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गुमला : सिरसी ता नाला में सरना धर्म दर्शन व ककड़ोलाता दोन धार्मिक कांड का आयोजन

माघ पंचमी के अवसर पर बढ़ते चांद की तिथि में सिरसी ता नाला में सरना धर्म दर्शन एवं ककड़ोलाता दोन धार्मिक कांड का भव्य आयोजन हुआ.
 

Gumla: माघ पंचमी के अवसर पर बढ़ते चांद की तिथि में सिरसी ता नाला में सरना धर्म दर्शन एवं ककड़ोलाता दोन धार्मिक कांड का भव्य आयोजन हुआ. इसमें बंगाल, मध्य प्रदेश, दिल्ली, असम, बिहार छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के सरना धर्मावलंबी शामिल हुए. 

 

कार्यक्रम की शुरुआत सरना प्रार्थना से हुई. राजकीय समारोह के रूप में कार्यक्रम आयोजित हुआ. मुख्य अतिथि कल्याण मंत्री चमरा लिंडा शामिल हुए. गुमला के पाहन पेचा मुंडा ने विधिवत पूजा-अर्चना की.

 

इस मौके पर मुख्य अतिथि चमरा लिंडा ने कहा कि आज का दिन सभी धर्मों को याद करने और आदिवासी पहचान को सशक्त करने का दिन है. उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से आदिवासी समाज की पहचान, विकास और उन्नति के लिए निरंतर सहयोग की अपील की.

 

विधायक जिगा सुसारन होरो ने कहा कि सिरसी ता नाला आदिवासी धरोहर है. इसके साथ ही आदिवासी समाज को अपनी भाषा संस्कृति को बचाने की जरूरत है. इसके साथ ही इन्हें संरक्षित भी रखना सबकी जिम्मेदारी है. इस अवसर पर कई वक्ताओं ने भी संबोधित किया.

 

कहाकि कुड़ुख भाषा उरांव समाज की अमूल्य धरोहर है. सबसे दयालु समाज के रूप में जाना जाता है. इस अवसर पर डीसी गुमला ने कहा कि मानव उरांव जाति का जन्म ही सिरसी ता नाला में हुआ है. उन्होंने कहा कि जब तक उरांव समाज के बच्चे शिक्षित नहीं होंगे, तब तक समाज का पूर्ण उत्थान संभव नहीं है.

 

मौके पर सोमे उरांव, सुधीर उरांव, सुधू भगत, सूकेंद्र उरांव, फूलदेव भगत, कृष्णा उरांव, आकाश भगत, राजमुनी उरांव, बसंती उरांव, बिसनी, सुलेख, नीलम, सुभानी, सीता सहित विभिन्न राज्यों के सरना धर्मावलंबी शामिल हुए.

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