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हजारीबाग: मुआवजे की राशि के लिए सास-बहू में लड़ाई, नहीं बन रहा मृत्यु प्रमाण पत्र

Hazaribagh: हजारीबाग के इचाक में पति और बेटे के हक की ऐसी लड़ाई सामने आयी है, जिससे मृतक का प्रमाण पत्र बनने में मुश्किल हो रही है. पत्नी का कहना है कि ससुराल वालों के दबाव में पति का मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है. वहीं मां का कहना है कि बेटा उनका है, तो मृत्यु प्रमाण पत्र पर पहला अधिकार उनका है. इस मामले में पंचायत भी बैठी, पर सटीक फैसला नहीं हो पाया. इससे मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र पिछले 16 माह से नहीं बन पाया है. हालांकि इसका खामियाजा मृतक की पत्नी और डेढ़ वर्ष की मासूम बच्ची को भुगतना पड़ रहा है.

पति की मौत वज्रपात से हो गई थी

मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनने से आपदा प्रबंधन से मुआवजा, इंश्योरेंस और विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है. पिछले 16 माह से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए गुहार लगाकर थक चुके हैं. यह पीड़ा बयां करती है इचाक स्थित डुमरौन की महिला रानी कुमारी. उसके गोद में डेढ़ साल की एक बेटी भी है. पीड़िता ने बताया कि वर्ष 2021 में उसके पति बबलू कुमार मेहता की मौत वज्रपात से हो गई थी. उसके बाद ससुराल वालों ने उसका वहां रहना मुश्किल कर दिया. वह बेटी को लेकर मायके बरकाखुर्द आ गई. अब पाई-पाई के लिए मोहताज है. बेटी के लालन-पालन के लिए भी पैसे नहीं हैं. वह कहती है कि हालात नहीं सुधरे, तो ऐसे में बेटी के साथ वह प्राण त्याग देगी. इस मामले में न मुखिया मदद कर रहा और न वार्ड सदस्य. महिला ने बताया कि उसके पति ने दो एलआईसी कराया था. इसमें कुल 15 लाख का भुगतान होना है. वहीं आपदा प्रबंधन से करीब चार लाख का मुआवजा मिलेगा. इन्हीं पैसों के लिए ससुराल वाले मुखिया और वार्ड सदस्य पर दबाव बना रहें हैं कि मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में सहयोग नहीं करें. वह खुद मृत्यु प्रमाण बनवाकर रकम लेना चाहते हैं. पीड़िता ने यह भी कहा कि उसके पति ने महाजन से कुछ कर्ज लिया था, जिसे चुकता करना उसकी जिम्मेवारी है. महाजन भी तगादा करने लगा है. अब वही पैसा उसका और उसकी बच्ची का सहारा है.

बेटे ने लिया था कर्ज, चुकता करना है : यशोदा देवी

इस संबंध में पीड़िता रानी देवी की सास यशोदा देवी ने बताया कि बबलू उनका बेटा था. उस पर पहला हक उन्हीं का बनता है. बेटे की मौत के एक माह बाद बहू ससुराल छोड़कर मायके चली गई. मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए गांव में कई बार पंचायत भी की गई. उसके बाद भी उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का हक नहीं दिया जा रहा है. बेटे ने कर्ज लिया था, उसे महाजन को चुकता करना है.

पति की मौत के बाद मुआवजे पर पहला अधिकार पत्नी का : बीडीओ

इस संबंध में इचाक प्रखंड की बीडीओ रिंकू कुमारी ने कहा कि पति की मौत के बाद मुआवजे पर पत्नी का पहला अधिकार होता है. उसे ही मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का हक भी है. उनके कार्यालय में बबलू मेहता के मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने संबंधी कोई आवेदन नहीं आया है. आवेदन मिलने पर तत्काल मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत किया जाएगा. वहीं डुमरौन के मुखिया चोहन महतो ने बताया कि यह पूर्व मुखिया के कार्यकाल का मामला है. इस मामले में कई बार पंचायत भी हुई. सास-बहू के पारिवारिक विवाद की वजह से बबलू मेहता का मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है. मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की पहली जिम्मेवारी वार्ड सदस्य की है. इसे भी पढ़ें–  मोदी">https://lagatar.in/subramanian-swamy-lashed-out-at-modi-government-over-ram-setu-said-not-a-single-affidavit-in-8-years/">मोदी

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