन्होंने कहा कि जिसने भी फ्लैट बुक कराया है, उसे समय रहते हैंड ओवर कर दिया जाएगा.
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हजारीबाग : चला बुलडोजर, जिला प्रशासन से हुई बड़ी चूक या कुछ और है मामला alt="" width="600" height="400" /> सरकारी भूमि का बोर्ड हटाकर भू-माफिया ने प्लॉट कर नया नामकरण कर दियाअब सरकारी भूमि पर लगे बोर्ड को ही भू-माफियाओं ने उखाड़ फेंका और वहीं नरसिंह नगर का बोर्ड लगा दिया. इससे भ्रम की स्थिति बन गई है. यह स्थल पंचशील इलाके में ही है. वहीं पंचशील भूमि घोटाले में प्रशासन से भी बड़ी चूक की बात सामने आयी है. जिस भूमि पर सरकारी जमीन बता कर बुलडोजर चलाया गया, वह जमीन प्रतिबंधित सूची में है ही नहीं. ऐसे कुछ दस्तावेज सामने आए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि खाता संख्या 542 का प्लॉट नंबर 1928 में बुलडोजर चलाया गया और कहा गया कि यह जमीन सरकारी है. वहां गैर कानूनी ढंग से चहारदीवारी खड़ी कर दी गई. लेकिन खाता नंबर 542 का प्लॉट नंबर 1189 और 1505 जमीन ही प्रतिबंधित सूची में है. प्लॉट नंबर 1928 की जमीन झारखंड सरकार की सूची में प्रतिबंधित नहीं है. जिन लोगों ने खरीदी है उनमें एक खरीदार मनोज कुमार भी हैं. उनका कहना है कि झारखंड सरकार की सूची में अगर उनकी जमीन प्रतिबंधित भूमि में नहीं है, तो बुलडोजर कैसे चलाया गया. जो जमीन प्रतिबंधित भूमि में शामिल है, उसे छोड़ दिया गया. उपायुक्त इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराएं और उन लोगों को आरोप मुक्त करें. मनोज कुमार का यह भी कहना है कि अगर उन लोगों से गलती हुई है, तो उनपर भी कार्रवाई करें. साथ ही अगर किसी पदाधिकारी या कर्मी ने गलत किया है, तो उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, तभी दूध का दूध और पानी का पानी होगा. वहीं एक नया मामला भी सामने आया है कि जिला प्रशासन ने सरकारी बोर्ड लगाकर खाता संख्या 273 और प्लॉट संख्या 1005 को सरकारी भूमि का बड़ा नोटिस बोर्ड लगाया था. लेकिन स्थानीय और भू माफिया ने वह साइन बोर्ड हटा दिया और वहां नरसिंह नगर का नया बोर्ड लगा दिया गया है. अब यह बड़ी समस्या होगी कि कहीं किसी व्यक्ति को झांसे में रख कर सरकारी जमीन को भी भू-माफिया बेच न दे.
