New Delhi : कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि मोदी सरकार की ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना वहां के अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर देगी.
आज रविवार को उन्होंने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर यह दावा किया है, अपने पत्र में जयराम रमेश ने श्री यादव इस परियोजना पर फिर से विचार करने का आग्रह किया.
Here is my latest letter to the Union Minister of Environment, Forests and Climate Change on the Great Nicobar Island Development Project pic.twitter.com/Has61V8PQB
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 10, 2026
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि परियोजना को दी गयी पर्यावरणीय मंजूरी अधूरी और अपर्याप्त पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) रिपोर्टों के आधार पर दी गयी है.
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार द्वारा जारी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट एफएक्यू में किये गये कई दावे मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों और उपलब्ध अध्ययनों से मेल नहीं खाते.
श्री रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पत्र शेयर करते हुए लिखा कि सरकार ने एक मई को जारी एफएक्यू में दावा किया था कि परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों की व्यापक पहचान, मूल्यांकन और प्रबंधन मजबूत पर्यावरण प्रभाव आकलन प्रक्रिया तथा विस्तृत पर्यावरण प्रबंधन योजना के माध्यम से किया जा रहा है.
हालांकि कांग्रेस महासचिव कहा कि वह इस विषय पर पहले भी तीन मई को विस्तृत प्रतिक्रिया दे चुके हैं, लेकिन अब कुछ अतिरिक्त तथ्यों और तकनीकी बिंदुओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए पत्र लिखा है.
जयराम रमेश ने पर्यावरण मंत्रालय के तीन नवंबर 2009 के कार्यालय ज्ञापन का उल्लेख करते हुए कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 50 लाख टन प्रतिवर्ष से अधिक क्षमता वाली बंदरगाह परियोजनाओं के लिए व्यापक ईआईए, भौतिक एवं गणितीय मॉडलिंग तथा जमीनी सत्यापन जरूरी है.
रमेश की आरोप है कि इतने बड़ी परियोजना के लिए महज सीमित अवधि के अध्ययन के आधार पर मंजूरी देना पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी किया जाना है.
कांग्रेस नेता के अनुसार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2021 की अपनी मैपिंग में गैलाथिया खाड़ी के बड़े हिस्से को कटावग्रस्त तटीय क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया था.
रमेश ने कहा कि परियोजना के लिए तैयार अंतिम ईआईए रिपोर्ट मार्च 2022 में प्रस्तुत की गयी थी. रिपोर्ट में स्वीकार किया गया था कि पर्यावरणीय आधारभूत अध्ययन केवल दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच एक ही मौसम में किया गया.
इसलिए यह अध्ययन वैज्ञानिक मानकों और दीर्घकालिक पर्यावरणीय मूल्यांकन की आवश्यकताओं को कतई पूरा नहीं करता. कांग्रेस महासचिव ने यह भी कहा कि भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की रिपोर्ट फरवरी-मार्च 2021 के आंकड़ों परआधारित थी.
भारतीय वन्यजीव संस्थान की रिपोर्ट ने स्वयं को रैपिड असेसमेंट स्टडी बताया है, जो अप्रैल 2021 में कुछ दिनों के दौरे पर आधारित थी.
जयराम रमेश ने अपने पत्र में लिखा है ग्रेट निकोबार की जैव विविधता वैश्विक स्तर पर अत्यंत विशिष्ट और दुर्लभ है. उन्होंने कहा कि कई सुरक्षा विशेषज्ञ पहले ही लिख चुके हैं कि देश की सामरिक और सुरक्षा आवश्यकताओं को पर्यावरणीय विनाश के बिना भी पूरा किया जा सकता है.
श्री रमेश ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से परियोजना की वर्तमान रूपरेखा, पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े सभी अध्ययनों की पुनर्समीक्षा कराने की अपील की है.
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