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चीनी सैनिकों की दादागीरी, लद्दाख के डेमचौक में भारतीय चरवाहों को रोका

New Delhi : भारत-चीन सीमा पर चीनी सैनिकों की एक बार फिर दादागीरी देखने को मिली है. यहां चीनी सैनिकों ने लद्दाख के डेमचौक में भारतीय चरवाहों को रोका है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने डेमचौक में सीएनएन जंक्शन पर सैडल पास के पास भारतीय चरवाहों की मौजूदगी पर आपत्ति जताई. इस घटना के बाद भारतीय सेना के कमांडरों और चीनी सैनिकों के बीच इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बैठकें भी हुईं हैं.

लद्दाख में बाज नहीं आ रहा चीन

यह घटना 21 अगस्त की बताई जा रही है. इसके बाद भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 26 अगस्त को इस मामले को लेकर बैठक हुई थी. दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई बैठक के बाद मामले को फिलहाल सुलझा लिया गया है. लेकिन दोनों देशों के सैनिक देमचोक के पास मौजूद चरागाह पर नजर बनाए हुए हैं. अधिकारी ने कहा कि चरवाहे क्षेत्र में लगातार आते रहे हैं और 2019 में भी मामूली हाथापाई हुई थी. उन्होंने कहा, ‘इस बार जब चरवाहे पशुओं के साथ गए, तो चीनियों ने आपत्ति जताई कि यह उनका क्षेत्र है. इस मुद्दे को चीनियों के साथ उठाया गया था.’ एक रक्षा सूत्र ने कहा कि दोनों सेनाओं के बीच कोई आमना-सामना नहीं हुआ. सूत्र ने कहा, ‘यह स्थानीय स्तर पर कमांडरों के बीच मुद्दे को हल करने और एलएसी पर शांति बनाए रखने के लिए एक नियमित बातचीत थी. यह प्रोटोकॉल के हिस्से के रूप में एलएसी के साथ नियमित रूप से होती रहती है.’
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गलवान की घटना के बाद ‘नो पेट्रोलिंग जोन’ बन गए हैं

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत और चीन अप्रैल 2020 से इस क्षेत्र में डटे हुए हैं. सेक्टर के कई क्षेत्र 15 जून 2020 को गलवान की घटना के बाद ‘नो पेट्रोलिंग जोन’ बन गए हैं, जब कई चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़पों में 20 भारतीय शहीद हो गए थे. भारतीय और चीनी सैनिक दो साल से अधिक समय से पूर्वी लद्दाख में एलएसी के साथ कई स्थानों पर तैनात हैं, जहां राजनयिक और सैन्य स्तर पर कई दौर की बातचीत ने कुछ बिंदुओं पर गतिरोध को कम किया है.

एलएसी पर कुल 23 संवेदनशील इलाके हैं

ईस्टर्न लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैली एलएसी पर कुल 23 संवेदनशील इलाके हैं. साल 2018 में चीनी सैनिक देमचोक में 300-400 मीटर अंदर तक घुस गए थे. उन्होंने कुछ टेंट भी उखाड़े थे. इसके बाद दोनों देशों के सैनिकों के बीच बातचीत हुई और मामले को कंट्रोल किया गया था. साल 2020 के अक्टूबर में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का एक सैनिक देमचोक से ही पकड़ा भी गया था. वह 19 अक्टूबर 2020 को पूर्वी लद्दाख के देमचोक सेक्टर में भटक गया था. पूछताछ के बाद भारतीय सेना ने उसको वापस चीन भेज दिया था. वह सैनिक कॉरपोरल रैंक पर था और चीन के शांगजी इलाके का रहना वाला था. उसके पास से सिविल और मिलिट्री डॉक्यूमेंट बरामद हुए थे.
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