ओकनी तालाब का छह एकड़ वजूद खत्म
हजारीबाग शहर के अतिप्राचीन ओकनी तालाब का वजूद खतरे में हैं. इसके किनारे कचरा डालकर डंप किया जा रहा है. 16 एकड़ में फैला यह तालाब अब महज 10 एकड़ के आसपास बचा है. छह एकड़ को भर दिया गया या फिर अतिक्रमित कर लिया गया. मुहल्लेवासियों का कहना है कि इस तालाब के अस्तित्व को बचाने की जरूरत है.alt="" width="150" height="150" />
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की उड़ाई जा रही धज्जियां : राहुल कुमार
राहुल कुमार कहते हैं कि ओकनी तालाब काली मंदिर के पीछे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. वहां नगर निगम की ओर से ही कचरा डंप किया जा रहा है. पहले से अतिक्रमित ओकनी तालाब का वजूद भी सिमटता चला जा रहा है. कभी करीब 16 एकड़ में फैला यह तालाब अब महज 10 एकड़ के आसपास बचा है.alt="" width="150" height="150" />
पक्षी विहार बनाने की चल रही थी बात : मीतू कुमारी
राहुल कुमार कहते हैं कि ओकनी तालाब काली मंदिर के पीछे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. वहां नगर निगम की ओर से ही कचरा डंप किया जा रहा है. पहले से अतिक्रमित ओकनी तालाब का वजूद भी सिमटता चला जा रहा है. कभी करीब 16 एकड़ में फैला यह तालाब अब महज 10 एकड़ के आसपास बचा है.alt="" width="150" height="150" />
तालाब के वजूद को बचाने की जरूरत है : गौतम महतो
गौतम कुमार कहते हैं कि ओकनी तालाब के वजूद को बचाने की जरूरत है. इसको लेकर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में भी शिकायत दर्ज की गई है. यह निजी तालाब है और यहां हर वर्ष पानी फल सिंघारा उगाया जाता है. इसके लिए नीलामी कराई जाती है. यहां अक्सर प्रवासी पक्षियों को कलरव करते भी देखा जाता है.alt="" width="150" height="150" />
योजना के अधीन तालाब आ जाता, तो बेहतर: विश्वनाथ ओकनी
वार्ड-19 के निवर्ततान पार्षद विश्वनाथ विश्वकर्मा कहते हैं कि अमृत सरोवर योजना के अधीन तालाब आ जाता, तो बेहतर होता. इससे यह तालाब भी संरक्षित होता और इसका विकास भी होता. यहां गंदगी जाम नहीं होनी चाहिए. इसके बारे में कई बार निगम से कहा भी गया है.हजारीबाग में चल रहा जमीन हुकुमनामा का खेल, फंस रहे भोले भाले लोग
पंचशील जमीन घोटाला मामला इन दिनों हजारीबाग में सुर्खियों में है. इस घोटाले में कई सफेदपोश भी शामिल हैं, जो पर्दे के पीछे से अपना खेल खेल चुके हैं. लेकिन इस पूरे खेल में कोई फंसा है तो आम जन. संजय कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने दो कट्ठा तीन डिसमिल जमीन खरीदी. उनका कहना है कि उन्होंने रसीद भी कटाया और उसका म्यूटेशन भी किया गया. अब पंचशील की जमीन सरकारी हो गई है. अगर रसीद और म्यूटेशन किया गया है, तो इसकी जिम्मेवारी किसकी है. उस जिम्मेवार व्यक्ति पर कार्रवाई होनी चाहिए .