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हजारीबाग: बालू-गिट्टी के अभाव में गरीबों को नसीब नहीं हो पा रहा सिर पर छत

Pramod Upadhyay Hazaribag : एक तो बारिश का मौसम और सिर के ऊपर छत नहीं. मन में अपना घर होने की तमन्ना लोगों की पूरी नहीं हो पा रही है. दरअसल क्या सोचकर घर बनाने की ठानी थी और क्या परेशानी सामने आकर खड़ी हो गई है. झारखंड में बालू पर पहले से ही प्रतिबंध लगा हुआ है और अब वैध स्टोन क्रशर भी नाम मात्र के ही बचे हुए हैं. दरअसल सरकार ने अवैध क्रशरों पर सख्ती से कार्रवाई का आदेश दे रखा है. जितने भी अवैध क्रशर हैं, अधिकांश पर जिला खनन विभाग ने नकेल कसना शुरू कर दिया है.

उत्पादन कम होने से परेशानी

ऐसे में उत्पादन कम होने से बाजार में छर्री की आपूर्ति भी मांग के अनुरूप नहीं हो पा रही है. इसका क्रशर संचालक फायदा भी उठा रहे हैं और मनमाफिक दाम पर छर्री बेच रहे हैं. इससे आम अवाम त्राहिमाम में है. इधर, इस वजह से प्रशासन की योजनाओं के काम भी अटके पड़े हैं. जिलेभर में प्रधानमंत्री आवास योजना का काम ठप पड़ा हुआ है. बालू और छर्री नहीं मिलने के कारण गरीबों के सिर पर छत नसीब नहीं पा रहे हैं. मकान नहीं बनने से सीमेंट और छड़ की भी बिक्री नहीं हो रही है. इसे भी पढ़ें-MLA">https://lagatar.in/written-complaint-against-mla-anoop-singh-in-argora-police-station-said-anoop-conspired-and-implicated-his-colleagues/">MLA

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दुकानदार भी प्रभावित

बालू और छर्री की बिक्री नहीं होने पर सीमेंट-छड़ के दुकानदार भी प्रभावित हैं. दुकानदार प्रकाश ट्रेडर्स का कहना है कि 90% बिक्री पर मार पड़ी है. एक तो ग्राहकों की संख्या अचानक कम हो गई है. अगर कोई ले भी जा रहा है, तो वह उधारी. ठेकेदारों के काम भी प्रभावित हैं. जिला संवेदक संघ के अध्यक्ष दीपक मेहता का कहना है कि 60% काम की गति धीमी हो गई है. इससे सरकारी योजना पर काम करना मुश्किल हो गया है. प्रशासन समय पर सरकारी, आवास योजना सड़क आदि का काम पूरा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है. ऐसे में क्या करें, कुछ समझ में नहीं आ रहा.

अब तिगुने दाम पर ब्लैक में मिलते हैं सामान

कटकमसांडी स्थित पबरा के रंजीत रजक कहते हैं कि छर्री-बालू के फेर में उनका आवास अधूरा पड़ा है. ब्लैक में छर्री खरीदना उनके लिए संभव नहीं है. पहले छर्री जहां 100 सीएफटी 2000 रुपए में मिल जाते थे, वहीं अब इसके लिए 6000 रुपए की कीमत चुकानी पड़ रही है. बालू भी चोरी-छिपे मनमाने मूल्य पर बेचे जा रहे हैं. पहले बालू प्रति ट्रैक्टर 2000 रुपए में मिलते थे. अब उसी की कीमत 5000-6000 रुपए प्रति ट्रैक्टर हो गई है. ऐसे में घर बनाना ही छोड़ दिया है. पबरा के बबलू मेहता कहते हैं कि सोचा था मई-जून में अपना घर हो जाएगा. लेकिन बालू-छर्री की महंगाई की वजह से उनका गृह प्रवेश का सपना अधूरा रह गया. इसे भी पढ़ें-RINPAS">https://lagatar.in/rinpas-patient-death-case-cjm-court-orders-fir-to-kanke-police-station-jayati-shimalai-will-be-made-accused/">RINPAS

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झोपड़ी में ही कट रही बरसात

मालती देवी कहती हैं कि पांच माह पूर्व ही सरकारी दीनदयाल आवास उन्हें नसीब हो जाती. लेकिन ठेकेदार ने अब तक मकान बनाकर नहीं दिया है. ठेकेदार बालू-छर्री का रोना रोता है. सोचा था बरसात में सिर छिपाने के लिए अपना घर मिल जाएगा. लेकिन अब भी झोपड़ी में ही रहकर बरसात का मौसम काट रही हैं. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2022/08/RRRR-3.jpg"

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लंबित आवास योजना को लेकर फटकार

डीडीसी प्रेरणा दीक्षित ने समाहरणालय सभागार में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में खराब प्रदर्शन करनेवाले पंचायत सेवकों के साथ समीक्षा बैठक की. साथ ही उन्होंने फटकार लगाई कि जल्द आवास पूरा करें. समीक्षा बैठक में डीडीसी ने उपस्थित पंचायत सेवकों को युद्ध स्तर से आवास निर्माण का सख्त निर्देश दिया. वहीं सभी पंचायत सेवकों को व्यापक निरीक्षण कर प्रत्येक लाभुक से उन्हें आवास निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने तथा आवास निर्माण में आने वाली समस्याओं का निराकरण त्वरित गति से करने का निर्देश दिया.

कार्रवाई करने की चेतावनी

डीडीसी ने कहा कि हर 15 दिन में खराब प्रदर्शन करने वाले पंचायत सचिवों के साथ समीक्षा बैठक की जाएगी तथा निरंतर प्रगति नहीं होने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. मौके पर निदेशक जिला ग्रामीण विकास अभिकरण हजारीबाग नियाज अहमद, परियोजना अर्थशास्त्री सोनू कुमार मेहता, जिला समन्वयक अली रजा खान, जिला प्रशिक्षण समन्वयक विजय कुमार साहू एवं सभी प्रखंड समन्वयक उपस्थित थे. [wpse_comments_template]

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