लातेहार
जलापूर्ति योजना के तहत सभी 15 वार्डों में बिछाया गया है अंडरग्राउंड पाइपलाइन
alt="" width="600" height="400" /> ला तेहार नगर पंचायत क्षेत्र में 32 करोड़ रुपये की लागत से शहरी जलापूर्ति योजना का कार्य नगर विकास विभाग की कार्यकारी एजेंसी जुडको के द्वारा कराया गया है. कार्य रॉक ड्रिल कंपनी को आंवटित किया गया था. इसके तहत शहर के पेयजल आपूर्ति विभाग परिसर, दुगिला व डुरूआ में एक-एक जलमीनार बनाये गये हैं. इसके अलावा शहर के सभी 15 वार्डों में अंडरग्राउंड पाइप लाइन बिछाया गया है. लेकिन अंडर ग्राउंड बिछाये गये पाइप लाइन कार्य में काफी अनियमितता बरती गयी है. प्राक्कलन के अनुसार पाइप लाइन को जमीन से कम से कम साढ़े तीन फीट नीचे कराया जाना था और उसके बाद उस पर कंक्रीट करना था. लेकिन कार्यकारी एजेंसी के द्वारा कहीं एक इंच तो कहीं एक फीट जमीन के नीचे पाइप लाइन बिछाई गयी है. आलम यह है कि पाइप लाइन मिट्टी के ऊपर आ गये हैं. सड़क के ऊपर निकली पाइप लाइन इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल खोल रही है. पाइप लाइन सड़क के उपर रहने के कारण आये दिन पाइप लिकेज की समस्या आ रही है. पंचायत के वार्ड पार्षदों ने इस योजना में व्यापक अनियमितता बरतने की शिकायत नगर पंचायत की बोर्ड की बैठक में की थी. शिकायत के बाद नगर विकास विभाग के द्वारा एक जांच कमेटी बनायी गयी थी. जांच कमेटी ने जब लातेहार में आकर जांच की तो वे भी अनियमितता देख कर हैरान हो गये. जांच के क्रम में उन्हें पाईप जमीन से कहीं छह इंच तो कहीं एक फीट नीचे ही मिल गया. बाइपास चौक में जमीन के छह इंच नीचे ही पाइप लाइन मिल गया था. हालांकि जांच के बाद भी कार्य में कोई सुधार नहीं हुआ है. फिलहाल योजना को चालू कर पेयजल आपूर्ति करायी जा रही है. बीते 31 दिसंबर को गिजनियाटांड स्थित पंपू कल का ट्रांसफॉर्मर जल जाने के कारण छह दिनों से शहर में पेयजल आपूर्ति बंद थी. इस दौरान यहां पानी के लिए हाहाकार मच गया था. सातवें दिन रांची से पांच सौ केवी का जेनेरेटर मंगाकर पानी आपूर्ति बहाल की गयी थी. जानकारी के अनुसार दो साल तक योजना का संचालन कंपनी के द्वारा किया जाना है. अभी तक योजना नगर पंचायत को हैंड ओवर नहीं की गयी है.
