Gurabanda (Sanat Kr Pani) : गुड़ाबांदा प्रखंड के कल्याण अस्पताल बनमाकड़ी में प्रसव की सुविधा शुरू हो गई है. डीसी विजया जाधव के पहल पर अस्पताल में नयी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने लगी है. उपायुक्त द्वारा किये गए संवेदनशील प्रयास से शनिवार को जोबा रानी सोरेन का पहला प्रसव कराया गया जो अर्जुन बेड़ा गांव की रहने वाली हैं, प्रसव के बाद जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और चिकित्सकों की निगरानी में हैं. प्रसव कराने वाली टीम में डॉ. प्रियंका बासुंरी, एएनएम ज्योत्स्ना महतो, चूडामणि मुर्मू, उषा रानी बेरा शामिल थे. जन्म के समय बच्चे का वजन 3.2 किग्रा था. उपायुक्त ने बच्चे का नाम उद्भव रखने का सुझाव दिया जिसे बच्चे के माता पिता ने सहर्ष स्वीकार किया. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-effect-of-news-councilor-sent-water-tanker-in-kitadih-area/">जमशेदपुर
: खबर का असर, किताडीह क्षेत्र में पार्षद ने भिजवाया पानी का टैंकर
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alt="" width="600" height="400" /> प्रसूता के साथ अस्पताल के डॉक्टर व कर्मचारी[/caption]
: सुरक्षाबलों ने गोइलकेरा से छह किलो का प्रेशर बम किया बरामद
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कम एवं तय समय में सुधरी अस्पताल की व्यवस्था
उपायुक्त ने बहुत कम समय में अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए सिविल सर्जन, बीडीओ गुड़ाबांदा के साथ-साथ प्रतिनियुक्त चिकित्सक व स्वास्थ्य कर्मियों को पहला प्रसव कराने पर बधाई दी है. उन्होंने कहा कि और थोड़े प्रयास से बनमाकड़ी के कल्याण अस्पताल को मॉडल अस्पताल बनाया जा सकता है. सिविल सर्जन डॉ जुझार माझी बताते हैं कि कल्याण अस्पताल में लचर स्वास्थ्य सुविधा की शिकायत पर उपायुक्त द्वारा इसका रिव्यु किया गया तो एक ही बात सामने आई कि 40-50 हजार की एक बड़ी ग्रामीण आबादी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा से वंचित रह जा रही है. कल्याण अस्पताल का संचालन विकास भारती संस्था द्वारा किया जाता है जिसका सरकार के साथ एमओयू है. उपायुक्त द्वारा किये गए रिव्यु में यह बात आई कि अस्पताल का जिस ढंग से संचालन होना चाहिए वो नहीं हो रहा है, साथ ही गुड़ाबांदा में अन्य कोई अस्पताल भी नहीं हैं. उसके बाद अस्पताल की दशा और दिशा को सुदृढ करने के लिए उपायुक्त ने सिविल सर्जन व प्रखंड विकास पदाधिकारी, गुड़ाबांदा को इसका टास्क सौंपा. उपायुक्त के निर्देश पर पूर्व में कार्यरत दो चिकित्सकों की संख्या को बढ़ाते हुए वर्तमान में नौ चिकित्सक विकास भारती संस्था द्वारा अस्पताल में प्रतिनियुक्त किये गये हैं, जिनमें कुछ नियमित हैं वहीं कुछ चिकित्सक से एडहॉक पर सेवा ली जा रही. साथ ही नौ एएनएम भी अस्पताल में कार्यरत हैं. [caption id="attachment_610395" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> प्रसूता के साथ अस्पताल के डॉक्टर व कर्मचारी[/caption]
इमरजेंसी होने पर नहीं हो पाता था इलाज
गुड़ाबांदा की प्रखंड विकास पदाधिकारी स्मिता नगेशिया ने बताया कि प्रखंड में सीएचसी नहीं होने के कारण यहां के लोगों को किसी इमरजेंसी में आसपास के दूसरे प्रखंड पर निर्भरता थी, या कल्याण अस्पताल, बनमाकड़ी ही एकमात्र विकल्प था. ऐसे में अस्पताल का किसी कारणवश सही तरह से फंक्शनल नहीं होना यहां के लोगों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ था. चिकित्सीय सुविधाओं को सुदृढ करना बहुत ही जरूरी था जो उपायुक्त की पहल पर हो पाया है. इसे भी पढ़ें : चक्रधरपुर">https://lagatar.in/chakradharpur-security-forces-recovered-six-kg-pressure-bomb-from-goilkera/">चक्रधरपुर: सुरक्षाबलों ने गोइलकेरा से छह किलो का प्रेशर बम किया बरामद
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