वे लोग मेहनत से पैसा जमा करके घर खरीदने के लिए जमीन खरीदी थी. इन्हीं में से एक भीम कुमार भी हैं. उनका कहना है कि उन लोगों को आज भू-माफिया कहा जा रहा है. यह भी कहा जा रहा कि उन्होंने सरकारी जमीन का अतिक्रमण किया है. लेकिन उनका कहना है कि वे लोग आम जनता हैं, जो अपनी गाढ़ी कमाई से जमीन खरीदी थी. अब उस जमीन पर सवाल खड़ा किया जा रहा है. इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए. अगर जमीन सरकारी निकली, तो हम वापस हो जाएंगे. हजारीबाग जिले में जमीन का जो खेल हुआ है वह फर्जी हुकुमनामा के जरिए किया गया है. फर्जी हुकुमनामा बनाकर भू-माफिया ने बड़े-बड़े प्लॉट बेच दिए और कुछ ने कब्जा भी कर लिया. आज से छह साल पूर्व पांच लोगों पर इचाक थाने में हुकुमनामा को लेकर एफ आईआरदर्ज किया गया था. दरअसल हजारीबाग रामगढ़ राजा के अधीन था. राज पाठ समाप्त होने के बाद हुकुमनामा का खेल शुरू हुआ. आज सिरसी हो या कोई अन्य मौजा वहां हुकुमनामा के जरिए ही जमीन देने की बात कही जा रही है. हजारीबाग के कटकमदाग सीओ शशि भूषण सिंह का भी कहना है कि अगर किसी भी व्यक्ति के पास हुकुमनामा है, तो आकर वह कार्यालय में मिलें. उसकी कार्बन डेटिंग कराई जाएगी. अगर वह गलत निकला, तो उस पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.तालाब बचाने की पहल करेंगे : मेयरनगर निगम हजारीबाग की निवर्तमान मेयर रोशनी तिर्की कहती हैं कि जांच कर तालाब बचाने की पहल करेंगे. वहां कचरा डंप नहीं होना चाहिए. अगर डंप हुआ है, तो उसे उठाना भी चाहिए. इस बारे में सफाई जमादार से बात की जाएगी.जमशेदपुर :
कीताडीह में परमाणु ऊर्जा विभाग के तालाब पर अतिक्रमणकारियों की गिद्ध दृष्टि
alt="" width="600" height="400" /> जमशेदपुर प्रखंड मुख्यालय से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित कीताडीह के मुईगुटू में परमाणु ऊर्जा विभाग के तालाब पर अतिक्रमणकारियों की गिद्ध दृष्टि पड़ गई है. बस्ती के एकमात्र तालाब का अतिक्रमण शुरू हो गया है. तालाब के दूसरे छोर पर झोपड़ीनुमा मंदिर बना दिया गया है. मंदिर की आड़ में मिट्टी भराई का काम जारी है. मंदिर बने होने के कारण बस्तीवासी इसका विरोध नहीं कर रहे हैं. वहीं परमाणु ऊर्जा विभाग तालाब खोदकर उसकी देखभाल भूल गया. सामाजिक संगठनों की ओर से तालाब में नहाने एवं पानी भरने के लिए सीढी एवं चेंजिंग रूम बनाया गया है. लेकिन गर्मी में तालाब का पानी कम हो जाने तथा पानी के नहाने योग्य नहीं रहने के कारण लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. तालाब का अतिक्रमण होने तथा पेयजल संकट पर स्थानीय लोगों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की.
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जलस्रोत पर अतिक्रमण का साया : वर्षा बास्के
कीताडीह के मुईगुटू में रहने वाले वर्षा बास्के ने बताया कि वर्षों पहले परमाणु ऊर्जा विभाग की ओर से खाली जमीन पर एक तालाब खोदा गया था. उक्त तालाब में पहले पानी रहता था, लेकिन उचित देखभाल नहीं होने के कारण तालाब का अस्तित्व मिटता जा रहा है. मंदिर के इर्द-गिर्द मिट्टी भरकर उसका अतिक्रमण किया जा रहा है. स्थानीय लोग उक्त तालाब के पानी का इस्तेमाल नहाने एवं घरेलू कार्यों में करते थे. लेकिन तालाब का पानी काफी गंदा होने के कारण लोगों ने इसका इस्तेमाल बंद कर दिया.अभी स्थानीय बच्चे मछली मारने का काम करते हैं. इससे पूरा पानी कादो में तब्दील हो गया है.
