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पारसनाथ पहाड़ सरकार आदिवासियों को सौंपे नहीं तो जैन मंदिर करेंगे धवस्त- सालखन मुर्मू

Ranchi : पारसनाथ पहाड़ और मरांग बुरु का मुद्दा झारखंड के लिए हॉट केक बना हुआ है. पारसनाथ पहाड़ पर आए दिन सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू भड़काऊ बयान दे रहे हैं. गुरुवार को एक बार फिर सालखन ने मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से बयान जारी किया है. मीडिया को संबोधित करते हुए सालखन मुर्मू ने कहा कि पारसनाथ पहाड़ी आदिवासियों के लिए जी का जंजाल बना हुआ है. 5 जनवरी 2023 को झारखंड की हेमंत सरकार ने पारसनाथ पहाड़ को जैन समाज को सौंप दिया है. मरांग बुरु आदिवासियों का ईश्वर है और सरकार ने इसे बेचने का काम किया है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासियों का सरना धर्म को बेच दिया. सरकार ने आदिवासियों की आस्था और विश्वास के साथ कुठाराघात किया है. कहा कि वे भारत समेत विदेशों में भी मरांग बुरू बचाने के लिए आंदोलन करेंगे. सालखन बोले कि 2023 में सरना धर्म कोड लेकर रहेंगे. इसके लिए आदिवासियों का आंदोलन जारी है. इसे भी पढ़ें - राज्यसभा">https://lagatar.in/pms-speech-on-motion-of-thanks-in-rajya-sabha-said-the-more-mud-the-opposition-throws-the-more-the-lotus-will-bloom/">राज्यसभा

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11 फरवरी को करेंगे चक्का जाम - सालखन

इससे आगे सालखन के कहा कि 11फरवरी 2023 को झारखंड, ओडिशा, बंगाल, असम और बिहार में एक दिन के लिए रेल रोड चक्का जाम करेंगे. जिससे पूर्वी भारत पैरालाइज्ड हो जाएगा. फिर भी भारत सरकार यदि राज्य सरकार के अल्पसंख्यक आयोग मरांग बुरू को वापस करने के लिए सकारात्मक पहल नहीं करती हैं तो 11अप्रैल 2023 से अनिश्चितकालीन रेल रोड चक्का जाम किया जाएगा. पारसनाथ पहाड़ आदिवासियों के हवाले करना होगा. यदि ऐसा नहीं हुआ तो मजबूर होकर आदिवासी उग्र आंदोलन करेंगे. बाबरी मस्जिद का हवाला देते हुए सालखन के कहा कि पारसनाथ पहाड़ पर स्थित जैन मंदिर को ध्वस्त किया जाएगा. और इसके जिम्मेवार भारत सरकार, राज्य सरकार और अल्पसंख्यक आयोग होगा. सालखन मुर्मू ने अपनी मांग रखते हुए चेताया कि मरांग बुरु ईश्वर का मामला है. आदिवासियों की आस्था और विश्वास से जुड़ा मामला है. अपने संबोधन में संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि हिन्दू, मुस्लिम,सिख और जैन धर्म को धार्मिक मान्यता मिली है. लेकिन अबतक आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की मान्यता क्यों नहीं मिली. 2011 जनगणना के अनुसार, सरना धर्म कोड लिखने वाले आदिवासियों की संख्या 50 लाख थी. जैन वालों की धर्म कोड लिखने वाले की संख्या 44 लाख थी. इसके बावजूद इसे कोड की मान्यता मिली. मौके पर आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष सुशील उरांव, रांची जिला अध्यक्ष बैजनाथ उरांव, सुमित्रा मुर्मू, रांची महासचिव गुड्डू लोहरा, रांची जोन अध्यक्ष चमरु उरांव मौजूद थे. इसे भी पढ़ें - 27">https://lagatar.in/budget-session-jharkhand-assembly-from-february-27-march-24-there-will-be-17-working-days-house-will-run-on-saturdays-as-well/">27

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