alt="" width="600" height="400" /> बैगन की खेती[/caption] इसे भी पढ़ें : बहरागोड़ा">https://lagatar.in/bahragora-mps-representative-read-out-the-presidents-address/">बहरागोड़ा
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वर्ष 2017 में कान्हू मुंडा ने किया था सरेंडर
[caption id="attachment_599140" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> बाजार में बिकने के लिए तैयार तरबूज[/caption] कभी एरिया कमांडर रहे जियान गांव के इनामी नक्सली कान्हू मुंडा अपने दस्ते के साथ इस क्षेत्र में घुमता था. पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती था. कोई बाहरी व्यक्ति जियान जाने से डरता था. वर्ष 2017 में 15 फरवरी को नक्सली कान्हू मुंडा ने दस्ते के साथ सरकारी पुनर्वास योजना के तहत अपने छह साथियों के साथ प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. इसके बाद से जियान समेत पूरे क्षेत्र का माहौल बदल गया. प्रशासनिक अमला ने ग्रामीणों के लिए कई योजनाओं की सौगात दी. सिंचाई के लिए डीप बोरींग दिये गये. इससे इस क्षेत्र में खेतीबारी कुछ आसान हुआ. ग्रामीणों की खेतीबारी में रुची बढ़ी है. पूर्व नक्सली कान्हू मुंडा के पिता योगेश्वर मुंडा भी तरबूज और बैंगन की खेती कर काफी खुश हैं. [wpse_comments_template]

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