सीए,सीएस और कॉस्ट एकाउंटेंट की मुश्किलें बढ़ीं Ranchi: वित्त मंत्रालय के नए नोटिफिकेशन से ज्यादातर वित्तीय सलाहकार (सीए,सीएस, कॉस्ट एकउंटेंट) नाराज हैं. इसे वे अपने अधिकार का हनन और कार्य क्षेत्र में दखल मान रहे हैं. उनका कहना है कि ऐसी स्थिति रही तो हमलोग काम कैसे कर पाएंगे.सीए अपने क्लाइंट के लेनदेन संबंधी हर गतिविधि की निगरानी कैसे रख सकता है. फिर ऐसे में तो कोई भी अपनी गलती के लिए सीए,सीएस को आसानी से फंसा सकता है. इसलिए सरकार को इस नियम पर पुनर्विचार करना चाहिए. दूसरी ओर कुछ लोगों ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि इससे सरकार को भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. वे यह भी कहते हैं कि अगर पांच-पांच साल के अंतराल पर अधिकारियों, ठेकेदारों के वित्तीय लेनदेने के कागजात की ऑडिट कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तो इससे भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रखा जा सकेगा. शुभम संदेश की टीम ने विभिन्न जिलों के वित्तीय सलाहकारों से बात की है. पेश है रिपोर्ट.
अब प्रोफेशनल्स को करने होंगे ये काम
नए नियम के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए),कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) जैसे प्रोफेशनल्स को अपने क्लाइंट की किसी डील से जुड़ने से पहले उसकी वित्तीय स्थिति और ओनरशिप पैटर्न का पता करना होगा. जिसमें फंडिंग सोर्स से लेकर डील की मंशा आदि की डिटेल पता करनी होगी. इसके अलावा क्लाइंट के लिए किए गए सभी डील का रिकॉर्ड रखना होगा. साथ ही इसकी रिपोर्टिंग फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के डायरेक्टर को भी करनी होगी. जाहिर है अब चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए),कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) जैसे प्रोफेशनल्स की जवाबदेही बढ़ जाएगी. प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट से भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम : संजीत अग्रवाल
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नए आदेश के तहत अब चार्टर्ड एकाउंटेंट, कंपनी सचिव, कॉस्ट अकाउंटेंट जैसे प्रोफेशनल को भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के दायरे में लाया गया है. जारी आदेश के तहत उपरोक्त प्रोफेशनल के पांच तरह की वित्तीय लेनदेन पर सरकार की नजर रहेगी. वित्त मंत्रालय के आदेश का स्वागत करते हुए चार्टड अकाउंटेंट संजीत अग्रवाल ने इसे अच्छी पहल करार दिया है. बताया कि इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. जब देश में नन बैंकिंग कंपनी के नाम पर लूट मची हुई थी उस वक्त भी मैंने बैंक खातों की जांच करने वाले ऑडिटर्स पर उनकी संलिप्तता को लेकर आशंका जाहिर कर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की थी. यह कैसे संभव हो सकता है कि बैंकों या वित्तीय कंपनियों में अवैध रुपए जमा करने वाले निवेशकों के बारे में उनके वित्तीय सलाहकारों को जानकारी न हो. वित्तीय सलाहकारों को निवेशकों के धनोपार्जन की पूरी जानकारी होती है. उन्होंने बताया कि प्रत्येक पांच साल पर अधिकारियों और ठेकेदारों के वित्तीय लेनदेन के कागजातों का ऑडिट कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक किया जाना चाहिए. नेता, अधिकारी और ठेकेदार की नकेल कसे जाने पर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगेगा. अब सीए और सीएस को अपने काम में पारदर्शिता लानी होगी : गणेश केसरी
