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टाटा स्टील वेज रिवीजन पर बढ़ा असंतोष, ब्रीफिंग के दौरान कमेटी मेंबरों का विरोध

टाटा स्टील के लंबे समय से लंबित वेज रिवीजन समझौते को लेकर कर्मचारियों और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है. बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआई ऑडिटोरियम में आयोजित ग्रेड रिवीजन ब्रीफिंग कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी प्रस्तावित वेज रिवीजन समझौते की जानकारी दे रहे थे.
 

Jamshedpur: टाटा स्टील के लंबे समय से लंबित वेज रिवीजन समझौते को लेकर कर्मचारियों और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है. बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआई ऑडिटोरियम में आयोजित ग्रेड रिवीजन ब्रीफिंग कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी प्रस्तावित वेज रिवीजन समझौते की जानकारी दे रहे थे.

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कार्यक्रम के दौरान सिक्योरिटी विभाग के कमेटी मेंबर रूपेश पांडेय अचानक अपनी सीट से खड़े हो गए और समझौते पर असंतोष जताते हुए व्यंग्यात्मक तरीके से ताली बजाने लगे. इसके बाद उन्होंने बैठक का बहिष्कार करते हुए सभागार छोड़ दिया. उनके साथ कई अन्य कमेटी मेंबर भी बाहर निकल गए. इस घटना के बाद कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारियों के बीच समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं. खास बात यह रही कि उस समय तक यूनियन नेतृत्व की ओर से समझौते की पूरी जानकारी भी साझा नहीं की गई थी.

 

बैठक के बाद विभिन्न विभागों के कमेटी मेंबरों और पूर्व पदाधिकारियों ने प्रस्तावित वेज रिवीजन पर खुलकर नाराजगी जाहिर की. उनका कहना था कि लंबे इंतजार के बाद हुए इस समझौते से कर्मचारियों की अपेक्षाएं पूरी नहीं हो सकीं. विशेष रूप से एनएस ग्रेड और नई सीरीज के कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ को लेकर सवाल उठाए गए.

 

टाटा वर्कर्स यूनियन के पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय ने कहा कि वेज रिवीजन कर्मचारियों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि एनएस ग्रेड के कर्मचारियों को पर्याप्त लाभ नहीं मिला है, जबकि पुराने ग्रेड के कर्मचारियों को भी अपेक्षित फायदा नहीं मिल सका. उनके अनुसार समझौते से कर्मचारियों में संतोष के बजाय असंतोष अधिक दिखाई दे रहा है.

 

पिलेट प्लांट के पूर्व कमेटी मेंबर समरेश सिंह ने कहा कि नई सीरीज के कर्मचारियों को लेकर जो उम्मीदें थीं, वे पूरी होती नजर नहीं आ रही हैं. उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा देखने को मिला है जब कर्मचारियों को बेसिक और डीए से जुड़े बकाये का पूरा लाभ नहीं मिल पाया. उन्होंने अन्य इकाइयों में हुए वेतन समझौतों का भी उल्लेख करते हुए तुलना की.

 

वहीं सिंटर प्लांट के कमेटी मेंबर संतोष पांडेय ने समझौते को कर्मचारियों की अपेक्षाओं से काफी नीचे बताया. उनका कहना था कि कर्मचारियों को जिस आर्थिक लाभ की उम्मीद थी, वह इस समझौते में दिखाई नहीं देता. उन्होंने इसे हाल के वर्षों के सबसे निराशाजनक वेतन समझौतों में से एक बताया.

 

कमेटी मेंबर आरसी झा ने भी यूनियन नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि वेज रिवीजन को लेकर बेहतर रणनीति और मजबूत बातचीत की जरूरत थी. उनके अनुसार यदि प्रबंधन के साथ अधिक प्रभावी तरीके से बातचीत की जाती तो कर्मचारियों के लिए बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते थे. उन्होंने कहा कि विशेषकर एनएस ग्रेड के कर्मचारियों में समझौते को लेकर निराशा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है.

 

वेज रिवीजन समझौते की घोषणा के बाद टाटा स्टील के विभिन्न विभागों में इसकी चर्चा तेज हो गई है. एक ओर यूनियन नेतृत्व इसे संतुलित और व्यावहारिक समझौता बता रहा है, वहीं दूसरी ओर कई कर्मचारी प्रतिनिधि और कमेटी मेंबर इसे कर्मचारियों की उम्मीदों से कमतर मान रहे हैं. आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कर्मचारियों और यूनियन के बीच बहस और प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है.

 

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