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गुड़ाबांदा : स्वर्णरेखा नदी के केंदुआपाल घाट से बालू की हो रही है लूट, प्रशासन बना तमाशबीन

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Gudabanda : स्वर्णरेखा नदी में पानी कम होते ही रेत माफिया नदी से बालू की लूट में मस्त हो गए हैं. प्रशासन और माफियाओं की सांठगांठ से गुड़ाबांदा प्रखंड की अंगारपाड़ा स्थित स्वर्णरेखा नदी के केंदुआपाल घाट से बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उत्खनन शुरू हो गया है. सरकार को लाखों का नुकसान हो रहा है. एनजीटी द्वारा 15 अक्टूबर तक बालू के उत्खनन पर रोक लगाए जाने और उपायुक्त द्वारा बालू के उत्खनन पर रोक लगाने के लिए टास्क फोर्स के गठन के बावजूद स्वर्णरेखा नदी से बालू की लूट चर्चा का विषय बन गई है. [caption id="attachment_401830" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/Gudabanda-Sand.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> लुआडीह-जामबनी के पास बालू का भंडार.[/caption] इसे भी पढ़ें : चाईबासा">https://lagatar.in/chaibasa-lok-adalat-set-up-in-civil-court-31-cases-executed/">चाईबासा

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बहरागोड़ा के रास्ते जमशेदपुर ले जाया जा रहा है बालू

ग्रामीण टास्क फोर्स की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं. लुआडीह और जामबनी के पास बालू का अकूत भंडार है. रात में बालू को डंपर पर लोड कर गुहियापाल में स्वर्णरेखा नदी पर बने पुल से होते हुए बहरागोड़ा के रास्ते जमशेदपुर ले जाया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक शाम चार बजते ही इस घाट पर बालू लूट का खेल शुरू हो जाता है. दर्जनों मजदूर जुट जाते हैं. इसके बाद मजदूर ट्रैक्टरों पर बालू लोड करते हैं और लुआडीह-जामबनी के पास बालुओं को डंप किया जाता है. इस कार्य में करीब 10 ट्रैक्टर लगाए गए हैं. इसे भी पढ़ें : बहरागोड़ा">https://lagatar.in/baharagora-foundation-stone-laid-for-renovation-work-of-patpur-panchayat-building/">बहरागोड़ा

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इस घाट से प्रतिदिन 100 ट्रैक्टर बालू की हो रही चोरी

बालू लूट का यह खेल रात 11:00 बजे तक चलता है. इसके बाद हाईवा से बालू को जमशेदपुर ले जाने का खेल देर रात तक चलता है. ग्रामीणों के मुताबिक इस घाट से प्रतिदिन 100 ट्रैक्टर बालू की चोरी हो रही है. परंतु प्रशासन तमाशबीन बना है. आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि बालू लूट का यह खेल प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है. बालू माफियाओं ने स्वर्णरेखा नदी में ट्रैक्टरों के प्रवेश करने के लिए नदी के किनारा को कटवा दिया है. इसके कारण नदी का किनारा भी क्षतिग्रस्त हुआ है. इसी रास्ते से ट्रैक्टरों को नदी में प्रवेश कराया जा रहा है. [wpse_comments_template]
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