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नए आदेश के तहत अब चार्टर्ड एकाउंटेंट, कंपनी सचिव, कॉस्ट अकाउंटेंट जैसे प्रोफेशनल को भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के दायरे में लाने की अच्छी पहल की गयी है. सीए गणेश केसरी ने बताया कि वित्त मंत्रालय के इस आदेश का सीधा अर्थ है कि सीए और सीएस को अपने कामों में पारदर्शिता लानी होगी. पारदर्शिता नहीं लाने पर जांच के दायरे में आएंगे और दोषी पाए जाने पर कानूनी शिकंजा भी कसेगा. ऐसे में सीए-सीएस अपने किसी भी क्लाइंट को गलत नहीं करने देंगे. सीए को अब अपने काम में ईमानदारी दिखानी होगी : पंकज सुल्तानिया
सीए पंकज सुल्तानिया का कहना है कि वित्त मंत्रालय के इस आदेश से सीए और सीएस के गलत काम करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी. सीए और सीएस को अपने काम में पारदर्शिता लानी होगी. किसी कंपनी का लेखा-जोखा रखने वाले सीए और सीएस को अपने काम में ईमानदारी दिखानी होगी, तभी इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लग पाएगा. केंद्स सरकार ने इसी मंशा मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट का दायरा बढ़ाया है. इसे सरकार की दूरदर्शिता कहा जा सकता है. सही तरीके से काम करने वालों को कोई परेशानी नहीं : सतीश कुमार
सीएस सतीश कुमार ने कहा कि इस एक्ट के आने से प्रोफेशनल्स को कोई प्रोबलम नहीं होगा. जो गलत तरीके से पैसा इधर-उधर करते हैं या किसी प्रॉपर्टी को इधर-उधर करते हैं, उसके लिए यह कानून उसे रोक रहा है, लेकिन जो सही तरीके से अपने काम कर रहे हैं. उसके लिए कोई परेशानी नहीं है. भारत में किसी दूसरे मामले में भी जो गलत करते हैं तो सजा उसे ही मिलती है न कि सही करने वाले को. मुख्य रूप से कहीं का पैसा कहीं दिखाई जा रहा है, तो गलत होगा ही, लेकिन सही तरीके से डील की जा रही है तो वह गलत नहीं होगा. जो प्रॉपर्टी मैनेज करते हैं उनके लिए दिक्कत की बात है, लेकिन ऐसा कोई भी मेरी नजर में नहीं है. जो प्रॉपर्टी को मैनेज करते हो. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि मेरा क्लाइंट जमीन लेना चाहता है और उसके पास पैसे नहीं हैं तो मैं कर्ज के तौर पर इंटरेस्ट के साथ या इंटरेस्ट के बिना उसे कुछ पैसे देता हूं और वह मुझे बाद में लौटा देता है तो गलत नहीं है. वही मैं अपने पैसे से जमीन खरीद दूं और सारे कागजात उसके नाम में बना दूं तो यह गलत होगा. अगर कोई प्रॉपर्टी मैनेज करते हैं तो वह नैतिकता के खिलाफ होगी और किसी को भी ऐसा नहीं करना चाहिए. सीए और सीए की पढ़ाई के दौरान हमें जो कानून पढ़ाया जाता है उस कानून में इन सब चीजों का काफी ध्यान दिया गया है. हमें सिखाया भी जाता है कि केवल डिग्री ले लेना ही नहीं होता है, इनका पालन करना भी हमारे प्रोफेशन