चांडिल
6711 चापाकलों में 537 हैं खराब मरम्मत करने में लगी है टीम
alt="" width="1280" height="960" /> चांडिल में गर्मी के दस्तक देते ही जल संकट को लेकर जनता के साथ संबंधित अधिकारी इससे निपटने की तैयारियों में जुट गए हैं. लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण डैम व जलाशयों का जलस्तर गिरता जा रहा है. सरकार की ओर से कई जिलों में जलापूर्ति के लिए योजना तैयार की गई है. क्षेत्र में लोगों की प्यास बुझाने के लिए 6711 चापाकल लगाए गए हैं. इनमें से 537 खराब हैं. अनुमंडल के चारों प्रखंड में इनकी मरम्मत के लिए एक-एक टीम लगाई गई हैं. क्षेत्र में कई सोलर जलमीनार लगाए गए हैं, लेकिन उनमें से कई खराब हैं. चांडिल अनुमंडल क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्र में आता है. यहां हर घर नल जल योजना पर भी काम चल रहा है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार अनुमंडल क्षेत्र में 232 चापाकलों को विशेष मरम्मत की जरूरत है. यानि ये चापाकल नहीं बन सकते हैं. इसके स्थान पर दूसरा चापाकल लगाया जाना है. वहीं साधारण मरम्मत के लिए 153 और राइजिंग पाइप सड़ जाने के कारण 152 चापाकल खराब हैं. अनुमंडल क्षेत्र में कई स्थान ड्राई जोन के अंतर्गत आता है. जहां चापाकल लगाने का कोई फायदा नहीं है. ऐसे स्थानों में पाइप लाइन से जलापूर्ति करने का काम किया जा रहा है. चांडिल प्रखंड में कुल 2005 चापाकल लगे हैं. इनमें से 165 खराब हैं. इनमें विशेष मरम्मत के लिए 70, साधारण मरम्मत के लिए 50 और पाइप सड़ने के कारण 45 चापाकल खराब हैं. ईचागढ़ प्रखंड क्षेत्र में कुल 1600 चापाकल लगे हैं. इनमें विशेष मरम्मत के लिए 45, साधारण मरम्मत के लिए 35 और पाइप के लिए 42 चापाकल हैं. नीमडीह प्रखंड के कुल 1601 चापाकलों में विशेष मरम्मत के लिए 72, साधारण मरम्मति के लिए 38 और पाइप के लिए 40 हैं. कुकडू प्रखंड क्षेत्र के कुल 1005 चापाकलों में विशेष मरम्मत के लिए 45, साधारण मरम्मत के लिए 30 और पाइप के लिए 25 चापाकल बंद पड़े हैं. सभी को चालू करने की जरूरत है.
घाटशिला
सूखने लगे जलस्रोत 160 चापाकल खराब
alt="" width="960" height="1280" /> घाटशिला प्रखंड क्षेत्र में पेयजल की समस्या दिन प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है. प्रखंड में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से लगाए गए आधे से अधिक चापाकल खराब पड़े हुए हैं. प्रखंड क्षेत्र में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने 342 चापकल लगाए हैं. इनमें से 182 चापाकल से पानी निकलता है और 160 चापाकल खराब हैं. इनकी मरम्मत भी नहीं हो रही है. कई चापाकल ठीक हैं, लेकिन उसमें भी साफ पानी नहीं निकलता है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि उसमें लोहे का पाइप लगाया गया है. उसमें जंग लग गया है, जिसके कारण लाल पानी निकलता है. ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति तो और भी खराब है. पिछले 5 माह से बारिश नहीं होने के कारण जलस्रोत पूरी तरह सूख गये हैं. इसके कारण जलस्तर नीचे चला गया. ग्रामीण क्षेत्र में लगाए गए सोलर जल मीनार रखरखाव के कारण खराब पड़े हैं. विभाग इस ओर खास ध्यान नहीं दे रहा है, क्योंकि पंचायत से लगा गया सोलर जल मीनार का रखरखाव पंचायत को ही करना था.
जमशेदपुर
चापाकलों की मरम्मत कराने के लिए टास्क फोर्स का गठन हुआ
alt="" width="576" height="1280" /> जमशेदपुर में गर्मी के दिनों में मानगो नगर निगम क्षेत्र में पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए निगम ने तैयारी शुरू कर दी है. निगम द्वारा खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत कराने के लिए टास्क फोर्स बनाया गया है. टास्क फोर्स को निर्धारित समय सीमा में सभी चापाकलों को दुरूस्त करने का निर्देश कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश यादव ने दिया है. वहीं सिटी मैनेजर राहुल कुमार का कहना है कि मानगो नगर निगम क्षेत्र में कुल 230 चापाकल हैं. वर्तमान में सभी चालू हालत में हैं. निगम द्वारा पेयजल संकट से निजात दिलाने के लिए हेल्प लाइन नंबर जारी किए गए हैं, ताकि लोग इस नंबर पर फोन कर शिकायत दर्ज करा सकें. वर्तमान में जहां पानी की समस्या है, वहां टैंकर के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है. वहीं जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) ने खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत की जिम्मेदारी टेंडर निकाल कर एजेंसी को दे दी है. भगवती इंटरप्राइजेज को सालभर चापाकलों की मरम्मत के लिए एजेंसी नियुक्त किया गया है. वहीं मोहरदा जलापूर्ति फेज-2 को लेकर को विशेष पदाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक की गई. इसमें मोहरदा जलापूर्ति फेज-2 का डीपीआर बनाने के लिए कंसलटेंट शीघ्र बहाल करने का निर्णय लिया गया है.
alt="" width="576" height="1280" /> सहायक अभियंता अमित कुमार का कहना है कि जेएनएसी क्षेत्र में कुल 683 चापाकल हैं. वर्तमान में 600 चापाकल चालू हालत में हैं. कुल 12 स्थानों पर जहां पाइप लाइन से जलापूर्ति नहीं हो रही है, वहां टैंकर के माध्यम से नियमित रुप से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है. गर्मी के बढ़ने के साथ ही टैंकरों की संख्या में वृद्धि की जाएगी.
