न धान की फसल होगी, ना ही चारा
इचाक हदारी के पशुपालक रामेश्वर राम कहते हैं कि अगर फसलें नहीं हुईं, तो पशुओं के लिए चारा कहां से आएगा. अभी से ही चारा का संकट दिखने लगा है. अधिक कीमत पर लेकर धान का बीज बोया, तो वर्षा ने दगा दे दिया. अब न तो धान की फसल होगी और न मवेशियों को चारा नसीब हो पाएगा. तिलरा के किसान व पशुपालक मोहन राणा कहते हैं कि मॉनसून ने उनकी कमर तोड़ दी. उधार लेकर खेतों में बिचड़ा छींटा था, अब तक धान के पौधे ही नहीं हुए. आगे मवेशियों को क्या खिलाएंगे. उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है. मौसम की दोहरी मार से उनका पूरा परिवार बेहाल है. धान की बेहतर पैदावार से उम्मीद रहती है कि कर्ज भी टूट जाएगा और मवेशियों के लिए चारे भी उपलब्ध हो जाएंगे. लेकिन इस बार कुछ नहीं हो पाया. इसे भी पढ़ें-एनआईए">https://lagatar.in/nia-and-jharkhand-polices-most-wanted-15-lakh-reward-naxalite-aman-ganjhu-arrested/">एनआईएऔर झारखंड पुलिस का मोस्ट वांटेड 15 लाख का इनामी नक्सली अमन गंझू गिरफ्तार

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