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ग्राउंड रिपोर्ट : पहले शौचालय में गड़बड़ी, अब नल-जल योजना की बारी, पढ़ें पूरी र‍िपोर्ट

Pramod Upadhyay Hazaribagh : पहले शौचालय में गड़बड़ी और अब नल-जल योजना में अनियमितता की बात सामने आ रही है. ठेकेदारों ने दोनों योजनाओं में सिर्फ खानापूर्ति की है. मोटर चालू कर ठेकेदार घर जाते हैं और इधर मोटर ही खराब हो जाता है. वहीं घर-घर शौचालय बनाना था. लेकिन कहीं दीवार खड़ी कर, तो कहीं गड्ढा खोद कर छोड़ दिया गया. हजारीबाग जिले के इचाक और कटकमसांडी प्रखंडों में कुछ ऐसा ही हाल देखा जा रहा है. नल जल योजना की खुदाई चल रही है. अगर पानी निकला तो ठीक, नहीं तो ऊपर से पानी डाल कर बोरिंग को भर दिया जा रहा है. कटकमसांडी प्रखंड के मायापुर के ग्रामीण संतोष राम, राजकुमार राम, भैरव रविदास सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि बोरिंग होने के बाद बाहर का पानी कुछ न कुछ जमा हो जाता है. उसी में मोटर लगाकर टंकी को भर दिया जाता है. एक-दो दिन चलता है फिर कभी मोटर खराब होने की बात कही जाती है, तो कहीं बोरिंग धंसने की बात कही जाती है. ऐसा ही मामला स्वच्छ भारत मिशन के तहत इचाक प्रखंड में शौचालय बनाने में भी देखा जा रहा है. इसमें प्रत्येक लाभुक के खाते में 12 हजार रुपए देने की बात कही गई थी. कुछ दबंग लाभुकों को 8000 रुपए दे दिए गए. उन्होंने शौचालय बनाया तक नहीं. वहीं साधारण लाभुकों को बिना पैसे दिए कहीं दीवार, तो कहीं गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया. शौचालय पूरा नहीं किया गया, लेकिन पूरा बिल पास हो गया. यहां तक कि सार्वजनिक शौचालय को भी अधूरा छोड़ दिया गया. उसे अब तक पूरा नहीं किया गया है. इधर नल जल योजना का लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिला. पूरे तामझाम के साथ कटकमसांडी की पबरा पंचायत स्थित मायापुर में ठेकेदार ने वर्ष 2020 में काम शुरू किया. वर्ष 2021 में योजना पूरी हो गई.15 घरों में नल भी लगाए गए. लेकिन पांच दिनों के बाद मोटर खराब हो गया. उसके बाद से आज तक ठेकेदार देखने के लिए नहीं आया और न ही विभाग को कोई मतलब रहा. लेकिन योजना से संबंधित 4.50 लाख रुपए का पूरा भुगतान कर दिया गया.

200 की जगह 180 फीट ही की जा रही बोरिंग

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के प्राक्कलन में 200 फीट बोरिंग करनी है. लेकिन उसकी जगह 180 फीट ही बोरिंग की जा रही है. वहां कम कीमत का मोटर लगाकर ठेकेदार ने बिल का भुगतान करा लिया. यह ऐसा मोटर होता है, जो चालू करते ही खराब हो जा रहा है. घरों में दिखावे के लिए सिर्फ 100 रुपए का नल रह जाता है. उससे एक बूंद भी पानी नहीं निकलता है. उसके बाद ठेकेदार लापता हो जाते हैं. देखते ही देखते पांच साल बीत गए, लेकिन योजना की सुध लेनेवाला कोई नहीं आता.

ठेकेदार को पांच साल तक मरम्मत करनी है, नहीं तो काटी जाएगी राशि : कार्यपालक अभियंता

पेयजल स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता मनोज मुंडारी ने कहा कि यह योजना पांच साल तक के लिए है. पांच साल तक ठेकेदार को योजना की मरम्मत करने की जिम्मेवारी है. अगर ठेकेदार मरम्मत नहीं करता है, तो उनके भुगतान में राशि काटी जाएगी. [wpse_comments_template]

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