Hazaribagh: बंदोबस्त कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ मीडिया लगातार प्रखर तरीके से आवाज उठाता आया
है. कभी तस्दीक और खानापूर्ति के नाम पर वसूली, तो कभी दैनिक कर्मियों के हाथों में न्यायालय का काम सौंपना, तो कभी जीएम प्लॉट को बदल कर निजी लोगों के नाम से खाता खोलने को लेकर बंदोबस्त कार्यालय हमेशा सुर्खियों में रहा
है. अब स्थिति यह है कि रात के अंधेरे में कागजात का उलटफेर किया जा रहा
है. मिली जानकारी के अनुसार झारखंड सरकार राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के निदेशालय में चल रहे मामले में बने प्रतिवादी की मौजूदगी में गुरुवार रात 8 बजे बंदोबस्त कार्यालय का
रेकॉर्ड रूम खोलकर दस्तावेजों का उलटफेर किया
गया. बता दें कि भूमि सुधार विभाग के अनुसार पत्रांक संख्या 100 तिथि
22.2.2018 में आदेश जारी किया गया था कि बंदोबस्त पदाधिकारी हजारीबाग के पत्रांक04-1 तिथि
9.3.2017 द्वारा भू मानचित्र की रंगाई एवं जांच कार्य लंबित बताते हुए 11
प्रारूपक संवर्ग के कर्मियों को प्रतिनियुक्त करने का अनुरोध किया
गया. इसके संदर्भ में निदेशालय के पत्रांक 227 द्वारा भू
मानचित्रों के रंगाई एवं जांच संबंधी लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए दैनिक
परिश्रमिक पर 11 कर्मियों से मात्र दो माह के लिए कार्य कराने की स्वीकृति दी गई
थी. इसका अनुपालन बंदोबस्त पदाधिकारी हजारीबाग द्वारा तत्काल नहीं किया गया
था. इससे निदेशालय ने यह स्पष्ट किया कि बंदोबस्त पदाधिकारी हजारीबाग को लंबित कार्यों को निष्पादित करने की आवश्यकता नहीं
थी. इस संदर्भ में निदेशालय ने बंदोबस्त पदाधिकारी हजारीबाग के आदेश ज्ञापन 871- द्वारा
अमीनों को दैनिक
प्रश्रमिक प्रारूपक के पद पर नियुक्ति की
थी. जिसे निदेशालय ने नियमानुसार गलत बताते हुए निर्देश दिया कि बंदोबस्त पदाधिकारी हजारीबाग के नियुक्ति आदेश ज्ञापन 871 तिथि
16.11.2017 को उनके निर्गत की तिथि के प्रभाव से रद्द किया जाता
है. इसमें नौ
अमीनों को सेवा निरस्त किया
गया. उसमें मनोज प्रसाद,
लालकेशर महतो, दीपक कुमार यादव, अनिल कुमार, प्रभु राणा, शंकर दयाल यादव, बीरेंद्र राणा, महेंद्र राणा और मनीष कुमार यादव के नाम शामिल
थे. अब सभी निरस्त
प्रारुपक को कार्यालय के पदाधिकारी अपनी सह पर नया पद देने में रात दिन एक करते दिख रहे
हैं. इसलिए रात को कार्यालय खोलकर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज के साथ प्रतिवादियों को बैठा कर कार्यालय की गोपनीयता को भी भंग कर रहे
हैं. ऐसे ही भ्रष्ट कर्मियों के कारण हजारीबाग जिला समेत विभिन्न क्षेत्रों में कई सरकारी तालाबों का निजी खाता खोलकर भू माफियाओं को सौंप दिया गया, तो कई
गैरमजरूआ खाते की जमीन को नीलाम करवा दिया
गया. सरकारी संपत्ति को बेचना बंदोबस्त कार्यालय का मुख्य पेशा बनता नजर आ रहा
है. वहीं दूसरी ओर वास्तविक रैयत ऐसे कार्यालय में पदाधिकारियों को कोसने में लगे
हैं. बंदोबस्त कार्यालय में जब भ्रष्टाचारियों की टीम कमजोर
पड़ने लगी, तो अधिकारियों ने निरस्त
प्रारुपकों को मुंसलिम, सर्वेयर और इंस्पेक्टर का पद दिलाने में लग
गए. हाईकोर्ट का हवाला देते हुए रजिस्ट्रेशन नंबर
5427/21 के आलोक में दीपक कुमार यादव,मनोज प्रसाद, प्रभु राणा, महेंद्र राणा, शंकर दयाल यादव और मनीष कुमार यादव को पद बदलकर नियुक्ति दिलाने में सरकार और विभाग के आदेशों को छुपा कर नियमों का उल्लंघन करने में लग
गये. बताया जाता है कि रात को जब इसका खुलासा करने संवाददाता कार्यालय पहुंचे, तो
बड़ा बाबू विजय कुमार राय के साथ लिपिक प्रकाश नाथ राय, नजीर पवन उरांव,
प्रघान पेशकार
राघवेनदर कुमार निराला, दैनिक परिमाप निरीक्षक पप्पू गोप और राजेन्द्र प्रसाद यादव समेत सभी लोग एवं कोर्ट से
सम्बंधित आवेदक स्थापना शाखा में
थे. नन्दलाल प्रसाद, रितेश कुमार, विशाल
हेमब्रॉम रेकार्ड रुम में फाइलों के साथ लगे हुए
थे. इस मामले पर बंदोबस्त पदाधिकारी महेश
संथालिया ने कहा कि नियुक्ति का मामला कोर्ट में चल रहा
है. आठ अगस्त को प्रस्तुत होने का समय
है. उसी को लेकर समय के अभाव में
बड़ा बाबू के नेतृत्व में रात को काम किया जा रहा
था. पत्रकार के साथ मारपीट
वहीं मामले की सटीक जानकारी लेने के लिए पत्रकार सचिन खंडेलवाल जब बंदोबस्त पदाधिकारी से मिलने पहुंचे, तो इस दौरान मौजूद सभी कर्मियों ने पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट करने
लगे. इससे वह बुरी तरह घायल हो
गये. सूचना मिलने पर सदर थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर गणेश कुमार सिंह और
लोहसिंघना थाना प्रभारी अरविंद कुमार सिंह सीसीटीवी फुटेज की
पड़ताल की और विभाग के कर्मचारियों से भी फीडबैक
ली. जिला बंदोबस्त पदाधिकारी से लिखित रूप से घटना की जानकारी लेने की कार्रवाई पुलिस अधिकारियों द्वारा की
गई. वहीं दूसरी ओर भुक्तभोगी पत्रकार सचिन खंडेलवाल और अभिषेक कुमार के द्वारा लिखित रूप से कानूनी कार्रवाई के लिए आवेदन प्रेषित किया
गया. इस मामले में
पीड़ित पत्रकार ने 21 नामजद और 15 अज्ञात लोगों पर सदर थाने में केस दर्ज कराया
है. वहीं एसपी मनोज रतन चौथे ने घटना पर
दु:ख व्यक्त करते हुए आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की बात
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