Hazaribagh: भारतीय प्रजातांत्रिक मंच के तत्वावधान में गुरुवार को मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती मनाई गई. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष बाबर अंसारी ने किया. इस अवसर पर मंच के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मौलाना आजाद अरबी-फारसी के विद्वान थे. वे स्वाधीनता संग्राम में सदी के प्रारंभ में ही कूद पड़े थे. प्रथम और द्वितीय दोनों विश्वयुद्धों के काल में कारावास भुगतने वाले संभवत: वे एकमात्र नेता थे. स्वराज के लिए आंदोलन में वे सदा अग्रणी रहे. वहीं, मंच के संरक्षक जहांगीर अंसारी ने कहा कि मौलाना आजाद ने द्विराष्ट्र सिद्धांत को कभी स्वीकार नहीं किया. अध्यक्ष बाबर अंसारी ने कहा कि मौलाना आजाद को देश के प्रति गहरा लगाव था. उन्हीं के कारण देश के विभाजन के बाद लाखों मुस्लिमों की आस्था देश के प्रति गहरी रही. मदीना मुफ्ति के पौत्र मुस्लिमों को संगठित कर देश के राष्ट्रीय प्रवाह को कायम रखने में सफल रहे. इसे भी पढ़ें-रामगढ़">https://lagatar.in/ramgarh-4-members-of-robbery-gang-arrested/">रामगढ़
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