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हजारीबाग - साहेब ! आपको नींद आयी थी रविवार की रात

हजारीबाग के चुरचू में रविवार की रात अवैध कोयला लदे ट्रक की चपेट में आने से दो युवकों की दर्दनाक मौत की घटना ने 1961 में एक मुकदमे के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद नारायण मुल्ला की एक टिप्पणी को ताजा कर दिया है. टिप्पणी थी - ‘मैं जिम्मेदारी के साथ कहता हूं, पूरे देश में एक भी कानून-विहीन समूह नहीं है जिसका अपराध का रिकॉर्ड अपराधियों के संगठित गिरोह भारतीय पुलिस बल की तुलना में कहीं ठहरता हो.’ इस टिप्पणी ने सामाजिक-राजनीतिक हलकों में बेचैनी पैदा कर दी थी. अब तो किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता.
 
दुर्घटना के बाद जुटे लोग और दुर्घटनाग्रस्त ट्रक.

हजारीबाग के चुरचू में रविवार की रात अवैध कोयला लदे ट्रक की चपेट में आने से दो युवकों की दर्दनाक मौत की घटना ने 1961 में एक मुकदमे के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद नारायण मुल्ला की एक टिप्पणी को ताजा कर दिया है. टिप्पणी थी - ‘मैं जिम्मेदारी के साथ कहता हूं, पूरे देश में एक भी कानून-विहीन समूह नहीं है, जिसका अपराध का रिकॉर्ड अपराधियों के संगठित गिरोह भारतीय पुलिस बल की तुलना में कहीं ठहरता हो.’ इस टिप्पणी ने सामाजिक-राजनीतिक हलकों में बेचैनी पैदा कर दी थी. अब तो किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता.

 

एक पुलिसवाले ने एफआईआर के समय और रिकॉर्ड में हेरफेर किया था, जिस पर जस्टिस मुल्ला का ये गुस्सा फूटा था. उन्होंने यूपी पुलिस को ‘Augean stable’ यानी ‘गंदगी से भरा अस्तबल’ तक कह दिया था. बाद में उत्तर प्रदेश सरकार इन टिप्पणियों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जिसने माना कि इतनी ‘व्यापक टिप्पणी’ के लिए पर्याप्त रिकॉर्ड मौजूद नहीं था और उसने इन टिप्पणियों को फैसले से हटवा दिया. 

 

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बोदरा गांव के पास अवैध कोयला लदे ट्रक की चपेट में आने वाले आकाश हांसदा का शव.

 

यह ऊपर में जो डेड बॉडी (मृत शरीर) जमीन पर पड़ा है, रविवार की शाम साढ़े छह बजे से पहले तक जिंदा था. वह आकाश हांसदा था. उसकी उम्र 28 साल थी. वह सोहराय हांसदा का बेटा था. पेशे से राज मिस्त्री था. उसी की कमाई पर उसकी पत्नी, दो पुत्र व एक पुत्री का जीवन चल रहा था. रविवार की रात वह खत्म हो गया. उसके साथ ही वो सपने, वो उम्मीदें, सब खत्म हो गए, जो उसके परिवार ने पाल रखे थे. 

 

राजेंद्र के साथ ही खत्म हो गया उसका दोस्त राजेंद्र बास्के. दुर्घटना से चंद सेकेंड पहले ही तो वह दोनों अपने एक परिचित के श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होकर लौट रहे थे. दोनों को किसने खत्म कर दिया. कह सकते हैं अवैध कोयला लदे ट्रक की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई. पुलिस के रिकॉर्ड में यह सिर्फ दुर्घटना हो सकती है. दोनों की मौत एक नंबर. पंचनामा, पोस्टमार्टम और कुछ मुआवजा की रस्में. दुर्घटनाओं में मौतें होती है. कोई नई बात नहीं है. पर, यह जो हुआ है, उसमें पुलिस का सिस्टम शामिल है.

 

पर यह सच नहीं है. सच यह है कि हजारीबाग पुलिस को चला रहे कबीर और उसके आका के पैसे की भूख ने दोनों की हत्या कर दी. जिस ट्रक ने दोनों को चपेट में लिया, उस पर अवैध कोयला लदा था. संभव है आगे चलकर अवैध कोयला वैध बना दिया जाये. पर चुरचू के बोदरा गांव के लोग सच जानते हैं. वह जानते हैं कि उन्हें ऐसे ही मरना है. कोयला माफिया और पुलिस गंठजोड़ के सामने वह कीड़े-मकोड़े हैं.

 

दुर्घटना के बाद बोदरा गांव में चुरचू थाना की पुलिस पहुंची थी. लोगों में आक्रोश था. सब पुलिस से सवाल कर रहे थे. पुलिस शर्मशार थी. लेकिन क्या उन पर भी इसका असर पड़ेगा, जिन्होंने अवैध कोयला शुरू करने की हामी भर दी. क्या वह कभी इस बात को समझ पाएंगे, उनकी अकूत संपत्ति अर्जित करने की भूख ने दो लोगों की जान ले ली. उनके परिवार का भरण-पोषण छीन लिया. 

 

हजारीबाग के साहेब, जिनके इशारे पर कबीर काम करता है और कबीर के इशारे पर कोयला माफिया व पुलिस से बस एक ही सवाल है- क्या रविवार की रात आपको नींद आयी थी! आपका सोमवार की सुबह पहले जैसा ही रहा? पद, कुर्सी, पावर, सुरक्षा घेरा, जी हुजूरी करने वालों की फौज ने आपको इन सबसे परे पहुंचा दिया है.

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