में है. वित्त मंत्रालय के नए नोटिफिकेशन से मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट का दायरा बढ़ा दिया गया है. इससे चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) ,कंपनी सेक्रेटरी(सीएस), कॉस्ट एकाउंटेंट जैसे प्रोफेशनल्स की मुश्किल बढ़ गई है. अब अगर ये प्रोफेशनल्स किसी किसी क्लाइंट के लिए चुनिंदा वित्तीय सौदे करते हैं, तो वे प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट कानून के दायरे में आएंगे. यानी अब उन्हें प्रोफेशनल होने का फायदा नहीं मिलेगा. जरुरी बात यह है कि अगर ये प्रोफेशनल कंपनी, लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी )खोलते हैं, तो भी वह पीएमएलए के दायरे में आएंगे. वित्त मंत्रालय के जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक अगर चार्टर्ड अकाउंटेंट ,कंपनी सेक्रेटरी जैसे प्रोफेशनल्स अपने क्लाइंट के लिए अचल संपत्तियों की खरीद-बिक्री, क्लाइंट के धन, संपत्ति और सिक्योरिटीज की देख-रेख करेंगे, तो उन पर भी मनी लॉन्ड्रिंग का कानून लागू होगा. इसके अलावा बैंक और सिक्योरिटीज अकाउंट का ऑपरेशन, कंपनियों के कामकाज के लिए पैसे जुटाने जैसे काम भी पीएमएलए के दायरे में आएंगे. हालांकि इस दायरे में वकील नहीं आएंगे. इस नए नोटिफिकेशन से साफ जाहिर होता है कि वित्त मंत्रालय इस कदम के जरिए क्लाइंट और चार्टर्ड अकाउंटेंट ,कंपनी सेक्रेटरी जैसे प्रोफेशनल्स की सांठ-गांठ को तोड़ना चाहता है. गलत न हो इसलिए सरकार यह कानून लेकर आई है, यह संदेश है : प्रदीप जैन
पी एमपीके वेल्थ के प्रदीप जैन कहते हैं कि अक्सर अखबारों में ऐसे खबरें पढ़ने को मिलते हैं कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेट्री ज्यादा पैसा कमाने के लिए काला धन और भ्रष्टाचार द्वारा कमाये गए धन को मैनेज करते हैं और उसे सफेद धन में परिवर्तित करते हैं. ऐसा न हो इसलिए सरकार पीएमएलए एक्ट के अंतर्गत सिर्फ विशेष परिस्थितियों में चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी के यहां भी रेड डालने का कानून लेकर आई है. इस कानून के माध्यम से सरकार यह संदेश देना चाहती है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेट्री अपने क्लाइंट को कानून सम्मत खाता बही और टैक्स से संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करने में मदद करें और उन्हें गैरकानूनी तरीके से सफेद धन बनाने में मदद करने से बचें. ऐसा करना देश के हित में है और इससे जहां व्यापारियों का कामकाज ज्यादा से ज्यादा कानून समर्थ होगा. वहीं भ्रष्टाचार में लिप्त राजनेता और अधिकारी का काला धन भी उन्हें कोई काम नहीं आएगा.इसलिए सरकार की इस पहल का समर्थन किया जाना चाहिए.इससे देश में वित्तीय भ्रष्टाचार पर अंकुश लगने में मदद मिलेगी. सरकार के नए कदम से थोड़ा भय का माहौल जरुर बना है : महेंद्र कुमार जैन
सी ए महेन्द्र कुमार जैन का कहना है कि सरकार के इस निर्णय से चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं अन्य प्रोफेशनल्स में थोड़ा भय का माहौल जरुर है. किसी भी क्लाइंट के कर वंचना के कार्य में चार्टर्ड अकाउंटेंट का कोई योगदान नहीं रहता है और उसे उतनी ही जानकारी होती है, जितनी कि खातों में दिखाई जाती है. सीए अपने ग्राहकों को विभिन्न कानूनों के बारे में सही राय देते हैं और उनके सही अनुपालन में मार्गदर्शन देते हैं. इन नियमों का पालन करना या न करना करदाता के ऊपर निर्भर करता है. अब सरकार को चाहिए कि वे हर करदाता के लिए एक सीए नियुक्त करे , न कि करदाता अपना सीए स्वयं नियुक्त करे. मालूम हो कि सरकार के नए नोटिफिकेशन के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए),कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) जैसे वित्तीय सलाहकारों को अपने ग्राहक की किसी डील से जुड़ने से पहले उसकी वित्तीय स्थिति और ओनरशिप पैटर्न का पता करना होगा. जिसमें फंडिंग सोर्स से लेकर डील की मंशा की विस्तृत जानकारी हासिल करनी होगी. कुछ गलत लोगों के कारण पूरे प्रोफेशन को कठघरे में लाना उचित नहीं : नवीन शर्मा
सी ए नवीन शर्मा का कहना है कि वित्त मंत्रालय के नए आदेश के अंतर्गत वैसे सीए,सीएस,सीएमए जो अपने क्लाइंट के एवज में वित्तीय लेनदेन करते हैं,उनकी धनशोधक वित्तीय लेनदेन पीएमएलए की परिधि में लाया गया है. हालांकि सरकार की सोच दूरदर्शी है, क्योंकि पिछले दिनों यह सुनने में आया था कि क्षद्म शेल कंपनियों के माध्यम से काले धन को सफेद किया जा रहा है. एमसीए मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर के आंकड़ों के अनुसार ऐसी बोगस कंपनियों की संख्या लाखों में हैं, जिनके विस्तार में जाने से पता चलता है कि कंपनी का कोई बिजनेस नहीं है,केवल काले धन को सफेद करने के लिए कंपनी खोली गई है. परंतु केवल कुछ गलत लोगों के कारण पूरे प्रोफेशन को कटघरे में लाना उचित नहीं है. सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस आदेश का अनुपालन कैसे होगा.व्यवहारिक कठिनाइयों के कारण कई बार क्लाइंट का टैक्स, जीएसटी, टीडीएस का भुगतान सीए कर देते हैं. क्या इससे भी सीए इस कानून की परिधि में कार्रवाई के योग्य हो जायेंगे. किसी सीए ने किसी क्लाइंट के लिए कंपनी निर्मित कर दी तथा वह उस कंपनी का स्टेचुअरी ऑडिटर नहीं है, फिर भी वह पीएमएलए के अंतर्गत आएगा.क्लाइंट या कंपनी कुछ भी गलत करती है तो सीए भी जिम्मेवार होगा. इन सभी बिंदुओं पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि सरकार में प्रोफेशनल का विश्वास बढे. दूसरा केवल सीए/सीएस/सीएमए को ही इसके अंतर्गत रखा गया है,अधिवक्ता बाहर हैं. भविष्य में ये सारे काम धीरे धीरे अधिवक्ता के पास हस्तांतरित हो जायेंगे. अब जिसका नकारात्मक प्रभाव सीधे सीधे तीनों प्रोफेशनल की प्रैक्टिस पर पड़ेगा. पीएमएलए अधिनियम कठोर और अनुपालन कठिन : राहुल सुरेका
आ ईसीएआई धनबाद शाखा के उपाध्यक्ष सीए राहुल सुरेका का कहना है कि कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के कारण सीए, सीएस और सी डब्लूए जैसी सेवाएं पीएमएलए के अंतर्गत आ गई हैं. पीएमएलए अधिनियम बहुत कठोर है और अनुपालन बहुत कठिन है. इसमें सजा बहुत कम है, लेकिन पूरी प्रक्रिया से गुजरना बेहद मुश्किल है. यह वास्तव में छोटे और मध्यम पेशेवरों पर कठिनाई है क्योंकि कंपनी के निगमन के समय, हम कैसे अनुमान लगा सकते हैं कि ग्राहक मनी लॉन्ड्रिंग नहीं करेगा.अब सीए को बहुत सावधान और चौकस रहने की जरूरत है और खुद को किसी भी तरह के झंझट में पड़ने से बचाने के लिए अपने ग्राहक को जानने की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए. बाकी देखते हैं कि आखिर सरकार क्या लागू करती है और उसका पालन करने के लिए क्या तरीका अपनाती है. ग्रहकों के किए गए सभी सौदों का रिकॉर्ड बना कर रखना चाहिए: रोहित प्रसाद