पाकुड़
गर्मी आते ही गिरा जलाशयों का जलस्तर, बढ़ी परेशानी
alt="" width="1156" height="868" /> पाकुड़ जिले में पेयजल की गंभीर समस्या है. पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां हैंडपंप अधिकतर फेल हो जाते हैं. इसे देखते हुए पाकुड़ ग्रामीण क्षेत्र में लिट्टीपाड़ा बहुद्देशीय ग्रामीण जलापूर्ति योजना रघुवर दास सरकार के समय प्रारंभ हुई थी, जो अब तक अधर में लटकी हुई है. इसे 6 फेज में चालू करना है. जिसमें अभी तक दो फेज ही चालू किया गया है. बाकी पर काम जारी है. इसकी जानकारी पेयजल आपूर्ति विभाग के कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार ने दी. वहीं बृहदाकार शहरी जलापूर्ति योजना अधर में है. एक दशक बाद भी काम पूरा नहीं हुआ है. इसकी कुल लागत 40,70,38000 है. शहर की कुल जनसंख्या 67512 व ग्रामीण क्षेत्रों की कुल जनसंख्या 838000 है. बता दें कि पेयजल को लेकर 4 मार्च को डीसी ने समीक्षा बैठक की थी. जिसके तहत आदेश दिया गया है कि जिन क्षेत्रों में खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की दिक्कत है, वहां टैंकर उपलब्ध कराई जाय.
- कुल 128 पंचायतों में शहर को छोड़कर 13157 चापाकल हैं.
- इसमें थोड़ी मरम्मत वाले नलकूपों की संख्या 227 है.
- पाइप बदलकर मरम्मत किए जाने वाले नलकूपों की संख्या 1915 है.
- विशेष मरम्मत वाले चापाकल की संख्या 593 है.
- कुल मरम्मत किये जानेवाले चापाकलों की संख्या 2734 है.
- वर्तमान में चालू चापाकलों की संख्या 10423 है.
- वहीं पाकुड़ शहर क्षेत्र में कुल चापाकलों की संख्या 396 है.
- सीजनेबल चापाकल की संख्या 33 व 52 डीप बोरिंग का है.
- चांदपुर पाकुड़ पेयजला पूर्ति योजना चालू अवस्था में है.
देवघर
पानी की कमी दूर करने के लिए लगाए गए 66 टैंकर
alt="" width="1152" height="711" /> गर्मी ने दस्तक दे दी है. देवघर जिले में जलाशयों और डैमों का जलस्तर नीचे जा रहा है. ऐसे में भीषण गर्मी पड़ने पर पानी की जबरदस्त किल्लत होगी. ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति की स्थिति पर पीएचईडी विभाग के अभियंता संजय प्रसाद ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में चापानलों की कुल संख्या 11369 हैं, जिसमें 1359 नलकूप खराब पड़े हैं. खराब पड़े चापानलों की मरम्मत समय-समय पर की जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत दूर करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति के लिए टैंकर की व्यवस्था नहीं है. ग्रामीण कुएं और अन्य जलस्रोतों से पानी की व्यवस्था करते हैं.
alt="" width="150" height="150" /> देवघर शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था पर पेयजल विभाग के कनीय अभियंता सुमन कुमार वर्मा ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में चापाकल के माध्यम जलापूर्ति की व्यवस्था है. इसके अलावा पानी की किल्लत दूर करने के लिए 66 टैंकरों की व्यवस्था है.
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का आंकड़ा इस प्रकार है :
- जिले के ग्रामीण इलाके में कुल चापानलों की संख्या 11369 है
- खराब चापानलों की संख्या 1359
- विशेष मरम्मत वाले चापानलों की संख्या 451
- चालू चापानलों की संख्या 10010
जिले के शहरी क्षेत्रों की स्थिति
- शहरी क्षेत्र में चापानलों की संख्या 1381
- खराब चापाकलों की संख्या 26
- देवघर नगर निगम क्षेत्र में 49 टैंकरों से जलापूर्ति की हांफ रहे हैंडपंप पानी पहुंच से दूर
- जसीडीह में 17 टैंकरों से जलापूर्ति की व्यवस्था है
चाईबासा
गर्मी की दस्तक के साथ ही जलसंकट शुरू, कई चापाकल खराब
alt="" width="1040" height="780" /> पश्चिमी सिंहभूम जिले में गर्मी ने दस्तक दे दिया है. जिले में जल संकट गहरा गया है. सबसे अधिक असर चाईबासा के ग्रामीण क्षेत्र में होता है. शहरी क्षेत्र में पीएचईडी विभाग सप्लाई का पानी देता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा नहीं है. हालांकि पाइपलाइन बिछाने का कार्य चल रहा है. एक आंकड़े के मुताबिक 16 हजार से अधिक चापाकल पीएचईडी विभाग ने लगाया है. इसमें से दो हजार खराब हो चुके हैं. उनकी मरम्मत की जा रही है. यह चापाकल ग्रामीण क्षेत्र में ही लगाया गया है. वहीं डीप बोरिंग की संख्या तीन हजार के आसपास बतायी जा रही है. अधिकतर डीप बोरिंग संचालित हैं. गांव में पानी की सप्लाई भी हो रही है. क्षेत्र में लगभग 2895 डीप बोरिंग है. इस साल 1200 नई डीप बोरिंग करने योजना है. वहीं जिले में लगभग चार हजार तालाब हैं. लेकिन पानी की समस्या है. वहीं सारंडा के पहाड़ी इलाकों में जल संकट की समस्या ग्रामीणों को डराने लगी है. चापाकलों के जवाब दे जाने के बाद कई गांवों में लोग नाला और चुआं के पानी पर निर्भर हो गए हैं. इससे लोगों को परेशानी हो रही है. ऐसा ही एक मामला सारंडा के जामकुंडिया गांव का है.
alt="" width="150" height="150" /> इस संबंध में मानकी लागुरा देवगम ने कहा कि लागातार चापाकल की मरम्मत कराने के लिए आवेदन दिया जाता है, लेकिन मरम्मत नहीं होती है. कोई इस पर ध्यान नहीं देता है. जबकि यह गंभीर समस्या है. यहां चिरिया माइंस से सप्लाई का पानी मिलता है, लेकिन वह भी सही नहीं होता है. लाल पानी से अब भी लोग परेशान हैं. सरकार से मांग है कि इस व्यवस्था को सुधारा जाये, तभी लोगों को राहत मिलेगी.
साहिबगंज
ग्रामीण क्षेत्रों के 15 हजार चापाकल में से 750 खराब
alt="" width="1556" height="652" /> भी षण गर्मी में पेयजल संकट से निपटने के लिए साहिबगंज जिला पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तैयार है. इस संबंध में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता गोविंद कच्छप ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल चापकलों की संख्या 15 हजार है, जिसमें 750 खराब पड़े हैं. खराब चापाकलों को मरम्मत कर ठीक किया जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य जलस्रोतों को भी दुरुस्त किया जाएगा. ताकि लोगों को जल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा. कहा कि पहाड़ी इलाके के गांवों में काम जल्द शुरू किया जाएगा. वहीं जिले के शहरी जलापूर्ति योजना के बारे में नगर परिषद् के सिटी मैनेजर भवेश यादव ने बताया कि शहरी इलाके में चापाकलों की कुल संख्या 370 है, जिसमें 12 खराब है. खराब चापाकलों को जल्द मरम्मत कर ठीक किया जाएगा.
हर घर नल जल योजना की स्थिति
- उधवा प्रखंड में 30%, पतना प्रखंड में 5% और बरहेट प्रखंड में 5% काम पूरा हो चुका है
- राजमहल, बरहरवा समेत अन्य प्रखंडों में कार्य प्रगति पर है
- 201 गांवों में कुएं और सोलर सिस्टम के जरिए जलापूर्ति के लिए 30 करोड़ रुपए का टेंडर हुआ है
- जल जीवन मिशन के तहत 231 गांवों में जलापूर्ति करनी है
- इसके लिए 212 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया है
- इसके तहत 64 हजार घरों में पानी सप्लाई किया जाएगा.
