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हजारीबाग: शराब की बढ़ी कीमत, कौन सुनेगा, किसको सुनाऊं, इसीलिए चुप रहता हूं

Hazaribag : कौन सुनेगा, किसको सुनाऊं, इसीलिए चुप रहता हूं. शराब की कीमत में वृद्धि से हजारीबाग के उपभोक्ताओं में नाराजगी है. उपभोक्ताओं का कहना है कि शराब विक्रेता एमआरपी मूल्य से ज्यादा पैसे मांगते हैं. जिससे वो खरीदने को विवश हैं. कुछ कहने पर भी शराब विक्रेता सुनते नहीं हैं. शराब का मामला है तो लोगों का सहयोग भी नहीं मिल सकता है. इसके पीछे का खेल विभागीय मिलीभगत से चल रहा है. अगर उत्पाद विभाग सरकारी शराब की दुकानों पर कार्रवाई करे, तो दुकानदारों पर अंकुश लग जाएगा. जानिए क्या कहते हैं लोग- कोर्रा निवासी युवा रमेश सुंदर : इनका कहना है, अब शराब की लत छोड़नी होगी. इसे जीवन का हिस्सा नहीं बनाना होगा. चूंकि एक तो घर-परिवार से भी उलाहना मिलता है और मूल्य से अतिरिक्त पैसे भी देने पड़ते हैं. महंगे ब्रांड को छोड़ भी दें तो बाकी पर भी 50 रुपए बढ़ाकर देने पड़ते हैं. एक तो छुपकर पीना पड़ता है साथ ही महंगा भी खरीदना पड़ता है. बड़कागांव के दिहाड़ी मजदूर राजा राम का कहना है कि वे सबसे कम कीमत की शराब पीते हैं. उस बोतल पर भी 20-30 रुपए बढ़ाकर देने पड़ते हैं. उनकी रोज की कमाई 300 से 500 रुपए तक है. ऐसे में 150 रुपए की शराब में 170-175 रुपए देने पड़ते हैं. इसकी भरपाई नहीं हो पाती है. दिनभर की थकान से उबरने के लिए रात में शराब की तलब लगती है. ऐसे में दुकानदार मजबूरी का फायदा उठाते हैं. निर्धारित मूल्य पर शराब मिलने पर उन्हें कोई शिकायत नहीं है. चरही का मजदूर करम मांझी का कहना है, दुकान जाते ही मूड खराब हो जाता है. शराब की बोतल पर लिखी कीमत से ज्यादा वसूल लिए जाते हैं. आए दिन शराब दुकानदार से किचकिच हो जाती है. इससे नशा चढ़ने के पहले ही काफूर हो जाता है. दिनभर की मेहनत के बाद इतनी थकान हो जाती है कि एक बोतल पीकर चैन की नींद सोते हैं. लेकिन इसके लिए 160 की जगह 200 रुपए देने पड़ते हैं. इस पर कार्रवाई करने की जरूरत है. कटकमदाग के मयातू निवासी आफताब ने बताया कि दुकान चलानी है, तो सही रेट पर शराब देनी होगी. इसके लिए उपभोक्ताओं को एकजुट होना चाहिए. सभी मिलकर विरोध करेंगे, तभी सुनवाई होगी. इसके लिए उत्पाद विभाग में शिकायत दर्ज करानी होगी. हस्ताक्षर अभियान चलाकर भी विभागीय कार्रवाई के लिए पहल करनी होगी. पीने का मूड होता है तो उसे खराब नहीं किया जा सकता. ऐसे में विरोध करने के बाद भी दुकानदार नहीं मानते और 50-100 रुपए अधिक देने पड़ते हैं. चौपारण के संजय सिन्हा कहते हैं, सबसे बड़ी परेशानी है कि निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे चुकता करने पड़ते हैं. दुकानदार से कीमत पर बहस करते हैं, तो वह बोतल देने से मना करता है. शराब विक्रेता मनमानी कर रहे हैं, इसका विरोध करने की जरूरत है. उत्पाद विभाग को आवेदन लिखकर शिकायत दर्ज करानी होगी. लेकिन बदनामी के डर से चाहते हुए भी विरोध दुकानदार तक ही सिमटकर रह जाता है. कई बार तो मन करता है कि शराब पीना ही छोड़ दें. लेकिन दो-चार दिन के बाद फिर खरीदने चले जाते हैं. लेकिन मूल्य सुनकर मूड खराब हो जाता है. इसे भी पढ़ें-  पीएम">https://lagatar.in/pm-modis-visit-to-bihar-centenary-pillar-of-the-assembly-will-be-unveiled-will-give-many-gifts/">पीएम

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