Jaipur : कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मारग्रेट अल्वा ने राजभवन और राज्यपाल पर कई संगीन आरोप लगाये हैं. मारग्रेट अल्वा ने आरोप लगाये हैं कि कई राज्यों में राजभवन ‘‘पार्टी कार्यालयों’’ की तरह काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि कई राज्यों में राज्यपाल सरकारों को ‘‘बनाने और गिराने’’ में राजनीतिक भूमिका निभा रहे हैं. कहा कि राज्यपाल ‘‘राजनीतिक दलों के एजेंट’’ नहीं हैं. उनसे राजभवनों में संविधान की अपेक्षाओं के अनुरूप व्यवहार करने की उम्मीद की जाती है. राज्यपाल की भूमिका की संपूर्ण अवधारणा संघीय व्यवस्था को चालू रखना है. आज चुनौतियां हैं. सामान्य से हटकर व्यवहार किया जा रहा है. कई राज्यों में देखा जा रहा है कि कई परिस्थितियों में राज भवन पार्टी कार्यालयों की तरह काम कर रहे हैं.
राज्यपाल कई राज्यों की नीतियों में ‘‘बार-बार लगा रहे अडंगा
17वें जयपुर साहित्योत्सव (जेएलएफ) में ‘वी द पीपल : दी सेंटर एंड दी स्टेट्स’ सत्र को संबोधित करते हुए मारग्रेट अल्वा ने उक्त बातें कही थी. वह उत्तराखंड, गोवा, गुजरात और राजस्थान की राज्यपाल रह चुकी है. अल्वा ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडलों की सलाह की अनदेखी करते हुए सरकारों को बनाने और गिराने में राज्यपाल राजनीतिक भूमिका अदा कर रहे हैं. वास्तविकता तो यह है कि हम कई राज्यों में राजभवन और सरकारों के बीच रोजाना संघर्ष देखते हैं. मेरा मानना है कि यह सही बात नहीं है. उन्होंने केरल, पुडुचेरी और दिल्ली का उदाहरण दिया और बताया कि किस प्रकार राज्यपाल कथित रूप से केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रहे हैं और राज्य की नीतियों में ‘‘बार-बार अडंगा लगा रहे हैं. संवैधानिक व्यवस्था की अनदेखी करेंगे तो केंद्र और राज्यों के बीच विवाद होंगे पैदा
अल्वा ने कहा कि केरल के राज्यपाल सड़क पर बैठ कर सरकार के खिलाफ विरोध जता रहे हैं. इससे पद की गरिमा खत्म होती है. कहा कि पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की स्थिति इतनी खराब है कि वहां राज्यपाल ने हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन करने से इनकार कर दिया और प्रशासन को आदेश पर आदेश देना जारी रखा. सत्र में अल्वा ने अपने बयानों का मतलब भी बताया. उन्होंने कहा कि यदि राज्यपाल संवैधानिक व्यवस्था की अनदेखी करेंगे तो वो केंद्र और राज्यों के बीच विवाद पैदा करेंगे. [wpse_comments_template]
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