जलछाजन से बनाया गया था डोभा और मनरेगा योजना बताकर निकाले गए पैसे Suraj Kumar Chouparan : हजारीबाग के चौपारण प्रखंड स्थित सिंघरावां पंचायत अंतर्गत हजारीधमना में डोभा के नाम पर करीब 25 लाख रुपए की निकासी कर ली गई. स्थल जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि डोभा कहीं बना ही नहीं. मनरेगा योजना के तहत मेढ़बंदी, डोभा और समतलीकरण में पैसे खर्च दिखाए गए. वास्तव में यह काम जलछाजन से कराया गया था. इस आशय की शिकायत मनरेगा आयुक्त और डीसी से भी की जा चुकी है. इसमें लगभग एक लाख रुपए की रिकवरी भी की गई थी. यह योजना वर्ष 2019-20 और 2020-21 की बताई गई है. इस मामले में शिकायतकर्ता के आवेदन के आलोक में डीसी के निर्देश पर डीडीसी प्रेरणा दीक्षित ने मनरेगा योजना की जांच के लिए बरही एसडीओ के नेतृत्व में जांच टीम का गठन किया. इसमें एक्सक्यूटिव मजिस्ट्रेट दीपा खलखो, जिला कृषि पदाधिकारी हजारीबाग, कार्यपालक अभियंता स्पेशल डिवीजन, बीपीओ राजेश कुमार, संतोष कुमार, एई पंकज कुमार, जेई जियाउल हक और रोजगार सेवक रामचंद्र दांगी को रखा गया है. दो दिन पहले टीम ने हजारीधमना में डोभे की जांच की. शिकायतकर्ता विनोद सिंह ने बताया कि करीब आधा दर्जन डोभा जलछाजन से बनाया गया था और मनरेगा योजना बताकर राशि की निकासी की गई. उन्होंने बताया कि कई डोभा धरातल पर आज भी नहीं हैं. अधिकारियों से उन्होंने पुनः जांच की मांग की है.
मेढ़बंदी की जगह हुआ मिट्टी मोरम पथ का काम
हजारीधमना के विनोद सिंह, पिंटू सिंह, रंजीत सिंह, रामलखन सिंह, विकास सिंह समेत कई ग्रामीणों ने जांच टीम को बताया कि मेढ़बंदी के नाम पर भी पैसे निकाले गए. स्थल पर मेढ़बंदी की जगह मिट्टी मोरम पथ कर दिया गया. तीन लाख 78 हजार 340 रुपए के विरुद्ध तीन लाख 36 हजार 362 रुपए का ही काम कराया गया. हालांकि मनरेगा मजदूर गुरुदेव भुइयां, राजेंद्र भुइयां, गांदो भुइयां और सुनील भुइयां का कहना है कि उन्होंने मेढ़बंदी का कार्य किया. इसी तरह अन्य जगहों पर भी लापरवाही की बात सामने आयी है.
फिर होगी मनरेगा योजना की जांच : एसडीओ
इस संबंध में बरही अनुमंडल पदाधिकारी पूनम कुजूर ने बताया कि मनरेगा योजना की पुनः जांच की जाएगी. इसमें अनियमितताओं की बात ग्रामीण कर रहे हैं. ऐसे में छानबीन के बाद तथ्यों का पता चल पाएगा.
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