Search

 
 
 

झारखंड कोर्ट फीस अमेंडमेंट एक्ट-2022 को अविलंब वापस ले सरकार : भरत चंद्र महतो

 
Ranchi : पूर्व न्यायाधीश सह सेवानिवृत प्रधान सचिव झारखंड पंकज श्रीवास्तव ने ने रविवार को कहा कि राज्य सरकार ने बिना किसी चर्चा के कोर्ट फीस में कई गुना वृद्धि कर दी है. ऐसे ही आम जनता न्याय से कोसों दूर हो जायेगी. ऐसी नीतियों के कारण स्थिति और भयावह हो जायेगी. हमारा प्रयास होना चाहिए कि आम जनता को सुलभता से न्याय मिले, लेकिन सरकार की मंशा इसके बिल्कुल उलट है. एक ओर बिहार, गुजरात, जम्मू कश्मीर, पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में कोर्ट फीस 50 हजार से 75 हजार रुपए के बीच आती है, वहीं झारखंड में इस अधिसूचना के बाद यह 3 लाख तक हो गयी है. वे रांची स्थित आजसू के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बोल रहे थे.

अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट अविलंब लागू करे सरकार

अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के प्रधान महासचिव भरत चंद्र महतो ने कहा कि अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ सरकार से यह मांग करती है कि जनहित को देखते हुए सरकार झारखंड कोर्ट फीस अमेंडमेंट एक्ट-2022 को अविलंब वापस ले. अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट अविलंब लागू करे तथा 25 सीआरपीसी के तहत सभी जिला न्यायालय में लोक अभियोजक एवं सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति करे.

राज्य के भविष्य के लिए खतरनाक संदेश- राधेश्याम गोस्वामी

प्रेस वार्ता में अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने कहा कि झारखंडी जनता को मूल विषयों से भटका कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने वाली वर्तमान सरकार राज्य के अधिवक्ताओं को बांटने और उन्हें ठगने में जुटी है. यह उनकी संकुचित मानसिकता को दर्शाता है. सरकार जनहित की भावनाओं को आहत पहुंचाने वाले निर्णय ले रही. यह राज्य के भविष्य के लिए खतरनाक संदेश है. मौके पर अखिल झारखंड अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष दिनेश चौधरी, सचिव अंजित कुमार सहित अन्य मौजूद थे.
इसे भी पढ़ें – जेबीवीएनएल">https://lagatar.in/jbvnl-set-up-control-room-at-headquarter-level/">जेबीवीएनएल

ने मुख्यालय स्तर पर की कंट्रोल रूम की स्थापना
[wpse_comments_template]
Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही