- माफिया पर लगा है अखड़ा-मंदिर की जमीन पर कब्जा करने का आरोप
- न्याय प्रणाली पर खड़े किए सवाल
Hazaribagh : हजारीबाग बड़ा अखाड़ा परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में महंत विजयानंद दास ने न्याय प्रणाली पर न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 से वे अपनी शिकायतों को लेकर न्यायालय, समाहरणालय और अंचल कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है.
महंत ने दावा किया कि भूमि संबंधी मामलों में गंभीर अनियमितताएं हो रही हैं. उनके अनुसार, मृत व्यक्तियों के नाम पर जमाबंदी ऑनलाइन दर्ज कर एलपीसी (लैंड पजेशन सर्टिफिकेट) जारी किए जा रहे हैं. आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर शपथ पत्र प्रस्तुत कर करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनों का निबंधन (रजिस्ट्रेशन) कराया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त पत्रांक 786 में यह उल्लेख किया गया है कि संबंधित जमाबंदी बिना सक्षम पदाधिकारी के हस्ताक्षर के दर्ज की गई थी. इसके बावजूद मामले में अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है.
महंत ने बताया कि उन्होंने उपायुक्त, आयुक्त, भूमि सुधार उपसमाहर्ता (DCLR) और अनुमंडल पदाधिकारी (SDPO) के न्यायालयों में भी अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं. उनका आरोप है कि जांच रिपोर्ट आने में वर्षों लग रहे हैं.
उन्होंने कहा कि भूमि सीमांकन की प्रक्रिया तीन वर्ष से लंबित है. जबकि 12 महीने से जांच रिपोर्ट का इंतजार है. इस बीच संबंधित भूमि की खरीद-बिक्री जारी है.
प्रेस वार्ता के दौरान महंत ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि भूमि विवाद को लेकर वे स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. साथ ही आरोप लगाया कि शिकायतों के बावजूद अब तक संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है.
महंत विजयानंद दास ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मठ प्रबंधन के सदस्य भगवान की प्रतिमा के साथ प्रशासनिक कार्यालयों तक मार्च करेंगे, आवेदन सौंपेंगे और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से अपनी आवाज उठाएंगे. उन्होंने कहा कि मठ की भूमि और संपत्तियों की रक्षा के लिए वे लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे.
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