22 हजार में 12,000 चापाकल हैं खराब, कैसे बुझेगी प्यास
alt="" width="1600" height="720" /> ह र दिन गर्मी बढ़ रही है. आलम यह है कि अभी से चापाकल हांफने लगे हैं. हजारीबाग जिले में 22,000 सरकारी चापाकल हैं. इनमें से लगभग 1200 चापाकल खराब पड़े हुए हैं. ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले दिनों में आम जनता को पेयजल के लिए संघर्ष करना होगा. हजारीबाग के मटवारी, कानी बाजार, दीपू गड़ा मालवीय मार्ग, जादव बाबू चौक, सुजाए मुहला, जेल रोड में चापाकल खराब देखे जा सकते हैं. शहरी इलाके में आए दिन पीएचडी नगर निगम और ग्रामीण इलाकों में मुखिया के पास चापाकल खराब होने की शिकायत मिलती रहती है. इसे देखते हुए हजारीबाग जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम बनाया है. इसके जरिए आम जनता अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है और फिर विभाग चापाकल बनाने की कवायद शुरू करेगा. पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल हजारीबाग के कार्यपालक अभियंता मनोज मुंडारी बताते हैं कि गर्मी आने के पहले ही कैसे समस्या को दूर किया जाए, इसकी रूपरेखा बनाई गई है. जिले में कंट्रोल रूम तो कार्यरत है ही, साथ ही सभी कनीय अभियंता को आदेश दिया गया है कि शिकायत आने के 72 घंटे के अंदर चापाकलों को दुरुस्त कर दिया जाए. वैसे इलाके जहां घनी आबादी है और चापाकल खराब हैं, वहां अविलंब चापाकल दुरुस्त किया जाए. कार्यपालक अभियंता ने बताया कि चापाकलों को ठीक करने के लिए जो टीम बनाई गई है, उसे इस प्रकार तैयार किया जा रहा है कि एक पंचायत से दूसरे पंचायत को जोड़ा जा सके, ताकि अधिक से अधिक एरिया को कवर कर जो चापाकल खराब हैं, उसे दुरुस्त किया जा सके. पदाधिकारियों का यह भी कहना है कि यह राहत की बात है कि हजारीबाग में जल स्तर नीचे नहीं है.
धनबाद :
कोल माइंस एरिया में है पेयजल की समस्या
धनबाद कोयलांचल में कोयला खनिज की अकूत संपदा होने के बाद भी बड़ी आबादी जल संकट का सामना कर रही है. धनबाद शहर में 5 लाख आबादी नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था पर निर्भर है. लेकिन उन्हें भी पिछले सात साल से सिर्फ एक वक्त पानी मिल रहा है. गर्मी में मोटर जलने, पाइप फटने व बिजली बाधित होने के कारण जलापूर्ति ठप हो जाती है. जलाशय में पानी कम होने की समस्या अलग से झेलनी पड़ती है. धनसार, मटकुरिया, कोरंगा बस्ती, लॉ कालेज आदि क्षेत्रों में लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है. सरकारी चापानल जितनी जल्दी बनता है, उतनी ही जल्दी खराब भी हो जाता है. निगम का टैंकर भी कई बार फोन करने के बाद भी नहीं पहुंचता है. कुल मिलाकर लोगों के लिए यह गर्मी संघर्षमय होने वाली है. पानी की किल्लत को लेकर लोग अभी से परेशान हैं. सबसे बुरा हाल कोल माइंस के आसपास बसे लोगों का होता है, जिसमें झरिया, लोदना, उपर कुल्ही, फतेहपुर, भागा, डीगवाडीह, कतरास, बाघमारा, लोयाबाद, केंदुआ, करकेंद, निरसा, मैथन, मुगमा आदि इलाका शामिल है. इन क्षेत्रों में झमाडा और मैथन का पानी पहुंचता है. बोरिंग की सुविधा नहीं है, पानी की दिक्कत आने पर लोग पिट वाटर को भी उबाल कर पीते है. इन क्षेत्रों में जल संकट से निजात दिलाने के लिए वर्ष आठ जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी, जिसमें तीन जलापूर्ति योजना पूरी भी हो चुकी है, लेकिन पानी की समस्या दूर