चा र्टड एकाउंटेंट रोहित प्रसाद कहते हैं कि यह आधिकारिक तौर पर आईसीएआई और आईसीएसआई कार्टेल का खेल खत्म हो गया है. अधिसूचित किए गए परिवर्तनों के अनुसार, उन्हें अपने ग्राहकों द्वारा किए गए सभी सौदों का रिकॉर्ड बनाए रखना चाहिए और अवैध स्रोतों से धन का लेन-देन करते पाए जाने पर उन्हें दंडित किया जाएगा. वे ग्राहकों के साथ व्यवहार करने से पहले उनकी सही वित्तीय स्थिति और स्वामित्व के विवरण का पता लगाने के लिए उत्तरदायी होंगे. इस कदम से सरकार ने वित्तीय भ्रष्टाचार को रोकने का प्रयास किया है. हालांकि इस नोटिफिकेशन के बाद वित्तीय सहालकारों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है. पर इतना जरुर है कि सभी को पूरी सावधानी के साथ काम करने की जरुरत है. प्रोफेशनल्स के कार्यक्षेत्र में दखलंदाजी ठीक नहीं : अमित
चार्टर्ड अकाउंटेंट अमित कुमार अग्रवाल का कहना है कि सरकार द्वारा लगाया विधेयक पीएमएलए कहीं न कहीं प्रोफेशनल के कार्यक्षेत्र में दखलंदाजी के साथ उनके अधिकारों के हनन के लिए लाया गया है.जो कहीं से भी उचित नहीं है.सरकार पहले सिस्टम को दुरुस्त करे.अभी तक जीएसटी को सुधारा नहीं जा सका है.यह कानून प्रोफेशनल पर अनावश्यक रूप से दबाव बनाने के लिए लाया गया है.यदि यही स्थिति रही तो सीए लोग काम करना बंद कर देंगे.तब सरकार किस से ऑडिट कराएगी.यह विधेयक सीधे तौर पर सीए को दोषी मानता है जबकि सीए का काम लोगों को सहयोग करना, उन्हें सलाह देना और क्लाइंट द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच करना है.इसलिए इस विधेयक पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए. पहले सरकार को चर्चा करनी चाहिए थी : दिलीप
सीए दिलीप गोलछा का कहना है कि सरकार को विधेयक लाने से पहले एक कमिटी बनानी चाहिए थी. जिसमें प्रोफेशनल को शामिल कर उनसे चर्चा करनी चाहिए थी कि विधेयक लाने का उद्देश्य क्या है. सामूहिक चर्चा के बाद सरकार को विधेयक लाना चाहिए था.इस विधेयक में हर बात के लिए सीए को दोषी बनाने का प्रावधान है. क्या सरकार के अधिकारी पूरा काम सही से करते हैं.एक दो लोगों के लिए पूरे सीए को कटघरे में खड़ा करना सही नहीं है.इस विधेयक का सरकार और उनके अधिकारी गलत इस्तेमाल करेंगे और सीए सॉफ्ट टारगेट होंगे.जो कहीं से भी उचित नहीं है.वर्तमान में सरकार द्वारा डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके कारण रोज लोग फ्राड के शिकार हो रहे हैं.सरकार को पहले सिस्टम में सुधार करना चाहिए. विधेयक में सुधार की आवश्यकता है : रमाकांत
