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हाथरस भगदड़ कांड : भोले बाबा को मिली क्लीन चिट, जांच आयोग ने आयोजकों और पुलिस-प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार

Lucknow :    यूपी के हाथरस में बीते साल 2 जुलाई को सत्संग मे हुए भगदड़ कांड की जांच पूरी हो गयी है. जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. जांच आयोग की रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश किया गया, जिसे सदन में रखने की अनुमति भी मिल गयी है. फिलहाल राज्य सरकार ने रिपोर्ट के तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया है. लेकिन सूत्रों की मानें तो जांच आयोग की रिपोर्ट में भोले बाबा को क्लीन चिट मिल गयी है. सूत्रों के अनुसार, इस भगदड़ के लिए आयोजकों को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है. साथ ही प्रशासन और पुलिस की लापरवाही को भी गंभीर चूक माना गया है.  रिपोर्ट के अनुसार, सत्संग के आयोजकों ने सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया. कार्यक्रम स्थल पर मौजूद भीड़ की संख्या अनुमान से कहीं अधिक थी, लेकिन आयोजकों ने सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किये थे. साथ ही पुलिस ने भी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं निभाया, जिससे भगदड़ मची थी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यदि पुलिस और प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित के लिए व्यापक इंतजाम किये होते,तो इस त्रासदी को रोका जा सकता था.

आयोग ने भविष्य के लिए दिये सुझाव : 

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो, इसके लिए कई अहम सुझाव भी दिये हैं.
  1. पुलिस निरीक्षण : बड़े कार्यक्रमों से पहले पुलिस अधिकारियों का स्थल का व्यक्तिगत निरीक्षण अनिवार्य किया जाये.
  2. अनुमति की शर्तों का पालन : आयोजकों द्वारा ली गयी अनुमति की शर्तों को कड़ाई से लागू किया जाये और उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाये.
  3. क्राउड कंट्रोल : आयोजनों में विशेष क्राउड कंट्रोल उपायों को लागू किया जाये, ताकि भगदड़ जैसी घटनाओं से बचा जा सके.

भगदड़ में 121श्रद्धालुओं की हुई थी मौत

बता दें कि उत्तर प्रदेश के हाथरस के फुलवाई गांव में 2 जुलाई 2024 को भोलेबाबा के सत्संग के दौरान भगदड़ मची थी. इस भगदड़ में 121 श्रद्धालुओं की मौत हो गयी थी. वहीं 30 से अधिक लोग घायल हुए थे. अधिकारियों के मुताबिक, आयोजकों ने सत्संग में 80,000 श्रद्धालुओं के शामिल होने की अनुमति मांगी थी. इसी के हिसाब से कार्यक्रम स्थल पर प्रशासन ने इंतजाम किये थे. लेकिन सत्संग में ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु आये थे. आयोजकों ने पुलिस से श्रद्धालुओं की संख्या को छिपाया. हादसे के बाद राज्य सरकार ने इसकी जांच के लिए हाई कोर्ट के रिटायर जज बृजेश कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था. आयोग में रिटायर आईपीएस भावेश कुमार सिंह और रिटायर आईएएस हेमंत राव को सदस्य बनाया गया था.  

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