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हजारीबाग : बड़कागांव में दिन-रात चल रहा अवैध कोयले का कारोबार , माफियाओं के हौसले बुलंद

Hazaribagh :  जिले में कोयला के अवैध खनन और तस्करी का धंधा सरकारी कोल परियोजनाओं के समानांतर बेखौफ होकर फल-फूल रहा है. यह अवैध धंधा अब रात के अंधेरे तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़कागांव के चपरी और गोण्दलपुरा जैसे क्षेत्रों में दिन के उजाले में भी खुलेआम जारी है, जिससे प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

 

दिन के उजाले में ट्रैक्टरों से तस्करी जारी

स्थानीय लोगों से मिले फोटो और वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बड़कागांव के कई क्षेत्रों में दिनभर ट्रैक्टरों के जरिए अवैध रूप से निकाले गए कोयले की तस्करी हो रही है. इस तस्वीर को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इस अवैध धंधे को खुली छूट मिली हुई है. दूसरे व्यवसाय से जुड़े लोग भी भारी मुनाफे के लालच में इस धंधे में उतर आए हैं. 

 

 500 टन से अधिक कोयले का अवैध खनन

स्थानीय लोगों ने बताया कि जिले में हर रोज 500 टन से अधिक कोयले का अवैध खनन किया जा रहा है, जिसे स्थानीय मंडियों और खासकर ईंट भट्ठों में भेजा जाता है.. अवैध खनन का यह धंधा मुख्य रूप से आंगो, चुरचू, बड़कागांव और केरेडारी के जंगली इलाकों में जोर-शोर से चल रहा है. 

 

इन क्षेत्रों के जंगलों में बड़ी संख्या में अवैध खदानें संचालित हो रही हैं और माफिया लगातार नई खदानें भी खोद रहे हैं. कोयला माफियाओं ने जंगलों में ही कई ठिकाने बना लिए हैं, जहां खनन किए गए कोयले को डंप किया जाता है.

 

मुख्य डंपिंग साइटों में आंगो का मोहनपुर, चूरचू, चरही का चनारो, बड़कागांव का गोंदलपुरा, रजहर, मोतरा घाटी के पास का जंगल और केरेडारी का बुचाडीह जंगल शामिल हैं.

 

 टर्बो ट्रकों से होती है बड़ी सप्लाई

डंपिंग ठिकानों से कोयले को टर्बो ट्रकों में लोड किया जाता है और बड़े पैमाने पर इसकी सप्लाई की जाती है. विशेष रूप से केरेडारी और बड़कागांव दक्षिण क्षेत्र से निकाले गए अवैध कोयले की बड़ी खेप विभिन्न ईंट भट्ठों को सप्लाई की जाती है.

 

हजारीबाग के इन अवैध कोयला धंधेबाजों ने अपनी लाइजनिंग इतनी मजबूत कर रखी है कि अवैध कोयला ट्रकों में लोड होकर धड़ल्ले से पड़ोसी राज्य बिहार की मंडियों तक भी पहुंचाया जा रहा है.

 

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