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हजारीबाग: राज्य में टूट रहा शतरंज का दम, खिलाड़ियों का उत्साह हो रहा कम

Gaurav Prakash Hazaribagh: राज्य के शतरंज खिलाड़ियों में अब उत्साह और उमंग की कमी हो रही है. हजारीबाग में पिछले दिनों राज्य स्तरीय अटल स्मृति शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था. वहां राज्य के कई जिलों से शतरंज खिलाड़ी हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे. उन खिलाड़ियों ने अपना दर्द शुभम संदेश के साथ बांटते हुए कहा कि झारखंड में इस खेल का दम घोट दिया जा रहा है. आलम यह है कि राजधानी रांची में भी पिछले कई सालों से खेल का आयोजन नहीं किया गया है. कहा कि रांची ही नहीं धनबाद और जमशेदपुर में भी शतरंज खेल का प्रतियोगिता नहीं की गई है. इस कारण खिलाड़ियों में अब उत्साह की कमी हो रही है. खिलाड़ियों का यह भी कहना है कि पिछले कई सालों से संघ का चुनाव भी नहीं हुआ है. इस कारण पदाधिकारी वर्षों से पद पर आसीन हैं. वर्तमान में प्रदीप वर्मा झारखंड शतरंज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट हैं. वही नीरज कुमार सेक्रेटरी हैं. राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी कहते हैं कि जो भी व्यक्ति पद लेता है, वह पद लेकर सिर्फ बैठ जाता है. इस खेल को बढ़ाने के लिए कोई प्रयत्न नहीं किया जाता है. स्टेट चैंपियन अंडर-8 उम्र के ऋषि राज जो रांची के रहने वाले हैं. उनके पिता राकेश का कहना है कि उनके बेटे को शतरंज खेलने का शौक है. वह उसे कोचिंग करवा रहे हैं. वर्तमान समय में एक क्लास में 500 खर्च भी हो रहा है. लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि राजधानी रांची में भी खेल का आयोजन नहीं हुआ. अगर खेल का आयोजन होता, तो खिलाड़ियों को फायदा होता. खिलाड़ियों को एक प्लेटफॉर्म भी मिलता. नाम नहीं छापने की शर्त पर राष्ट्रीय खिलाड़ी बताते हैं कि नासिक में आठ माह पूर्व नेशनल शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन हुआ था. प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए भत्ता भी मिलता है. राज्य से चार खिलाड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए गए, लेकिन उन्हें आज तक भत्ता नहीं मिला. खिलाड़ी यह भी कहते हैं कि 100 रुपए रजिस्ट्रेशन लेने का काम संघ करता है. लेकिन उस 100 रुपए का इस्तेमाल कहां किया जाता है, इसकी जानकारी खिलाड़ियों के पास भी नहीं है. अगर पैसा से छोटा आयोजन भी होता तो खिलाड़ियों को लाभ मिलता है. इसे भी पढ़ें- CM">https://lagatar.in/fake-twitter-account-created-in-the-name-of-kalpana-soren-wife-of-cm-hemant-soren-complaint-filed/">CM

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शतरंज का इतिहास सदियों पुराना है. भले ही यह खेल आज दुनिया भर में लोकप्रिय हो चुका है, लेकिन इसका जन्म भारत में ही हुआ है.1988 में विश्वनाथ आनंद देश के पहले ग्रैंडमास्टर बने थे. उसके बाद से वे पांच बार विश्व चैंपियन भी रहे. लेकिन वर्तमान स्थिति में जो स्थिति बनती दिख रही है, ऐसे में दूसरा चैंपियन कैसे बनेगा. इसे भी पढ़ें- CBI">https://lagatar.in/cbi-hands-over-documents-to-ed-sisodia-will-be-booked-in-money-laundering-case-kejriwal-said-every-morning-starts-the-game-of-cbi-ed/">CBI

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