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हजारीबाग लोकसभाः जेपी पटेल के कांग्रेसी होने के मायने

Ranchi : मांडू से तीन बार विधायक रहे जेपी पटेल बुधवार को कांग्रेस में शामिल हो गए. प्रदेश भाजपा के वह सचेतक थे. पटेल वर्तमान में भाजपा से मांडू विधायक हैं और पार्टी में उनकी एक मजबूत पहचान रही है. माना जा रहा है पटेल को कांग्रेस हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाएगी. अगर ऐसा होता है, तो भाजपा प्रत्याशी मनीष जायसवाल के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी. इसे हम लोकसभा व विधानसभा चुनावों व हजारीबाग संसदीय क्षेत्र के जातीय समीकरण से आसानी से समझ सकते हैं. लोकसभा चुनाव को लेकर देखें, तो यदुनाथ पांडेय अपवाद थे. जेपी पटेल के पिता टेकलाल महतो जब तक लोकसभा चुनाव लड़ते रहे, तब तक भाजपा हारती रही. जब टेकलाल महतो गिरिडीह सीट से चुनाव लड़ने चले गए, तब यशवंत सिन्हा चुनाव जीत पाए थे. पिछले दो-तीन लोकसभा चुनावों को देखें, तो कांग्रेस के प्रत्याशी बिना प्रचार और मेहनत किए भी दो से ढाई लाख वोट लाते रहे हैं.

विधानसभा परिणाम के आधार पर स्थिति

मांडू: जेपी पटेल को छोड़ दें, तो यहां से भाजपा का समीकरण हमेशा से कमजोर रहा है. यह सीट जदयू के खाते में रही. जदयू से खीरू महतो सिर्फ एक बार चुनाव जीते. बरकट्ठा : विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा के लिए राह कठिन ही रही है. बहुत पहले चित्तरंजन प्रसाद भाजपा से विधायक रहे थे. जिसके बाद कभी नहीं. बरही : क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी ही जीतते रहे हैं. वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस के पूर्व विधायक मनोज यादव को अपने खेमे में लेकर भाजपा ने टिकट दिया. अकेला यादव एक दिन पहले कांग्रेस से टिकट लेकर लड़े और जीत गए. चुनाव से दो दिन पहले मोदी की रैली भी भाजपा प्रत्याशी मनोज यादव को नहीं जीता पायी थी. हजारीबाग : देवदयाल कुशवाहा के बाद यह सीट भाजपा के हाथ से निकल गयी थी. सौरभ नारायण सिंह ने जब मैदान छोड़ दिया, तभी भाजपा से मनीष जायसवाल जीत पाए. रामगढ़ : पिछली बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. उप चुनाव हुए तो आजसू ने जीत दर्ज की. भाजपा के पक्ष में हालात नहीं हैं. बड़कागांव : पिछले 15 साल से योगेंद्र साव के परिवार का इस विधानसभा क्षेत्र पर कब्जा है.

इन घटनाक्रमों का असर

जयंत सिन्हा : जयंत सिन्हा को लेकर हजारीबाग का प्रबुद्ध वर्ग पांच सालों तक परेशान रहा. 1300 वोट से जीतने वाले को मंत्री पद और करीब पांच लाख वोट से जीतने वाले को किनारे करने को लेकर नाराज रहे. यहां तक कि टिकट भी काट दिया गया. टिकट कटने तक से कम परेशानी होती, लेकिन जिस तरह जयंत सिन्हा ने टिकट बंटवारे से एक दिन पहले खुद को राजनीति से अलग कर दिया, वह लोगों को खल रहा है. अंबा प्रसाद : पूर्व मंत्री व कांग्रेस के नेता योगेंद्र साव और बड़कगांव से विधायक अंबा प्रसाद के यहां पिछले दिनों ईडी ने छापेमारी की. इस छापेमारी की वजह से तेली समाज आहत महसूस कर रहा है. इसे भी पढ़ें : भाजपा">https://lagatar.in/bjp-sacrificed-5-of-its-leaders-for-imports-now-it-is-the-turn-of-the-sixth/">भाजपा

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