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ग्राउंड रिपोर्ट : तीन दर्जन वार्ड ब्वॉय बहाल, फिर भी खुद स्ट्रेचर खींचते हैं मरीज के परिजन

 
हजारीबाग शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मनमर्जी करते हैं स्टाफ, सहयोग के लिए नहीं बंटाते हाथ Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तीन दर्जन वार्ड ब्वॉय बहाल हैं, फिर भी मरीजों को वार्ड या अन्य जगहों पर ले जाने में काफी परेशानी होती है. मरीज के परिजनों को खुद स्ट्रेचर खींचना पड़ता है. मरीज के परिजनों का कहना है कि हजारीबाग शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्टाफ मनमर्जी से काम करते हैं. जिस काम के लिए उन्हें रखा गया है, उसमें भी सहयोग नहीं करते हैं. पहले यहां छह वार्ड ब्वॉय थे. कमी को देखते हुए जनवरी में डीडीसी सह अस्पताल प्रशासक ने 28 वार्ड ब्वॉय को बहाल किया. इस तरह अस्पताल में 34 वार्ड ब्वॉय बहाल हो गए. उसके बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ. लगातार दो दिनों तक ऐसे मामले सामने आए, जब परिजनों को खुद स्ट्रेचर खींचकर मरीज को ले जाना पड़ा. अस्पताल में 13 जून को भर्ती चौपारण के दुरागढ़ा निवासी जगन बिरहोर की 15 वर्षीय पुत्री पूजा कुमारी का पैर टूट गया था. वह कुएं में गिर गई थी. उसे ट्रामा सेंटर पर बुलाकर बैंडेज किया गया. इस दौरान उसके माता-पिता को स्ट्रेचर खींचकर ले जाना पड़ा. वे लोग स्ट्रेचर चलाना भी नहीं जानते थे. बगल में भर्ती इटखोरी के एक मरीज के परिजन बिहारी भुइयां ने उन्हें सहयोग किया, लेकिन वार्ड ब्वॉय ने उनकी नहीं सुनी. [caption id="attachment_670705" align="alignleft" width="300"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/18-300x200.jpg"

alt="स्ट्रेचर खींचते मरीज के परिजन" width="300" height="200" /> स्ट्रेचर खींचते मरीज के परिजन[/caption]

कदम-कदम पर पैसे मांगे जाने का आरोप

दीपूगढ़ा की महिला सविता देवी ने बताया कि सदर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिला है. यहां दूर-दूर से लोग इलाज के लिए आते हैं, लेकिन व्यवस्था नहीं मिल पाती है. किसी से पूछो, तो वह रास्ता बताने का भी पैसा मांगता है. विष्णुगढ़ से आए सुरेश राम ने बताया कि उम्र प्रमाण पत्र के लिए भी सदर अस्पताल के कर्मी ने ₹500 मांगे. जब ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड से इस संबंध में बात की, तो उसने भी सलाह दी कि चढ़ावा देकर बनवा लो. यहां तक की सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों में भी इलाज के नाम पर पैसे लिए जा रहे हैं. इसके अलावा मरीज की छुट्टी होने के बाद होमगार्ड भी पैसे वसूल रहे हैं.

वार्ड ब्वॉय के खिलाफ करें शिकायत : सुपरिंटेंडेंट

हजारीबाग शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि किसी को परेशानी हो, तो सीधा उनके पास लिखित शिकायत करें. वार्ड ब्वॉय को सहयोग के लिए ही बहाल किया गया है. बिचौलियों से बचें. सदर अस्पताल में किसी काम के पैसे नहीं लगते हैं. मरीज और उनके परिजन जागरूक बनें.

सदर अस्पताल में पैसे देनेवाले भी उतने ही दोषी : अभिषेक पांडेय

जनतंत्र मोर्चा के जिलाध्यक्ष अभिषेक पांडेय कहते हैं कि सदर अस्पताल में पैसे देनेवाले भी उतने ही दोषी हैं, जितना लेने वाले. सदर अस्पताल में बिचौलिए हावी हैं. अगर कोई पैसा मांगता है या ट्रॉली नहीं खींचता है, तो इसकी शिकायत प्रबंधन से करने की जरूरत है. इसे भी पढ़ें : हॉलीवुड">https://lagatar.in/hollywood-actor-al-pacino-became-a-father-at-the-age-of-83/">हॉलीवुड

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