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पर्यटन स्थलों का विकास नहीं होने पर राज्यपाल ने जतायी नाराजगी

  • बोले- साल में एक ही योजना पर ईमानदारी से काम होता, तोझारखंड बनने के बाद से 21 पर्यटन स्थल विकसित होते
  • पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड का कोई विजन नहीं, टूरिस्ट सर्किट बनाने का दिया था निर्देश पर काम शुरू तक नहीं हुआ
  • पर्यटन सुविधाओं के प्रगति की राज्यपाल ने ली जानकारी, कहा -मलूटी मंदिर के जीर्णोद्धार काम देख हुई पीड़ा
Ranchi: राज्यपाल रमेश बैस ने झारखंड को पर्यटन एवं पर्यटकीय सुविधाओं की दृष्टिकोण से काफी पिछड़ा हुआ बताया है. उन्होंने कहा है कि अगर साल में एक ही योजना पर ईमानदारी से काम होता तो राज्य गठन से अब तक (2000 से अब तक) 21 पर्यटन स्थल विकसित हो जाते. राज्यपाल ने इसके लिए पर्यटन को लेकर विजन की कमी को कारण बताया है. उन्होंने कहा, पर्यटन स्थलों में आधारभूत संरचनाओं की कमी है. घोषणा तो बहुत होती है, लेकिन काम नहीं होता. इससे देश के लोगों को राज्य के पर्यटन स्थलों की जानकारी नहीं मिल पा रही है. जरूरी है कि अधिकारी पर्यटन के क्षेत्र में रुचि लेकर काम करें. राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने पहले भी टूरिस्ट सर्किट और पंपलेट बनाने का निर्देश दिया था, पर आज तक इसमें कोई पहल नहीं हुई. इसे पढ़ें-28">https://lagatar.in/santragachi-patna-bhayan-ranchi-will-run-on-28th-and-29th-october-chhath-festival-special-train/">28

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सभी स्तर के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने पर जोर

राज्यपाल गुरुवार को पर्यटन, कला- संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के अधिकारियों संग पर्यटन सुविधाओं की प्रगति की जानकारी ले रहे थे. उन्होंने सभी स्तर के खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित करने पर जोर दिया, ताकि वे खुले मन से चिंतामुक्त होकर खेल सकें और राज्य एवं देश का नाम रौशन कर सकें. बैठक में राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी, विभागीय सचिव मनोज कुमार एवं विभाग के अन्य अधिकारीगण मौजूद थे. इसे भी पढ़ें-हीमोफीलिया">https://lagatar.in/who-is-responsible-for-the-death-of-the-patient-in-the-absence-of-the-haemophilia-factor/">हीमोफीलिया

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मलूटी मंदिर को लेकर राज्यपाल ने साझा की पीड़ा

राज्यपाल ने मलूटी मंदिर को लेकर भी अपनी पीड़ा साझा की. उन्होंने कहा, मलूटी जाकर उन्होंने जीर्णोद्धार के कार्य को देखा था. उन्हें बहुत दुःख और पीड़ा हुई. टेराकोटा के इस प्रकार के मंदिरों की ऋंखला पूरे विश्व में नहीं है. उन्होंने निर्देश दिया कि जिस स्वरूप में मंदिर था, जीर्णोद्धार के तहत उसी स्वरूप में लाने का प्रयास होना चाहिए. [wpse_comments_template]  

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