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महिला और पुरुष के बीच समरसता ही मानव विकास का मूल मंत्र : प्रो. शेफाली रॉय

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विभावि राजनीति विज्ञान विभाग में लिंग संवदेनशीलता पर व्याख्यान Hazaribagh : विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के राजनीति विज्ञान विभाग में बुधवार को लिंग संवदेनशीलता पर व्याख्यान का आयोजन किया गया. अपने व्याख्यान में पटना विश्वविद्यालय राजनीति विभाग की प्रोफेसर शेफाली रॉय ने सबसे पहले जेंडर और सेक्स शब्दों के अलग-अलग अर्थ को स्पष्ट किया. फिर उन्होंने दोनों शब्दों के बीच के अंतर को रेखांकित किया. महिला और पुरुष एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं. वे एक-दूसरे की प्रगति के प्रमुख कारक हैं. उन्होंने कहा कि यह जरूर है कि पितृसत्तात्मक और पुरुष प्रधान समाज की व्यवस्था में महिलाएं पिछड़ गई हैं. परंतु अब वक्त तेजी से बदल रहा है और अब महिलाओं को आगे लाने में पुरुष ही अग्रणी भूमिका में दिखाई देते हैं. हमें पुरुष और स्त्री दोनों को उसी रूप में स्वीकार करनी चाहिए. दोनों जैविक दृष्टिकोण से अलग-अलग हैं. परंतु दोनों ईश्वर की सृष्टि हैं. दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. प्रोफेसर शेफाली ने कहा कि महिला और पुरुष के बीच विभेदीकरण का मुख्य कारण दोषपूर्ण समाजीकरण की प्रक्रिया है. विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने महिला और पुरुष के भीतर एक-दूसरे के प्रति श्रद्धा भाव विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने यह भी कहा कि महिला चाहे हवाई जहाज उड़ा रही हो या फिर घर में गृहिणी का कार्य करती हों, दोनों ही को समान रूप से स्वीकृति मिलनी चाहिए. इस अवसर पर पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बीपी सिंह, डॉ. रीता कुमारी, विभागीय प्राध्यापक डॉ. अजय बहादुर सिंह, विभाग के शोधार्थी एवं तृतीय समसत्र के विद्यार्थी उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें : गिरिडीह">https://lagatar.in/giridih-cm-gave-a-gift-of-785-crores-to-the-district-foundation-stone-inauguration-of-228-schemes/">गिरिडीह

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