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ग्राउंड रिपोर्ट : न है दुकान, न है गोदाम, वेंडर कर रहा कूप निर्माण

Pramod Upadhyay Hazaribagh : वेंडर का काम है लाभुकों को पूरा सामान उपलब्ध कराना. लेकिन स्थिति उलट है, न तो वेंडर ने सामग्रियों की दुकान खोली है और न गोदाम बनाया है और कूप निर्माण का ठेका भी लाभुक से ले रखा है. दरअसल मनरेगा से बननेवाले कूप के लाभुक के पास पैसों का अभाव रहता है. उसी की मजबूरी का फायदा वेंडर उठाते हैं और इस शर्त पर कूप निर्माण कराते हैं कि पूरा काम उन्हीं के जिम्मे होगा. अगर लाभुक वेंडर की बात नहीं मानते हैं, तो उन्हें बाजार से मेटेरियल लाने की बात कही जाती है. साथ ही पैसे का भी जुगाड़ करना पड़ता है, चूंकि लाभुक को पैसे नहीं दिए जाते हैं. कूप निर्माण की राशि मजदूरों और वेंडर के खाते में जाता है. ऐसे में लाभुक वेंडर की बात मानने को मजबूर हो जाते हैं. कूप निर्माण के लिए 4 लाख 62 हजार रुपए सरकार की ओर से दी जाती है. सारा खेल इसी राशि में कमीशनखोरी का होता है. कई लाभुकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इचाक प्रखंड के कई पंचायतों में वेंडर है. लेकिन उनके पास कोई भी सामान उपलब्ध नहीं है. अगर कोई लाभुक खुद से काम करवाता है, तो उसे बाजार से सामान खरीदना पड़ता है. इधर वेंडर बिना कमीशन लिए हुए पैसे नहीं निकालता है. कूप निर्माण के लिए सरकार की ओर से दी गई राशि देने में टालमटोल करता रहता है. इस वजह से कई लाभुक वेंडर को ही काम सौंप देते हैं. ऐसे में वेंडर फर्जी मजदूरों के नाम जॉब कार्ड बनवा और खाता खुलवाकर राशि हड़पता है. साथ ही मजदूरों की जगह जेसीबी मशीन से घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर कूप निर्माण कराता है. कागज पर होता है काम, करते हैं कमीशनखोरी : मुखिया [caption id="attachment_614352" align="alignleft" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/satyendra-mehta-mukhiya_773-150x150.jpg"

alt="मुखिया सत्येंद्र मेहता " width="150" height="150" /> मुखिया सत्येंद्र मेहता[/caption] इस संबंध में इचाक स्थित अलौंजा के मुखिया सत्येंद्र मेहता ने कहा कि इचाक प्रखंड में कई वेंडर ब्लैक लिस्टेड हैं. उनके पास कोई भी मेटेरियल उपलब्ध नहीं है और न ही कोई दुकान या गोदाम है. वह केवल कागज पर काम करते हैं और कमीशन खाते हैं.

वेंडर के पास रसीद भी नहीं, सरकार का कर रहे टैक्स गबन

वेंडर के पास मेटेरियल की रसीद भी नहीं है और सरकार के टैक्स का भी गबन करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रखंड कार्यालय में बिना कमीशन के कोई भी मनरेगा योजना का बिल पास नहीं होता है. ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए भी सभी टेबल पर हिस्सा देना पड़ता है. उसके बाद भी एक या दो साल के बाद भुगतान होता है. इस वजह से लाभुक कूप निर्माण का काम नहीं लेना चाहते हैं.

पंचायती राज में प्रखंड कार्यालय कर रहा सारा काम

पंचायती राज में पंचायत मुख्यालय में ही रोजगार सेवक को बैठना था और वहीं से ऑनलाइन करने का प्रावधान है. यहां तक कि मुखिया का भी पावर सीज कर दिया गया है. सारा काम प्रखंड कार्यालय खुद से करता है, ऐसे में पंचायत का विकास कैसे हो पाएगा और कमीशनखोरी कैसे रूकेगी.

प्रमुख ने वेंडर की भूमिका पर उठाया सवाल

[caption id="attachment_614349" align="alignleft" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/pramukh-parwati-devi_203-150x150.jpg"

alt="प्रमुख पार्वती देवी" width="150" height="150" /> प्रमुख पार्वती देवी[/caption] प्रमुख पार्वती देवी ने बताया कि वेंडर बिचौलिया का काम कर रहे हैं. उन्हें एक नंबर सामान लाभुक तक पहुंचाना है, लेकिन यह केवल अपने कमीशन के फेर में रहते हैं. साथ ही प्रखंड कार्यालय में अधिकारियों तक पैसे पहुंचाने का काम करते हैं. ऐसे में यह सवाल उठता है कि वेंडर की क्या आवश्यकता थी. [wpse_comments_template]

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