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हजारीबाग: 6 पीढ़ियों से अंतू का परिवार बना रहा ताजिया, गंगा-जमुनी तहजीब की झलक

Gaurav Prakash Hazaribagh: तू हिन्दू बनेगा, न मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा…हजारीबाग के कटकमसांडी स्थित जलमा निवासी अंतू साव अपने बच्चों को यही तालीम देते हैं. जाति, धर्म, संप्रदाय की नफरत से कहीं दूर यहां छह पीढ़ियों से अंतू साव का परिवार ताजिया बना रहा है. हजारीबाग में हसन-हुसैन की शहादत का मातमी त्योहार मुहर्रम का महीना आते ही अंतू साव की तजिया का जिक्र होना शुरू हो जाता है. हजारीबाग शहर व आसपास के क्षेत्रों में सदैव कौमी एकता के साथ मुहर्रम मनाने का रिवाज रहा है. इस दौरान अंतू साव और उनकी छह पीढ़ी गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कायम करती है. यहां मुहर्रम का जब ताजिया निकलता है, तो सबसे पहले उनके ही घर के सामने फातिहा पढ़ा जाता है. अंतु साव के ताजिया के पीछे-पीछे पूरे गांव का ताजिया निकलता है. अंतु के परिवार वाले मिलकर ताजिया बनाते हैं. यह ताजिया गांव में घूमने के बाद कर्बला तक पहुंचता है. अंतु साव कहते हैं कि उनका गांव पूरे देश को आपसी एकता का पाठ पढ़ाता है. उनका ताजिया आपसी भाईचारा और प्रेम का संदेश है. छह पीढ़ियों से वे लोग ताजिया बना रहे हैं. अब उनके बच्चे ताजिया बनाना सीख रहे हैं. वे लोग सिर्फ ताजिया बनाते ही नहीं हैं, बल्कि मुहर्रम के मौके पर ताजिया मिलान में मुसलमान भाइयों के संग शरीक भी होते हैं. अंतू साव के तीन बेटे अनिल साव, रंजीत साव और राजू साव और पोता आर्यन भी ताजिया बनाना सीख रहा है. वर्तमान में उनकी उम्र 66 साल है. ताजिया निकालने को लेकर उत्साह में कमी नहीं है.

अंतू साव का परिवार 150 साल से बना रहा ताजिया 

कटकमसांडी के जलमा गांव के अंतू साव का परिवार डेढ़ सौ साल से ताजिया बना रहा है. ताजिया बनाने में मनोहर, सुधीर, शंकर, अंतू और जलेश्वर का अहम योदगान रहता है. वहीं रामावतार साहू जो ताजिया बनाने में काफी मशहूर थे, वह अब इस दुनिया में नहीं हैं. अंतू साव बताते हैं कि उनके पास तीन बड़े-बड़े गगनचुंबी निशान (झंडे) भी हैं. पहला झंडा उन्होंने 1980, दूसरा 2010 और तीसरा 2015 में खरीदा था. कहते हैं कि चांद देखने के बाद उनलोगों का परिवार खुदा की इबादत करता है. इमामबाड़ा में जाकर परिवार के लोग अगरबत्ती जलाते हैं. यह सिर्फ ताजिया नहीं है, बल्कि मुसलमान भाइयों के प्रति उनके प्यार मोहब्बत का प्रतीक है.

धर्म नफरत की इजाजत नहीं देता - अंतू 

अंतू साव कहते हैं कि 150 वर्ष से दोनों समुदाय के लोगों की परंपरा आपसी सौहार्द के साथ निभती आ रही है. मुहर्रम में उनका बनाया ताजिया मुस्लिम भाई उठाते हैं और उनके घर के लोग झंडा. वहीं रामनवमी में मुस्लिम परिवार के लोग महावीरी ध्वज अपने हाथों में थामते हैं. जय बजरंग बली, जय श्रीराम के गगनभेदी नारों के संग अखाड़े में कला-कौशल का भरपूर प्रदर्शन करते हैं. अंतू साव कहते हैं कि कोई भी धर्म नफरत की इजाजत नहीं देता. जात दो ही है एक मर्द और दूसरी महिला. जात-धर्म जन्म लेने के बाद लोग बनाते हैं. सभी लोगों को आपस में एकता और प्यार बना कर रखना चाहिए. तजिया बनाने वाले शंकर बताते हैं कि वे लोग मिलकर आठ दिनों तक ताजिया बनाते हैं. नौवीं और 10वीं को ताजिया का जुलूस निकलता है. यह 10 दिन उनके घर का पर्व होता है. इसे हर कोई मिलजुलकर मनाता है. इसे भी पढ़ें- उपराष्ट्रपति">https://lagatar.in/many-leaders-including-pm-modi-congratulated-jagdeep-dhankhar-on-being-elected-vice-president/">उपराष्ट्रपति

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