नहीं हो पाई है. झरिया चार नंबर नई दुनिया निवासी विनोद वर्मा ने बताया कि अब दिन प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति व्यवस्था बदतर हो गई है. हफ्तों तक पानी की सप्लाई बंद रहती है. सब काम छोड़कर सुबह से ही कुएं पर लाइन लगाकर पानी भरना पड़ रहा है. आगे भीषण गर्मी है कैसे गुजारा होगा समझ नहीं आ रहा.alt="" width="150" height="150" /> झरिया, फतेहपुर निवासी आरती देवी ने बताया कि अभी गर्मी की शुरुआत भी नही हुई और पेयजल आपूर्ति विभाग ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया. घर मे छोटे बच्चे हैं. बिना पानी कुछ काम नही हो सकता. मोहल्ले मे एक ही कुआं है, जहां बहुत भीड़ रहती है. लेकिन हमारी मजबूरी समझने वाला कोई नहीं है. सावर्जनिक नलों की स्थिति भी सही नहीं. कुल मिलाकर झरिया में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चौपट है. कतरास निवासी विजय झा कहते हैं कि गर्मी के मौसम में कतरास में माडा विभाग के लोग लापरवाह बन जाते हैं. इस वजह से यहां के लोगो को भीषण गर्मी में घोर पेयजल संकट से गुजरना पड़ता है. केशलपुर धान मिल इलाका में माडा का पानी नहीं मिलने से लोग परेशान हैं. जलापूर्ति पाइप की सफाई नहीं होने व जगह-जगह तोड़ दिए जाने से पानी की समस्या उत्पन्न हो रही है.
alt="" width="150" height="150" /> कतरास के सलानपुर में होली से ठीक बीसीसीएल रामकनाली का मेन ट्रांसफार्मर जल जाने से सैकड़ों घरों में अंधेरा पसरा रहा. लोगों को तोपचांची वाटर बोर्ड से पानी की आपूर्ति नियमित रूप से नहीं की गई. सलानपुर के लोग जनप्रतिनिधियों से खफा हैं. गर्मी शुरू भी नहीं हुई तो यह हाल है, गर्मी में क्या होगा, यह सोच कर ही लोग चिंतित हैं. लोग आंदोलन के मूड में हैं. राजेंद्र प्रसाद राजा कहते हैं कि कतरास के झींझी पहाड़ी क्षेत्र में ज्यादातर लोग अपने घरों में कुआं का पानी इस्तेमाल करते हैं, जबकि यहां बगल में कतरी नदी है, जिसका लाभ आसपास के लोगों को मिलता था. लेकिन नदी का अतिक्रमण एवं नदी में ड्रेन का पानी गिराए जाने से नदी मरणासन्न हो गई है. नदी का पानी लोग अपने खेतों में सिचाई के लिए करते थे. पर अब तो लोग खेती भी नहीं कर पर रहे हैं.
alt="" width="150" height="150" /> चुन्ना यादव ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि कतरास पचगढ़ी बाजार एवं कतरास बाजार में वार्ड 1 से 15 तक में नगर निगम द्वारा निर्धारित शुल्क लेकर पानी दिया जाता है. लेकिन जमुनिया नदी गर्मी में सूख जाने के कारण यहां घोर पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती है. गर्मी में यदि कोलियरी खदानों के पिट वाटर की सप्लाई की व्यवस्था की जाए तो लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है. लेकिन बीसीसीएल इसके लिए गंभीर रुख अख्तियार नहीं करता है. निरसा के सज्जाद अंसारी कहते हैं कि निरसा विधानसभा क्षेत्र में गर्मी आते हैं कई गांव में पानी की घोर किल्लत हो जाती है. इसके लिए ग्रामीणों को पेयजल के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. रुद्र गोस्वामी कहते हैं कि मदनपुर पंचायत आमकूड़ा पंचायत, निरसा के भमाल, मदनडीह, जशपुर, सिरपुरिया, तिलतोड़िया, उपचुरिया आदि गांव में पेयजल की घोर किल्लत है. इन ग्रामीण चापाकलों पर निर्भर हैं. [wpse_comments_template]

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