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हजारीबाग : जैन दर्शन में जीने की कला का उत्कृष्ट वर्णन : निर्वेग सागर

Hazaribagh : हजारीबाग के बड़ा बाजार दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को अभिषेक शांतिधारा का कार्यक्रम हुआ. यह कार्यक्रम मुनि श्री 108 निर्वेगसागरजी महाराज, शीतलसागरजी महाराज और ऐलक श्री 108 निजानंदसागरजी महाराज संसघ के सानिध्य में किया गया. मंगल प्रवचन में निर्वेग सागर जी महाराज ने कहा कि जैन दर्शन में जीने की कला का उत्कृष्ट वर्णन है. मानव जीवन को सफल बनाने के लिए व्यक्ति निरंतर पुरुषार्थ के प्रति आकर्षित रहा है. जो जीवन जीने की कला सिखाती है. एक वक्त के बाद मृत्यु महोत्सव को अंगीकार करना होता है. संध्या में गुरु भक्ति, बच्चों की पाठशाला, महाआरती और भजन का कार्यक्रम हुआ. इससे पहले मंगलाचरण नीरज पाटोदी और संचालन विजय लुहाड़िया ने किया. इसे भी पढ़ें: हजारीबाग">https://lagatar.in/hazaribagh-dc-reviewed-agriculture-animal-husbandry-and-fisheries-department/">हजारीबाग

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