अखड़ा ही पार्लियामेंट, विधानसभा और लोकसभा
मधु मंसूरी ने कहा कि मैं मुस्लिम जाति से हूं. लेकिन मेरा खून उरांव से है. 2 अगस्त 1956 से लेकर अभी तक 9621 गीत गाये हैं. लगभग 300 गीत लिखे हैं. उन्होंने कहा कि अखड़ा ही गांव का मुख्य केंद्र है.अखड़ा ही पार्लियामेंट, विधानसभा और लोकसभा है. यही वह जगह हैं, जहां पूर्वजों ने गांव के विकास की लकीरें खीची थी. मुहल्ले के लोगों की दुख-सुख, लड़ाई झगड़ा, पूजा पाठ, कामकाज की मिलजुल कर बातें किया करते थे. उसका समाधान निकालते थे. मधु मंसूरी ने कहा कि पारंपरिक वाद्ययंत्र संघर्ष के गीतों से जुड़े हैं.बिना वाद्ययंत्र के संस्कृति अधूरी- डॉ हरि उरांव
जनजातीय विभाग के को-ऑर्डिनेटर डॉ हरि उरांव ने कहा कि भाषा ही संस्कृति का वाहक है. बिना वाद्ययंत्र के संस्कृति अधूरी है. राज्य के किसी भी गीत, नाचगान, वाद्ययंत्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान नहीं मिली है. इसे पहचान दिलाने के लिए जनजातीय विभाग में महीने में दो दिन वाद्ययंत्र बजाने और सिखाने की जरूरत है. आधुनिकता के दौर में युवा पीढ़ी पांरपरिक वाद्ययंत्र से विमुख हो रही है. इसकी जगह डीजे साउंड का उपयोग किया जा रहा है.वाद्ययंत्रों के महत्व को समझाया
पारंपरिक वाद्य यंत्र के विशेषज्ञ शरण उरांव ने जनजातीय समाज के सभी वाद्ययंत्रों ढोल, नगाडा, मांदर, केद्रा, सारंगी, डुगडुगिया, नरसिंगा, रणभेरी, खोचरा, टुहिला, शहनाई, और मांदर के अलग अलग तरीके और उसके बजाने का महत्व को समझाया. मौके पर मेरी एस सोरेन, इंदिरा गांधी क्षेत्रीय शाखा के डायरेक्टर रणवीर सिंह, शरण उरांव, खोरठा विभाग के डॉ बिनोद कुमार, करम सिंह मुंडा, मनय मुंडा, विरेद्र सोय समेत जनजातीय विभाग के छात्र-छात्राएं शामिल थे. इसे भी पढ़ें – आरोप-">https://lagatar.in/allegations-out-of-107-apps-restored-47-outsiders-jharkhandi-cheated-rajendra-prasad/">आरोप-बहाल हुए 107 एपीपी में 47 बाहरी, छले गये झारखंडी : राजेंद्र प्रसाद [wpse_comments_template]

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