- दो चहेते बंदियों को दी संचालन की जिम्मेवारी, हर दिन होती है मोटी कमाई
- जेल में दिया जाता है घटिया दाल-भात, खाना भी मिलता है लेट, कैदी बासी रोटी से भरते हैं पेट
- कैंटीन से महंगे दाम पर खरीद कर खाने को मजबूर हैं कैदी
Hazaribagh : हजारीबाग जेपी केंद्रीय कारा में अवैध तरीके से कैंटीन का संचालन किया जा रहा है. कैंटीन की रोज की आमदनी लगभग 22-25 हजार रुपये बतायी जाती है. लेकिन इस कैंटीन में बनने वाले व्यंजन की लागत, खर्च और बचत का कोई ऑडिट नहीं कराया जाता है. बताया जाता है कि जेल अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने अपने दो चहेते बंदियों को कैंटीन चलाने की जिम्मेवारी सौंप रखी है. जेल के मेस से कैदियों को जो भोजन दिया जाता है, उसकी गुणवत्ता बेहद घटिया होती है. कैदी उसे खा ही नहीं पाते. यहां तक कि बासी रोटी से ही बंदियों को पेट भरने की मजबूरी होती है. बासी रोटी खाकर भी चुप्पी साधे रहते हैं. क्योंकि घटिया खाना परोसने पर आवाज उठाते हैं, तो उन्हें जेल में तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता है. जेल में सजा काट कर लौट कैदी बताते हैं कि जेल में दाल इतनी पतली रहती है कि उसे देखकर ही कोई भी बता देगा कि दाल में पानी नहीं, पानी में दाल मिलाया गया है. चावल की क्वालिटी भी बेहद खराब होती है और सड़ी-गली सब्जियां परोसी जाती हैं. जेल से सजा काटकर लौटे कुछ बंदी बताते हैं कि कैदियों को घटिया भोजन छोड़ मजबूरी में कैंटीन की ओर रूख करना पड़ता है.
कैंटीन में भी लूट की छूट है
जेल का खाना घटिया होने के कारण बंदियों को कैंटीन का खाना खाने की मजबूरी होती है. जेल में बंद गरीब तबके के कैदी तो मजबूरी में जैसा भोजन मिलता है, उसी से पेट भरते हैं. लेकिन जो कैदी थोड़ा सक्षम होते हैं, वे कैंटीन का खाना खाते हैं. लेकिन वहां भी उन्हें महंगा खाना मिलता है. पांच रुपये का समोसा बाजार भाव से अधिक कीमत पर सात से आठ रुपये में दिया जाता है. कैंटीन में चाउमीन, चिकेन, पनीर आइटम की कीमत भी ज्यादा वसूली जाती है. यहां तक कि जो साबुन बाजार में सात रुपये में मिलता है, जेल में उसे 10 से 12 रुपये में दिया जाता है. कैंटीन में हर प्रकार के खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा की जरूरत के अन्य सामान उपलब्ध रहते हैं. बंदियों के पास वहां से खरीदारी करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता है. मेस में जान-बूझकर खराब खाना परोसा जाता है, ताकि बंदियों को कैंटीन में भोजन करने की मजबूरी रहे. कभी-कभी तो बंदियों को मेस में इतना लेट भोजन दिया जाता है कि मजबूरन भूखे बंदी कैंटीन का रुख कर लेते हैं.
जेलर खामोश,जेल अधीक्षक ने भी चुप्पी साधी
जेल में भोजन की खराब व्यवस्था और गलत तरीके से कैंटीन संचालन के संबंध में जानकारी लेने के लिए जब जेल अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर और जेलर बबलू यादव को पक्ष फोन लगाया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. शुभम संदेश संवाददाता सोमवार को कई दफा जेल के जिम्मेवार दोनों अफसरों से फोन पर बातचीत करने की कोशिश की, लगातार फोन रिंग होता रहा, लेकिन दोनों ने फोन उठाना उचित नहीं समझा. वैसे जेल में व्याप्त अव्यवस्था से संबंधित सवालों पर यदि जेल अधीक्षक व जेलर कोई पक्ष देते हैं, तो उनका पक्ष भी हम प्राथमिकता से छापेंगे. [wpse_comments_template]
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