डीआरडीए ने जांच समिति गठित की थी
इसके बाद डीडीसी ने मुखिया का वित्तीय अधिकार जब्त करने और संविदा पर नियुक्त कोऑर्डिनेटर और ऑपरेटर को बर्खास्त करने की बात कही थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. गत 28 जून को डीआरडीए द्वारा जांच समिति गठित की गई. जिसमें सहायक परियोजना पदाधिकारी विमलेश विश्वकर्मा, जिला आवास कोऑर्डिनेटर मुफ्ती अनवर और जिला आवास प्रशिक्षण प्रमुख अभय कुमार शामिल थे. जांच दल ने रीना के घर पहुंचकर पूछताछ की और प्रतिवेदन में आरोपों को प्रमाणित पाया. जांच रिपोर्ट के आधार पर 20 जुलाई को संबंधित मुखिया, पंचायत सचिव, आवास कोऑर्डिनेटर और प्रखंड विकास पदाधिकारी, हैदरनगर से स्पष्टीकरण मांगा गया था. जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि मुखिया ने लाभुक से पैसे की मांग की थी. हालांकि एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई.प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं
मुख्यमंत्री, प्रधान सचिव ग्रामीण विकास विभाग, प्रधान सचिव पंचायती राज विभाग और निदेशक पंचायती राज विभाग को इस मामले की शिकायत की गई. जिसके बाद सीएमओ कार्यालय से उपायुक्त, पलामू को 15 दिनों के अंदर कार्रवाई करने का निर्देश मिला. परंतु, अभी तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई. जिससे प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. जांच में यह भी सामने आया है कि प्राथमिकता सूची के अनुसार लाभुक सुनीता देवी, जो सूची में पहले स्थान पर थीं, से भी 10,000 रुपये की मांग की गई थी. पैसे नहीं देने पर उन्हें आवास का लाभ नहीं दिया गया. जबकि मुखिया के रिश्तेदारों को नियमों को दरकिनार कर आवास का लाभ दिया गया. यह मामला न केवल भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचारियों को बचाने के प्रयासों की ओर भी इशारा करता है. इसे भी पढ़ें - लेटरल">https://lagatar.in/lateral-entry-controversy-modi-government-writes-letter-to-upsc-chairman-asks-to-cancel-advertisement/">लेटरलएंट्री विवाद, मोदी सरकार ने UPSC चेयरमैन को पत्र लिखा, विज्ञापन रद्द करने को कहा [wpse_comments_template]
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