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alt="" width="150" height="150" /> पानी के लिए भटकते हैं लोग : एडविन बानरा
कीताडीह निवासी एडविन बानरा ने बताया कि परमाणु ऊर्जा विभाग के तालाब का धीरे-धीरे अतिक्रमण किया जा रहा है. सरकारी जमीन पर खोदे गए तालाब के कारण स्थानीय लोग चाहकर भी अतिक्रमणकारियों का विरोध नहीं कर पा रहे हैं. तालाब के समीप सोलर जल मीनार स्थापित की गई है, लेकिन पानी का लेयर काफी नीचे चले जाने के कारण सोलर जलमीनार से पानी नहीं निकलता है. उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से तालाब की गहराई बढ़ाने तथा देखभाल के लिए स्थानीय स्तर पर alt="" width="150" height="150" />
कमिटी गठित करने की मांग की. तालाब सूखने से पानी की किल्लत : मीना सामत
मुईगुटू की रहने वाली मीना सामत ने बताया कि बस्ती के एकमात्र तालाब की गहराई कम होने के कारण यह सूख गया है. तालाब के एक किनारे में थोड़ा पानी जमा है. उक्त पानी में घुसकर लोग मछली मारते हैं. इसके कारण पानी काफी गंदा हो गया है. इस कारण लोगों ने इसका इस्तेमाल बंद कर दिया है. स्थानीय लोग शौच इत्यादि कार्यों में उक्त पानी का इस्तेमाल करते हैं, जिसके कारण संक्रमण बढ़ने का खतरा है. पहले लोग नहाने धोने का काम करते थे. अब दूसरे मुहल्ले से पानी लाकर जरूरी काम निपटाना पड़ता है.alt="" width="150" height="150" />
अतिक्रमण पर कार्रवाई हो : वीर सिंह देवगम
तालाब के किनारे मंदिर एवं झोपड़ीनुमा घर बनाकर कर रह रहे अतिक्रमणकारीजमशेदपुर अंचल कार्यालय से सटे खासमहल के रहने वाले तरूण सुडेरा एवं उनके परिवार के नाम की 15 एकड़ जमीन भू-माफियाओं ने कब्जा ली. सभी जमीन बागबेड़ा थाना क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर है. अपने परिवार की जमीन वापस पाने के लिए तरूण सुडेरा ने डीसी से गुहार लगायी. सोमवार को गोविंदपुर में जनता दरबार लगा था. जहां तरूण सुडेरा अपने जमीन के कागजात के साथ पहुंचे तथा डीसी को जमीन का ब्यौरा समर्पित करते हुए भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त कराने की मांग की. तरूण सुडेरा द्वारा सौंपे गए कागजात का अवलोकन करने के बाद उपायुक्त ने इस संबंध में अंचल कार्यालय से रिपोर्ट मंगाने तथा आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया. बागबेड़ा में अलग-अलग जगहों पर है जमीन, डीसी ने कार्रवाई का दिलाया भरोसाबिल्डर मोहन सिंह ने धोखाधड़ी से बेच दी जमीन
alt="" width="600" height="400" /> तरूण सुडेरा ने बताया कि उनकी बागबेड़ा में अलग-अलग जगहों पर जमीन थी. कुछ जमीन की देखभाल एवं प्रबंधन का जिम्मा उनके पिता हरवंश लाल सुडेरा ने सोनारी के बिल्डर मोहन सिंह उर्फ चंद्रभूषण सिंह को दिया. चंद्रभूषण सिंह ने एग्रीमेंट के विपरीत अधिकांश जमीन को स्थानीय लोगों को प्लॉटिंग करके एग्रीमेंट के आधार पर बेच दिया. इसकी जानकारी होने के बाद तरूण सुडेरा ने थाने में मामला दर्ज कराया. जिसमें मोहन सिंह उर्फ चंद्रभूषण सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. मामला अभी अदालत में विचाराधीन है. इसी बीच सीपी टोला में स्थित जमीन के एक हिस्से पर पूर्व मुखिया पहाड़ सिंह के द्वारा कब्जा किया गया है. हालांकि पहाड़ सिंह इसे अपनी पुस्तैनी जमीन बता रहे हैं. पहाड़ सिंह के अनुसार 1932 के खतियान में उनके दादा दुबला भूमिज के नाम जमीन रैयतदार के रुप में दर्ज है. 1964 में उक्त जमीन जवाहरलाल सुडेरा के नाम पर चढ़ गया है. इस संबंध में उन्होंने जल्द ही वे टायटल सूट दायर करने की बात कही.
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