सीए रमाकांत गुप्ता का कहना है कि सरकार द्वारा पीएमएलए विधायक में सुधार की जरूरत है.इस विधेयक में हर बात के लिए सीए को जिम्मेवार ठहराने और जेल भेजने तक का प्रावधान है, जो कहीं से भी उचित नहीं है.अब सीए लोगो के प्रत्येक ट्रांजेक्शन की निगरानी कैसे कर सकता है.यदि कोई चाहे तो अपनी गलती से सीए को आसानी से फंसा सकता है.ऐसे में फिर कोई सीए काम करना बंद कर देगा.सरकार का यह निर्णय जल्दबाजी में लिया गया लगता है.इससे सरकार को ही नुकसान होगा.एक तरफ सरकार आईटी स्लैब में बढ़ोतरी कर रही है और वहीं दूसरी तरफ कम लोगों द्वारा इनकम टैक्स जमा करने की बात भी कहती है.इन सबके लिए सीए को कैसे दोषी ठहराया जा सकता है. भयादोहन के लिए लाया गया है पीएमएलए बिल : जगदीश
चार्टर्ड अकाउंटेंट जगदीश खंडेलवाल का कहना है कि सरकार द्वारा लाया गया पीएमएलए विधेयक सीए प्रोफेशनल पर शिकंजा कसने के साथ उनको डराने के उद्देश्य से लाया गया है.कानून लोगों की सहूलियत के लिए होने चाहिए ताकि लोग उसका पूरा पूरा पालन कर सके. सरकार के हर विभाग में भ्रष्टाचार है.लगातार बड़े बड़े अधिकारियों के मामले सामने आ रहे है.लेकिन सरकार सिस्टम को सुधारने के बजाय नए नए कानून का रही है और यह कानून भ्रष्टाचार का मुख्य होते है.आज जीएसटी में देखा जा सकता है .क्या सभी सीए को एक नजरिए से देखा जाना चाहिए अगर सरकार की यही मंशा है तो हम इसका विरोध करते है.विधेयक पर सरकार को एक बार फिर से विचार करना चाहिए. कुछ सीनियर सीए प्रोफेशनल से चर्चा करनी चाहिए. पीएमएलए के दायरे में सीए या सीएस को लाना गलत
अब चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए), कंपनी सचिव (सीएस) और कॉस्ट अकाउंटेंट को भी धनशोधन निवारक अधिनियम (पीएमएलए) के दायरे में शामिल किया गया है. वित्त मंत्रालय के अनुसार, पांच तरह के वित्तीय लेनदेन में उनकी भूमिका पर नजर रहेगी. ग्राहकों के बैंक खातों का प्रबंधन, अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री, ग्राहक के पैसों, अन्य संपत्तियों का प्रबंधन, बचत या प्रतिभूति खातों के प्रबंधन सीए को करना होगा. ग्राहकों का पूरा रिकार्ड भी रखना होगा. इस पर हजारीबाग के चार्टर्ड एकाउंटेंट का कहना है कि पीएमएलए के दायरे में सीए या सीएस को लाना गलत है. इससे सीए की स्वतंत्रता बाधित होगी : धीरज जैन
सीए धीरज जैन का कहना है कि प्रिवेंसियन ऑफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट चार्टर्ड एकाउंटेंट की स्वतंत्रता बाधित होगी. सीए का काम कंपनी तैयार कराना है. अब कंपनी संचालक आगे क्या करेगा, उसके लिए जिम्मेवार सीए को ठहराया जाएगा. ऐसे में पीएमएलए के दायरे में सीए को लाना बिल्कुल गलत है. सीए का काम ऑडिट और सर्टिफाइड से जुड़ा है. कंपनी के कार्यों से उसे कोई लेना-देना नहीं है. फिर कंपनी की गलतियों का खामियाजा सीए क्यों भुगते. इस कानून में संशोधन की जरूरत है. इस कानून से सीए निराश हैं. इसलिए मेरा यह मानना है कि सरकार हमें स्वतंत्र तरीके से काम करने को दें. जो हम सभी के लिए अच्छा होगा. क्योंकि क्लाइंट की गलतियों की सजा हमें नहीं दी जानी चाहिए. अब सीए की पढ़ाई करने से कतराएंगे लोग : सुरेश अग्रवाल
