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नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की लड़ाई अधिकार की, परियोजना रद्द करने की अधिसूचना जारी करे सरकार : सुखदेव भगत

Ranchi :  पूर्व विधायक सुखदेव भागत ने प्रेस वर्ता कर सरकार से नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज रद्द करने की मांग की है. ज्ञात हो कि 1 जुलाई 2017 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भाजपा अनुसूचित मोर्चा की बैठक में फायरिंग रेंज रद्द करने का घोषणा की थी, लेकिन इसके लिए अधिसूचना जारी नहीं की गयी थी. 29 साल से इसके विरोध में स्थानीय जन समूह आंदोलन कर रहा है, लेकिन सरकार इसे रद्द करने की अब तक अधिसूचना जारी नहीं की है. परियोजना की अवधि मई 2022 में समाप्त हो रही है. सरकार से हमारी मांग है कि नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज का अवधि विस्तार न हो. वहीं इलाके में अवैध खनन कार्यों पर सरकार रोक लगाये.

इलाके के आदिवासियों पर 29 साल से विस्थापन की लटक रही तलवार

उन्होंने कहा की पांचवीं अनुसूची वाले इस इलाके के आदिवासियों के समक्ष विस्थापन की तलवार लटक रही है. ग्रामीण सत्याग्रह के माध्यम से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के अंतर्गत 245 गांव में 1471 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अधिसूचित किया गया है, जिससे 245 गांवों के लाखों लोग अपनी अस्मिता, परम्परा, संस्कृति और जीने के मौलिक अधिकार के लिए लड़ रहे हैं. संविधान के अनुच्छेद 21 जो किसी व्यक्ति व जीवन जीने और उसकी निजी स्वतंत्रता और गरिमा को सुनिश्चित करता है, उस प्रावधान का उल्लंघन होगा.

आंदोलन आदिवासियों के हक और अधिकार का है

  सुखदेव भगत ने कहा कि कुछ लोग यह कहते हैं कि यहां के लोग सेना का विरोध कर रहे हैं. परंतु सच्चाई यह है कि हमारा विरोध सेना से नहीं, बल्कि सरकार द्वारा थोपे गये निर्णय से है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अल्बर्ट एक्का ऐसे वीर सैनिक थे, जिन्हें परमवीर चक्र जैसा सम्मान मिला. उन्होंने कहा कि एक तरफ वनाधिकार जैसे कानून बनाए जा रहे हैं, जिससे आदिवासियों को जंगल की जमीन पर भी अधिकार मिल सके. वहीं दूसरी ओर फील्ड फायरिंग रेंज जैसी अधिसूचना लाकर सरकार आदिवासियों को विस्थापित करने पर तुली है. सरकार के इस निर्णय का अंतिम दम तक विरोध किया जाएगा.

इलाके में अवैध बॉक्साइट का किया जा रहा है खनन, सरकार करे कार्रवाई

सुखदेव भगत ने कहा कि इलाके में हो रहे अवैध खनन पर सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए. आदिवासियों को वन अधिकार कानून में अधिकार दिये गये हैं. वहीं सरकार की नीतियों के कारण आदिवासी के समक्ष वन क्षेत्र से बेदखली का संकट आ खड़ा हुआ है. प्रेस वर्ता में अनिल पन्ना, शशि पन्ना मौजूद थे. इसे भी पढ़ें – बड़ी">https://lagatar.in/big-news-encounter-in-latehar-three-terrorists-of-tpc-killed/">बड़ी

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