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सरकार को अबुआ आवास के लिए मिले 31 लाख आवेदन

 
  • 29.97 लाख आवेदनों का हुआ वेरिफिकेशन
  • 4 साल में मनरेगा में 4135 लाख मानव दिवस का हुआ सृजन
  • प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का 97.83 प्रतिशत निर्माण पूरा
  • बंजर भूमि पर कांटा रहित कैक्टस के पौधे लगाने की योजना पर काम कर रहा ग्रामीण विकास विभाग
  • ग्रामीण विकास सचिव चंद्रशेखर ने विभाग की चार साल की उलब्धियां बताई
Ranchi: झारखंड सरकार को अबुआ आवास योजना के लिए अबतक 32 लाख आवेदन मिल चुके हैं. इनमें से 29.97 लाख आवेदनों का वेरिफिकेशन किया जा चुका है. इनमें से करीब एक लाख आवेदन डुप्लीकेट मिले हैं. ग्रामीण विकास विभाग के सचिव चंद्रशेखर ने सूचना भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी. वे विभाग की 4 साल की उपलब्धियों को सामने रख रहे थे. सचिव ने कहा कि विभाग बंजर भूमि पर कांटा रहित कैक्टस के पौधे लगाने की योजना पर कार्य कर रहा है. यह पशु चारा के साथ वेगन लेदर निर्माण में भी काम आएगा. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत आवंटित 97.83 प्रतिशत मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है. 2016-2022 तक 15,92,171 आवासों की स्वीकृति दी गयी थी. इसमें से 15,57,730 आवास पूर्ण हो चुके हैं. भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के परफारमेंस इनडेक्स के अनुसार झारखंड राज्य इस मामले में पूरे देश में दूसरे स्थान पर है.

अगले वित्तीय वर्ष में 1100 लाख मानव दिवस सृजन का लक्ष्य

सचिव ने कहा कि 4 वर्ष के भीतर मनरेगा के तहत अब तक 4135 लाख मानव दिवस का सृजन किया गया है. वर्तमान वित्तीय वर्ष में 900 लाख स्वीकृत मानव दिवस के विरुद्ध अब तक कुल 911.49 लाख मानव दिवस सृजन करते हुए कुल 2962.40 करोड़ रूपये की राशि खर्च की जा चुकी है. वहीं शत-प्रतिशत मजदूरी का भुगतान किया गया है. साथ ही अगले वित्तीय वर्ष में 1100 लाख से अधिक मानव दिवस सृजन का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 4 वर्षों में मनरेगा की 23.73 लाख योजनाओं को पूरा किया जा चुका है और 6.85 लाख योजनाओं पर कार्य जारी है.

सामाजिक सुरक्षा की राशि बढ़ाई गई

चंद्रशेखर ने बताया कि मनरेगा में सामाजिक सुरक्षा की राशि बढ़ाई गई है. दो वर्ष के लिए 05 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा का लाभ और दुर्घटना से मृत्यु पर आश्रितों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की योजना पर कार्रवाई की जा रही है. दुर्घटना में मारे जाने पर या अप्राकृतिक मृत्यु होने पर नि:शक्त होने पर पहले राशि 75 हजार रुपये दिये जाते थे, जिसे बढ़ाकर 02 लाख रुपया कर दिया गया है. वहीं डोभा, कुआं में डूबने डूबने से मारे जाने वाले मृतों के आश्रितों को दिये जाने वाले अनुग्रह अनुदान की राशि 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है.

15 नवंबर 2024 तक 1 लाख कूपों का निर्माण करने का लक्ष्य

मनरेगा योजना के तहत बिरसा सिंचाई कूप संवर्द्धन मिशन के माध्यम से 15 नवंबर 2024 तक राज्य भर में कुल 01 लाख कूपों का निर्माण करने का लक्ष्य है. इसके तहत वित्तीय वर्ष 2023-24 में 50 हजार एवं वित्तीय वर्ष 2024-25 (15 नवम्बर, 2024 तक) में 50 हजार कूप का निर्माण कार्य पूर्ण किया जाना है. इसे भी पढ़ें- शाम">https://lagatar.in/evening-news-diary-19-jan-2024-jharkhand-news-updates/">शाम

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