सीए सुरेश अग्रवाल कहते हैं कि प्रिवेंसियन ऑफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट आने से अब सीए की पढ़ाई करने से लोग कतराएंगे. कोई सीए कंपनी के कारनामे का भुक्तभोगी नहीं बनना चाहेगा. सीए को इस एक्ट के अधीन लाने की कोई जरूरत ही नहीं थी. यह सही नहीं है. इससे सीए स्वतंत्र होकर अपना काम नहीं कर पाएंगे. हर वक्त संशय बना रहेगा कि कहीं कंपनी ने कुछ गलत किया, तो उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा. इसलिए सरकार को इस दिशा में फिर से सोचना चाहिए. हमारा काम जिम्मेदारी से भरा होता है. इसलिए दूसरे की गलतियों का खामियाजा हमलोग क्यों भुगते. यह ठीक है कि सरकार की कोशिश वित्तीय भ्रष्टाचार रोकने की है, पर इस एक्ट के अधीन हमें लाने की कोई जरुरत नहीं थी. कंपनी बनाना भी मुश्किल हो जाएगा : अरविंद अग्रवाल
सीए अरविंद अग्रवाल कहते हैं कि अब तो कंपनी बनाना भी मुश्किल होगा. सीए के मन में कंपनी के प्रति संशय की स्थिति रहेगी और बेकार में तनाव बढ़ेगा. कंपनी बनाने के बाद सीए की जिम्मेवारी खत्म हो जाती है. आगे कंपनी के कार्यों का जिम्मेवार सीए नहीं हो सकता. लेकिन प्रिवेंसियन ऑफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट के अनुसार कंपनी के हर कार्यों का जिम्मेवार सीए होगा. इस तरह मानसिक बोझ लेकर सीए अपनी जिंदगी को तनाव में क्यों रखना चाहेगा. इसलिए सीए अब कंपनी बनाना ही बंद कर देंगे.साथ ही इस नियम के आने से बहुत सारी बाधाएं उत्पन्न हो जाएंगी. वित्तीय सलाहकार कंपनी की किसी गलती के लिए जिम्मेदार नहीं हो सकता है. इसलिए सरकार को चाहिए कि हमें इस दायरे बाहर रखे. अगली पीढ़ी को सीए नहीं बनाएंगे : अविनाश जैन
सीए अविनाश जैन कहते हैं कि वह अपनी अगली पीढ़ी को चार्टर्ड एकांउंटेंट नहीं बनाएंगे. प्रिवेंसियन ऑफ मनी लाउंड्रिंग एक्ट आने के बाद सीए बनने का क्रेज घट जाएगा. कोई खुद से मुसीबत मोल लेना पसंद नहीं करेगा. कौन जानता है कि कंपनी में आगे क्या होगा और उसका जिम्मेवार उसे बनानेवाला सीए होगा. निश्चित रूप से इस एक्ट से ग्राहक भी प्रभावित होंगे. पीएमएलए के दायरे से सीए को मुक्त रखना चाहिए. इस कानून से सीए का हित नहीं होगा. अब तो लोग सीए बनसे से भी कतराएंगे. जब लोग स्वतंत्र रुप से काम नहीं पाएंगे तो इस पेश के प्रति आनेवाली पीढ़ी का आकर्षण भी कम हो जाएगा. इसलिए सरकार को इस दिशा में फिर से सोचने की जरुरत है. ताकि इस पेशे की गरिमा बनी रहे. विरोध नहीं होना चाहिए पहल सही है : डॉ. मुरारी
डॉ. मुरारी लाल बैध ( वितीय सलाहकार ) का कहना है कि इसका विरोध नहीं होना चाहिए, सरकार की पहल सही है. धनशोधन निवारक अधिनियम को संशोधन कर सरकार ने काले धन पर अंकुश लगाने काम किया है. इस अधिनियम के तहत अब मनी लॉन्ड्रिंग को विशेष अपराध की परिभाषा में शामिल किया गया. अब इस विधेयक के आने से भ्रष्टाचार में कमी आयेगी. सरकार इस अधिनियम का कड़ाई से पालन कराने जा रही है. जिससे सभी काले धन वाले लोग काफी चिंतित हैं. सरकार अपराध द्वारा एकत्रित किये गये धन के बारे में काफी चिंतित है और इस अधिनियम के तहत ऐसे सभी धन को सरकारी खजाने में डालने का भी प्रवधान है. यह योजना जल्द सफल होती है तो आने वाले दिनों में काले धन पर लगाम लगाया जा सकता है.
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