Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

हजारीबागः वन भूमि पर अवैध कब्जे के अपने ही दावे से मुकरा वन विभाग

LAGATAR EXPOSE

Ranchi: वन विभाग, वनभूमि पर अवैध कब्जा के अपने ही दावे से मुकर गया है. हजारीबाग के वन प्रमंडल पदाधिकारी (पश्चिमी) ने 2019 में उपायुक्त को पत्र लिख कर 137 एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जा करने की शिकायत और कार्रवाई करने की मांग की थी. उपायुक्त के आदेश पर जिला अवर निबंधक ने 2003 सेल डीड के सहारे 6391 एकड़ वन भूमि की खरीद फरोख्त से संबंधित रिपोर्ट सौंपी. उपायुक्त ने कानूनी प्रक्रिया अपनाने हुए रजिस्ट्री रद्द करने का आदेश दिया. कार्रवाई में सुस्ती आने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई. सुनवाई के दौरान वन प्रमंडल पदाधिकारी (पश्चिमी) ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की. इसमें सिर्फ 11.49 एकड़ ज़मीन पर ही अतिक्रमण की बात स्वीकार की है.

 

जानकारी के मुताबिक DFO के पत्र के आलोक में अवर निबंधक से मिली रिपोर्ट के आधार पर हजारीबाग के तत्कालीन उपायुक्त ने कार्यवाही शुरू की थी. फिर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया. जमीन के दस्तावेज मांगे गये. नोटिस के जवाब में कुछ लोग हाजिर हुए. लेकिन ज़मीन पर अपने दावे से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं पेश कर सके. कुछ अपना पक्ष पेश करने उपायुक्त की अदालत में हाजिर ही नहीं हुए. 

 

इसके बाद तत्कालीन उपायुक्त ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए वन भूमि की अवैध खरीद बिक्री से संबंधित सेल डीड रद्द करने का आदेश दिया. जमीन की इस खरीद बिक्री मे बड़े और प्रभावशाली लोगों के भी शामिल होने की वजह से उपायुक्त के तबादले के बाद सेल डीड रद्द करने से संबंधित कार्यवाही बंद हो गयी. इसके बाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर मामले में दोषी लोगों पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया. कोर्ट ने उपायुक्त द्वारा खरीद बिक्री से संबंधित सेल डीड का ब्योरा हजारीबाग वन प्रमंडल पश्चिमी को सौंपा. साथ ही अपना पक्ष पेश करने का निर्देश दिया.

 

न्यायालय के निर्देश के बाद  DFO पश्चिमी की ओर से 2025 में हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसमें यह कहा गया कि पूरे मामले की जांच और समीक्षा के बाद सिर्फ 11.49 एकड़ वन भूमि पर ही अवैध कब्जे का मामला पाया गया है. DFO की ओर से सौपी गयी रिपोर्ट में कहा गया कि पूरे मामले की समीक्षा के दौरान पाया गया कि सिर्फ 74 सेल डीडी में शामिल 112.30 एकड़ जमीन में से कुछ जमीन वन भूमि की सीमा के अंदर और कुछ वन भूमि की सीमा के बाहर पाया गया है. 

 

इन 74 सेल डीड में शामिल कुल जमीन में से 91.52 एकड़ ज़मीन ही अधिसूचित वन क्षेत्र की सीमा के अंदर है. इसमें से 80.03 एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण नहीं है. 80.30 एकड़ वन भूमि जमीन वन विभाग के शांतिपूर्ण कब्जे में है. इसमें से कुछ मामले में सिविल सूट चल रहा है. जिनके साथ सिविल सूट चल रहा है उसमें संजय कुमार प्रजापति, मालती देवी, कुंदन कुमार सिंह, महाबीर प्रजापति, निर्मल महतो, प्रदीप कुमार कुशवाहा, डॉक्टर कविता सिन्हा, बाल कृष्णा प्रसाद, बीबी सालेहा बेगम, यासमीन रहमान, विनय कुमार, गायत्री देवी सहित कुछ अन्य लोग शामिल है. 

 

वन भूमि से संबंधित 74 सेल डीड में से 32 सेल डीड में निहित 11.49 एकड़ वन भूमि पर अतिक्रमण है. वन भूमि पर कब्जा करने वालों में चिंता देवी, दामोदर दास, यमुना प्रसाद मेहता, सलीम मियां, अब्दुल वाहिद, गुडन भुईयां, महेंद्र भुईयां, अभय कुमार सिन्हा, दिनेश चंद्र अग्रवाल, शिव नाथ राणा सहित अन्य लोगों का नाम शामिल है. 

 

DFO की ओर से कोर्ट में दायर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2003 सेल डीड में से 421 सेल डीड में ही विक्रेता सरकार है. 421 सेल डीड में से 415 सेल डीड के सहारे कोयला कंपनियों को जमीन हस्तांतरित की गयी है. 415 में से 389 सेल डीड के सहारे जीवीके कोल 4722 एकड़ जमीन हस्तांतरित की गयी है. इसके अलावा 25 सेल डीड के सहारे एनटीपीसी को ज़मीन हस्तांतरित की गयी है.

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही